लातूर: महाराष्ट्र के अंबाजोगाई, लातूर और आसपास के क्षेत्रों में आने वाले दिनों में पेयजल संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। क्षेत्र के हजारों लोगों की प्यास बुझाने वाले मांजरा जलाशय में पानी का स्तर लगातार कम बना हुआ है। वर्तमान में जलाशय केवल 16 प्रतिशत तक ही भरा है, जिससे स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
मांजरा जलाशय इस क्षेत्र के लिए पेयजल का प्रमुख स्रोत है। अंबाजोगाई, लातूर और आसपास के करीब 28 गांवों में जलापूर्ति के लिए इसी जलाशय पर निर्भरता है। लेकिन दक्षिण-पश्चिम मानसून के शुरुआती महत्वपूर्ण महीनों जून और जुलाई में जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र में अपेक्षित बारिश नहीं होने के कारण जलस्तर में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं हो सकी।
मानसून के दौरान होने वाली बारिश जलाशयों और बांधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। जून और जुलाई में अच्छी बारिश होने से जलस्रोतों में पानी का संचय बढ़ता है, जिससे पूरे साल पेयजल और अन्य जरूरतों को पूरा किया जा सके। लेकिन इस बार कम बारिश के चलते मांजरा जलाशय में पानी की आवक प्रभावित हुई है।
जलाशय में कम पानी होने से आने वाले महीनों में पेयजल आपूर्ति योजनाओं पर दबाव बढ़ सकता है। अगर मानसून के बाकी समय में भी पर्याप्त बारिश नहीं होती है, तो प्रशासन को जल प्रबंधन के लिए अतिरिक्त उपाय करने पड़ सकते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, गर्मी के दिनों में पहले से ही कई इलाकों में पानी की समस्या सामने आती रही है। ऐसे में जलाशय में कम पानी बचना भविष्य के लिए चिंता का विषय है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि जलस्तर में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
प्रशासन की नजर फिलहाल मानसून की स्थिति पर बनी हुई है। अधिकारियों द्वारा जलाशय में पानी की उपलब्धता और खपत की लगातार निगरानी की जा रही है। जरूरत पड़ने पर पानी के उपयोग को लेकर योजनाबद्ध तरीके से कदम उठाए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जलाशय की स्थिति केवल मौजूदा जलस्तर से नहीं, बल्कि आने वाले महीनों में पानी की मांग और बारिश की स्थिति से भी तय होती है। ऐसे में जल संरक्षण और पानी के उचित इस्तेमाल पर जोर देना जरूरी है।
क्षेत्र में पेयजल संकट की आशंका को देखते हुए लोगों से भी पानी की बर्बादी रोकने की अपील की जा रही है। प्रशासन और स्थानीय निकायों को उम्मीद है कि मानसून के आने वाले दौर में अच्छी बारिश होने से मांजरा जलाशय के जलस्तर में सुधार हो सकता है।
मांजरा जलाशय से जुड़े गांवों के लोगों की नजर अब मानसून की आगामी बारिश पर टिकी हुई है। यदि जलाशय में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचा तो प्रशासन को वैकल्पिक जल व्यवस्था और आपूर्ति प्रबंधन की दिशा में कदम उठाने पड़ सकते हैं।
अंबाजोगाई और लातूर क्षेत्र पहले भी जल संकट का सामना कर चुके हैं। ऐसे में इस बार मानसून के दौरान कम बारिश ने एक बार फिर जल प्रबंधन की चुनौतियों को सामने ला दिया है। जलाशय का मौजूदा स्तर क्षेत्र के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में होने वाली बारिश से जलाशय में पानी की आवक बढ़ेगी। लेकिन यदि बारिश कमजोर रही, तो 28 गांवों की पेयजल व्यवस्था को लेकर मुश्किलें बढ़ सकती हैं।