महाराष्ट्र में मानसून का जोर, कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी

Update: 2026-08-01 06:18 GMT

मुंबई। महाराष्ट्र में मानसून की सक्रियता लगातार बनी हुई है। शनिवार को राज्य के कई हिस्सों में तेज बारिश दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों में प्रदेश के कई क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने नासिक और पुणे के घाट क्षेत्रों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि कई अन्य जिलों को येलो अलर्ट पर रखा गया है।

मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से महाराष्ट्र के कोंकण, पश्चिमी घाट और विदर्भ के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेज हुई हैं। इसके कारण राज्य के कई इलाकों में लगातार बारिश हो रही है।

IMD के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में महाराष्ट्र में औसतन 51.09 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। वहीं, जून और जुलाई महीने के दौरान राज्य में सामान्य से 104.1 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। इस बार मानसून की अच्छी सक्रियता के कारण कई क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ा है और कृषि गतिविधियों को भी फायदा पहुंचा है।

मौसम विभाग ने नासिक और पुणे घाट क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा सिंधुदुर्ग, सतारा, कोल्हापुर, नंदुरबार, वर्धा और चंद्रपुर जिलों को येलो अलर्ट पर रखा गया है। इन क्षेत्रों में प्रशासन को सतर्क रहने और जरूरी तैयारियां रखने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य के कई जिलों में इस मानसून सीजन में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। जलगांव, मराठवाड़ा, नासिक और अहिल्यानगर समेत कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। बारिश के कारण नदियों और जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ा है, जिससे जल संसाधनों की स्थिति बेहतर हुई है।

कृषि क्षेत्र के लिए भी यह बारिश राहत लेकर आई है। खरीफ फसलों की बुवाई और वृद्धि के लिए पर्याप्त पानी मिलने से किसानों को लाभ हुआ है। धान, सोयाबीन, कपास और अन्य खरीफ फसलों के लिए बारिश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि, लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कुछ क्षेत्रों में परेशानी भी सामने आई है। कई स्थानों पर जलभराव, बाढ़ जैसी स्थिति और दुर्घटनाओं की घटनाएं दर्ज की गई हैं। भारी बारिश के कारण कुछ इलाकों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें और अनावश्यक रूप से जलभराव वाले क्षेत्रों या नदी-नालों के पास जाने से बचें। आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

कोंकण और पश्चिमी घाट क्षेत्रों में पहाड़ी इलाकों के कारण बारिश के दौरान भूस्खलन और सड़क बाधित होने का खतरा बढ़ जाता है। इसे देखते हुए संबंधित विभागों को निगरानी बढ़ाने और आपात स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

विदर्भ के कुछ हिस्सों में भी बारिश का असर देखने को मिल रहा है। चंद्रपुर और वर्धा जैसे जिलों में येलो अलर्ट जारी कर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन स्थानीय स्तर पर हालात की लगातार समीक्षा कर रहा है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम के कारण महाराष्ट्र में बारिश की गतिविधियां कुछ दिनों तक जारी रह सकती हैं। ऐसे में लोगों को मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन भारी बारिश से उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। राहत और बचाव दलों को जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रखा गया है।

कुल मिलाकर, महाराष्ट्र में मानसून इस समय पूरी तरह सक्रिय है। जहां एक ओर अच्छी बारिश से जल स्रोतों और खेती को फायदा मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर अत्यधिक बारिश वाले क्षेत्रों में सतर्कता बरतना जरूरी हो गया है।

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