मुंबई। IIT बॉम्बे के एक छात्र की मौत के बाद सोमवार को संस्थान के बाहर विरोध प्रदर्शन किया गया। एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के छात्र साहिल वाकोडे की कथित आत्महत्या के मामले ने अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का रूप ले लिया है।मामले को लेकर छात्र संगठनों और विभिन्न नेताओं ने सवाल उठाए हैं। वहीं, मृतक छात्र के पिता ने शिकायत दर्ज कराते हुए उत्पीड़न और कथित भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, मामले की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
छात्र की मौत के बाद कैंपस के बाहर प्रदर्शन
जानकारी के अनुसार, साहिल वाकोडे ने शुक्रवार को आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद सोमवार को IIT बॉम्बे के बाहर प्रदर्शन किया गया।प्रदर्शन के दौरान छात्रों और अन्य लोगों ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने संस्थान की भूमिका और छात्रों के मानसिक दबाव से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की।
IIT बॉम्बे ने वापस लिया पुराना बयान
IIT बॉम्बे ने 19 सितंबर को जारी अपने एक बयान में कहा था कि छात्र परीक्षा में नकल करते हुए पकड़ा गया था।हालांकि, बाद में संस्थान ने इस बयान को वापस लेते हुए औपचारिक रूप से माफी मांगी। संस्थान ने कहा कि पहले जारी की गई जानकारी को लेकर सुधार किया गया है।इस बदलाव के बाद मामले को लेकर और अधिक सवाल उठने लगे।
पिता ने लगाए उत्पीड़न के आरोप
मृतक छात्र के पिता ने अपनी शिकायत में गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे को मानसिक रूप से परेशान किया गया था।पिता ने यह भी आरोप लगाया कि एक प्रोफेसर ने पिछले तीन महीनों के दौरान छात्र के साथ जातिसूचक टिप्पणियां की थीं।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। जांच एजेंसियां मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।
जातिगत भेदभाव को लेकर उठी बहस
छात्र की मौत के बाद देश में शैक्षणिक संस्थानों में कथित भेदभाव और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बहस तेज हो गई है।कई छात्र संगठनों ने मांग की है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए मजबूत व्यवस्था होनी चाहिए।
अबू आसिम आजमी ने दिया बयान
इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अबू आसिम आजमी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने जातिगत भेदभाव के मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि भेदभाव का विरोध किसी धर्म या समुदाय से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि जातिगत भेदभाव खत्म करने की बात का इस्तेमाल लोगों के बीच नफरत फैलाने या भ्रम पैदा करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
राजनीतिक विवाद बढ़ा
छात्र की मौत के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है। विभिन्न दलों के नेताओं ने घटना को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।कुछ नेताओं ने उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं।
जांच पर टिकी नजर
फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस और संबंधित अधिकारी घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं।जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि छात्र की मौत के पीछे क्या परिस्थितियां थीं और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा
IIT बॉम्बे छात्र मौत मामले ने एक बार फिर उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और दबाव के मुद्दे को सामने ला दिया है।विशेषज्ञों का कहना है कि पढ़ाई का दबाव, व्यक्तिगत परेशानियां और सामाजिक परिस्थितियां छात्रों पर असर डाल सकती हैं। ऐसे में संस्थानों में काउंसलिंग और सहायता व्यवस्था को मजबूत करना महत्वपूर्ण है।
आगे की कार्रवाई
अब सभी की नजर जांच की प्रगति और सामने आने वाले तथ्यों पर है। IIT बॉम्बे की ओर से बयान में सुधार और माफी के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है।छात्र की मौत से जुड़े आरोपों और परिस्थितियों की पूरी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
Tags: