Mumbai मुंबई: भारत के पूर्व नंबर-1 स्क्वैश खिलाड़ी सौरव घोषाल ने अपने 20 वर्षीय करियर के अनुभव साझा करते हुए बताया कि युवा अवस्था में उनका सफलता के बारे में विचार अब पूरी तरह बदल गया है। घोषाल ने कहा, "जब मैं युवा था और स्क्वैश खेलना शुरू किया, तो मेरा यह मानना था कि सफलता केवल इस बात से परिभाषित होती है कि मैंने मैच जीता या हारा। खेल में सब कुछ काला और सफेद लगता है; या तो जीत होती है या हार।"
उन्होंने आगे समझाया कि इस दृष्टिकोण में अब उन्होंने पूरी तरह बदलाव कर लिया है। "आज मैं यह मानता हूँ कि सफलता केवल परिणाम तक सीमित नहीं है। खेल में निरंतर सुधार, मेहनत, रणनीति, मानसिक दृढ़ता और खेल की समझ भी सफलता के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। जीत और हार अस्थायी होती हैं, लेकिन खेल के प्रति लगन और सीखना स्थायी अनुभव देता है।"
सौरव घोषाल ने यह भी कहा कि युवा खिलाड़ी अक्सर परिणाम पर अधिक ध्यान देते हैं, जिससे मानसिक दबाव और तनाव बढ़ता है। उनका अनुभव यह सिखाता है कि खेल में सफलता का असली मापदंड व्यक्तिगत विकास, टीम के साथ तालमेल, अनुशासन और खेल की गुणवत्ता है।
घोषाल ने अपने करियर के उदाहरण देते हुए बताया कि कई ऐसे मौके आए जब उन्होंने हार के बावजूद महत्वपूर्ण सबक सीखे, जिन्होंने उन्हें अगले मैच में और बेहतर बनाया। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि जीत या हार के बजाय खेल की प्रक्रिया और सीख को महत्व दें।
इस अनुभव से सौरव घोषाल यह संदेश देना चाहते हैं कि स्क्वैश या किसी भी खेल में सफलता का वास्तविक मापदंड केवल ट्रॉफी या पदक नहीं, बल्कि समर्पण, निरंतरता और खेल के प्रति प्रतिबद्धता है।