वसई-विरार: महाराष्ट्र के पालघर ज़िले में नालासोपारा-वसई लिंक रोड पर अचोले इलाके में मौजूद कई मंज़िला 'इंपीरियल हाइट्स' बिल्डिंग में भीषण आग लगने से दो महिलाओं की मौत हो गई। इस घटना से निवासियों में दहशत फैल गई और कई लोग ऊपरी मंज़िलों पर फंस गए।
आग मंगलवार रात करीब 11:30 बजे लगी, जिसके बाद वसई-विरार नगर निगम के अग्निशमन विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। फायर इंजन, टर्नटेबल लैडर (TTL) मशीनों और खास उपकरणों का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया गया। बिल्डिंग से करीब 25 से 30 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
मृतकों की पहचान फाल्गुनी शाह (50) और अश्विनी पारकर (50) के तौर पर हुई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उनकी मौत धुएं के कारण दम घुटने से हुई हो सकती है।
वसई-विरार नगर निगम के कमिश्नर पृथ्वीराज बी.पी. ने बताया कि रात करीब 11:30 बजे आग लगने की सूचना मिली, जिसके बाद दमकलकर्मी, पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया।
कमिश्नर के अनुसार, शुरुआत में दमकलकर्मियों और TTL मशीनों की मदद से करीब 15 से 20 लोगों को बचाया गया, जबकि कई अन्य निवासी सुरक्षित रूप से बिल्डिंग से नीचे उतरने में कामयाब रहे।
उन्होंने बताया कि घटना से प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी रहने की व्यवस्था पास के बैंक्वेट हॉल और होटलों में की गई है।
कमिश्नर ने कहा कि आग लगने के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जाएगी। जांच में बिल्डिंग के निर्माण की मंज़ूरी, फायर सेफ्टी से जुड़ी मंज़ूरी, फायर फाइटिंग सिस्टम की हालत और इलेक्ट्रिकल पैनल में शॉर्ट सर्किट की संभावना जैसे पहलुओं को देखा जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर कोई लापरवाही या सुरक्षा में कमी पाई जाती है, तो उचित कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने आगे कहा कि बचाव अभियान के दौरान लोगों की जान बचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। सीढ़ियों वाले हिस्से में भीषण गर्मी को देखते हुए, दमकलकर्मियों ने स्थिति का सावधानीपूर्वक आकलन किया और फंसे हुए निवासियों को सुरक्षित करने के बाद उन्हें योजनाबद्ध तरीके से बाहर निकाला। वसई-विरार म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के चीफ फायर ऑफिसर रोहन मोरे ने बताया कि स्थानीय पार्षद अशोक शेलके ने उन्हें आधी रात के करीब इस घटना की जानकारी दी। तब तक, अचोले इलाके से दो फायर इंजन मौके पर पहुँच चुके थे।
मोरे ने बताया कि शुरू में आग चौथी मंज़िल पर लगने की खबर मिली थी, लेकिन जब फायर ब्रिगेड के कर्मचारी मौके पर पहुँचे तो आग की गंभीरता का पता चला। कई निवासी ऊपरी मंज़िलों पर फँसे हुए थे, इसलिए उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना विभाग की पहली प्राथमिकता थी।
एक खास TTL मशीन की मदद से इमारत के बाहर से आठ लोगों को बचाया गया। कुल मिलाकर, अलग-अलग जगहों से बचाए गए निवासियों समेत लगभग 25 से 30 लोगों को बाहर निकाला गया।
चीफ फायर ऑफिसर के अनुसार, आग 13वीं और 14वीं मंज़िल पर बहुत ज़्यादा भयंकर थी। तीसरी और नौवीं मंज़िल पर भी आग या सुलगते अंगारे मिले, जबकि 12वीं मंज़िल पर रिफ्यूज फ्लोर (सुरक्षित मंज़िल) की ओर जाने वाला दरवाज़ा आग की लपटों में घिरा हुआ था। फायरफाइटर्स ने आग पर काबू पाने और निवासियों को बचाने के लिए कई मंज़िलों पर ऑपरेशन चलाया।
आग पर काबू पाने के लिए कई फायर इंजन, पानी के टैंकर, वॉटर ब्राउज़र और खास वॉटर टावर तैनात किए गए। आग बुझाने के ऑपरेशन में मदद के लिए प्राइवेट पानी के टैंकर भी बुलाए गए। मोरे ने कहा कि आग लगने की असली वजह का पता जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा।
वसई-विरार म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के तुलिंज अस्पताल की इंचार्ज डॉ. कविता जगाडा ने IANS को बताया कि दोनों महिलाओं को मामूली रूप से जलने की चोटें आई थीं। शुरुआती जांच से पता चला कि फेफड़ों में धुआँ जाने की वजह से उनकी मौत हुई होगी। पंचनामा या जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, उनके शव वसई वेस्ट के मुर्दाघर भेज दिए गए। मौत की असली वजह का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद चलेगा। इस घटना के बाद, वसई-विरार के मेयर अजीब पाटिल, म्युनिसिपल कमिश्नर पृथ्वीराज बी.पी., विधायक स्नेहा दुबे पंडित, एडिशनल कमिश्नर संजय हरवाडे, सिटी इंजीनियर प्रदीप पचंगे, ACP सुनील जयभाये, MBVV पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर और अन्य पुलिसकर्मी हालात और बचाव कार्यों का जायज़ा लेने के लिए घटनास्थल पर पहुँचे।