संविधान की प्रस्तावना वाला स्मारक JCB से तोड़ा, पूर्व भाजपा पार्षद समेत तीन पर FIR
पुणे। महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवड़ में संविधान की प्रस्तावना से जुड़े स्मारक को बिना अनुमति तोड़े जाने का मामला सामने आया है। पुराने सांगवी इलाके के संविधान चौक पर स्थित गोलाकार ढांचे को जेसीबी मशीन से ध्वस्त करने के आरोप में सांगवी पुलिस ने पूर्व भाजपा पार्षद संतोष बबन कांबले और दो अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। शिकायत के अनुसार, इस कार्रवाई से करीब पांच लाख रुपये की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। घटना 14 अक्टूबर की बताई जा रही है, जबकि पुलिस ने 21 अक्टूबर को मामला दर्ज किया। इस कार्रवाई के बाद स्थानीय राजनीति में विवाद बढ़ गया है।
शिकायतकर्ता 52 वर्षीय विजय चंद्रकांत कांबले ने आरोप लगाया है कि स्मारक को हटाने से पहले पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (पीसीएमसी), यातायात विभाग या किसी अन्य संबंधित विभाग की अनुमति नहीं ली गई थी। इतना ही नहीं, इस काम के लिए कोई निविदा भी जारी नहीं की गई थी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
14 अक्टूबर को जेसीबी से तोड़ा गया ढांचा
जानकारी के अनुसार, पुराने सांगवी के संविधान चौक पर भारतीय संविधान की प्रस्तावना प्रदर्शित करने वाला एक स्मारक बनाया गया था।
आरोप है कि 14 अक्टूबर को शाम करीब साढ़े पांच बजे से पहले कुछ लोगों ने जेसीबी मशीन की सहायता से चौक पर स्थित गोलाकार ढांचे को ध्वस्त कर दिया।
शिकायत में पूर्व भाजपा पार्षद संतोष बबन कांबले की भूमिका का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि उनकी मौजूदगी या निर्देश पर यह कार्रवाई की गई।
घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने निर्माण ढांचे को तोड़ने के अधिकार तथा आवश्यक प्रशासनिक अनुमति को लेकर सवाल उठाए।
संविधान की प्रस्तावना को पहले हटाया गया
पुलिस शिकायत के अनुसार, ढांचे को तोड़ने से पहले वहां स्थापित भारतीय संविधान की प्रस्तावना को हटाया गया था।
इसके बाद प्रस्तावना से संबंधित प्रतीकात्मक संरचना को नजदीक स्थित बुद्ध विहार में सुरक्षित रख दिया गया।
आरोपियों की ओर से दावा किया गया है कि संविधान की प्रस्तावना को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया गया।
हालांकि, स्थानीय सामाजिक संगठनों ने बिना अनुमति स्मारक हटाने पर आपत्ति जताई है।
उनका कहना है कि संविधान से जुड़े सार्वजनिक स्मारक को हटाने या उसके पुनर्निर्माण का निर्णय निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही लिया जाना चाहिए।
नगर निगम की अनुमति नहीं लेने का आरोप
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक अनुमति को लेकर उठ रहा है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि ढांचे को तोड़ने से पहले नगर निगम से कोई स्वीकृति नहीं ली गई थी।
इसके अलावा संबंधित यातायात विभाग से भी अनुमति प्राप्त नहीं की गई थी।
आरोप यह भी है कि निर्माण या मरम्मत के लिए आवश्यक निविदा प्रक्रिया पूरी नहीं की गई थी।
नगर निगम के संबंधित अधिकारियों ने घटना के संबंध में पुलिस को शिकायत भेजी थी।
अब जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि स्मारक के पुनर्विकास के लिए कोई औपचारिक आदेश जारी हुआ था या नहीं।
पांच लाख रुपये के नुकसान का दावा
शिकायत में सार्वजनिक संपत्ति को लगभग पांच लाख रुपये का नुकसान पहुंचने का आरोप लगाया गया है।
नगर निगम से संबंधित ढांचे को बिना अनुमति तोड़ना सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा मामला माना जा रहा है।
पुलिस जांच में नुकसान का वास्तविक मूल्यांकन और तोड़फोड़ की परिस्थितियां महत्वपूर्ण होंगी।
यह भी देखा जाएगा कि जिस संरचना को हटाया गया, उसका स्वामित्व किस विभाग के पास था और उसके रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी थी।
हालांकि, पांच लाख रुपये की राशि शिकायत में बताया गया अनुमान है। वास्तविक क्षति का अंतिम आकलन संबंधित विभाग की जांच के बाद स्पष्ट होगा।
पूर्व पार्षद समेत तीन के खिलाफ मामला
सांगवी पुलिस ने पूर्व भाजपा पार्षद संतोष बबन कांबले और दो अन्य व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
अन्य आरोपियों में जेसीबी मशीन से जुड़े व्यक्ति और एक मजदूर का उल्लेख किया गया है।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 324(3), 324(5) और 3(5) के साथ सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 की धारा 3(1) के अंतर्गत मामला दर्ज किया है।
सांगवी पुलिस थाने के वरिष्ठ निरीक्षक जितेंद्र कोली ने मामले की जांच जारी होने की जानकारी दी है।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में किसी आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
दस लाख रुपये से होना था स्मारक का नवीनीकरण
इस विवाद में एक महत्वपूर्ण तथ्य स्मारक के प्रस्तावित नवीनीकरण से जुड़ा है।
जानकारी के अनुसार, वर्तमान भाजपा पार्षद तृप्ति कांबले के निधि से स्मारक के नवीनीकरण के लिए लगभग दस लाख रुपये खर्च करने का प्रस्ताव था।
तृप्ति कांबले पूर्व पार्षद संतोष कांबले की पत्नी हैं।
हालांकि, निर्माण से संबंधित आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृति और निविदा प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी।
इस बीच स्मारक का ढांचा तोड़ दिए जाने के कारण विवाद खड़ा हो गया।
यह जांच का विषय है कि औपचारिक अनुमति प्राप्त होने से पहले काम किस आधार पर शुरू कराया गया।
भाजपा पार्षद ने दिया स्पष्टीकरण
विवाद सामने आने के बाद पार्षद तृप्ति कांबले ने अपना पक्ष रखा।
उन्होंने बताया कि स्मारक के नवीनीकरण के लिए नगर निगम को अनुमति संबंधी पत्र भेजा गया था।
उनके अनुसार, विधान परिषद चुनाव की आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण स्वीकृति मिलने में देरी हुई।
उन्होंने दावा किया कि संविधान की प्रस्तावना को सम्मानपूर्वक नजदीक स्थित बुद्ध विहार में सुरक्षित रखा गया है।
तृप्ति कांबले ने संविधान के अपमान के आरोपों से इनकार किया।
वहीं, संतोष कांबले की ओर से भी नवीनीकरण प्रस्ताव के स्वीकृति की प्रतीक्षा में होने की बात सामने आई है।
कांग्रेस और सामाजिक संगठनों का विरोध
स्मारक तोड़े जाने के बाद कांग्रेस नेताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
22 अक्टूबर को संविधान चौक पर अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन शुरू किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा स्मारक को उसके पुराने स्वरूप में दोबारा स्थापित करने की मांग भी उठाई गई।
स्थानीय कांग्रेस नेता नरेंद्र बंसोडे सहित अन्य पदाधिकारियों ने घटना पर नाराजगी जताई।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि संविधान की प्रस्तावना प्रदर्शित करने वाला स्मारक केवल एक निर्माण ढांचा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है।
संविधान के सम्मान को लेकर छिड़ी बहस
भारतीय संविधान की प्रस्तावना देश के लोकतांत्रिक मूल्यों, न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की भावना को व्यक्त करती है।
कई शहरों में संविधान की प्रस्तावना से जुड़े स्मारक और सार्वजनिक स्थल बनाए गए हैं।
इनका उद्देश्य लोगों को संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूक करना है।
पुराने सांगवी में हुई घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है कि ऐसे सार्वजनिक स्थलों में बदलाव करते समय प्रशासनिक प्रक्रिया और स्थानीय नागरिकों की भावनाओं का ध्यान किस तरह रखा जाना चाहिए।
हालांकि, किसी ढांचे का नवीनीकरण करना और बिना अनुमति सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना अलग कानूनी विषय हैं।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
सांगवी पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
जांच में यह पता लगाया जाएगा कि स्मारक को तोड़ने का निर्णय किसने लिया और जेसीबी मशीन का इस्तेमाल किसके निर्देश पर किया गया।
इसके अलावा नगर निगम की स्वीकृति, निविदा प्रक्रिया और प्रस्तावित नवीनीकरण से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की जाएगी।
पुलिस प्रत्येक आरोपी की भूमिका और सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान का मूल्यांकन करेगी।
फिलहाल मामला दर्ज होने से आरोप सिद्ध नहीं होते। अंतिम निर्णय जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
संविधान चौक में हुई इस घटना ने सार्वजनिक स्मारकों की सुरक्षा, प्रशासनिक अनुमति और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं।