SGNP में बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन, गंभीर रूप से घायल 5 साल के तेंदुए को बचाया गया
Maharashtra महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के संजय गांधी नेशनल पार्क (SGNP) के येऊर कंट्रोल ज़ोन में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने एक बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक गंभीर रूप से घायल पांच वर्षीय तेंदुए को सफलतापूर्वक बचा लिया। फिलहाल तेंदुए का बोरीवली लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर में इंटेंसिव ट्रीटमेंट चल रहा है, जहां विशेषज्ञ उसकी हालत पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
यह आपात स्थिति 30 मई की शाम करीब 5 बजे शुरू हुई, जब फॉरेस्ट कर्मचारियों ने पचपाखड़ी (इंदिरानगर) रिज़र्व फॉरेस्ट क्षेत्र में एक पेड़ पर कमजोर और घायल तेंदुए को देखा। इसकी जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत सक्रिय हो गई और मौके पर पहुंची।
रेस्क्यू ऑपरेशन में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के साथ महाराष्ट्र स्टेट सिक्योरिटी कॉर्पोरेशन, वाइल्डलाइफ वेलफेयर एसोसिएशन (WWA) और रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन ऑफ वाइल्डलाइफ (RAWW) जैसी वाइल्डलाइफ NGOs की टीमें भी शामिल हुईं। सभी टीमों ने मिलकर इलाके को घेरकर स्थिति को नियंत्रित किया और तेंदुए को सुरक्षित बचाने की रणनीति बनाई।
अधिकारियों के अनुसार, तेंदुआ काफी कमजोर और गंभीर रूप से घायल अवस्था में था, जिसके कारण तुरंत हस्तक्षेप आवश्यक था। हालांकि, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रात में रेस्क्यू ऑपरेशन करना जोखिम भरा माना गया, इसलिए वन विभाग ने सावधानी बरतते हुए रातभर इलाके की कड़ी निगरानी रखने का निर्णय लिया।
पूरे क्षेत्र को सुरक्षित करते हुए वनकर्मियों ने यह सुनिश्चित किया कि तेंदुए को किसी तरह की अतिरिक्त चोट न पहुंचे और न ही वह घबराकर किसी अन्य खतरे की स्थिति में जाए। सुबह होते ही विशेषज्ञ टीमों ने रेस्क्यू प्रक्रिया को आगे बढ़ाया और तेंदुए को सुरक्षित पकड़कर रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया।
बोरीवली लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर में पशु चिकित्सकों की टीम तेंदुए का इलाज कर रही है। शुरुआती जांच में उसके शरीर पर गंभीर चोटों के संकेत मिले हैं, जिसके कारण उसे लगातार निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों का कहना है कि अगले कुछ दिन उसके स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
वन विभाग ने बताया कि यह रेस्क्यू ऑपरेशन टीमवर्क और त्वरित प्रतिक्रिया का एक सफल उदाहरण है। सभी एजेंसियों के समन्वय से एक बड़े वन्यजीव को सुरक्षित बचाया जा सका। अधिकारियों ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई ही जान बचाने का सबसे बड़ा माध्यम होती है।
इस घटना के बाद SGNP क्षेत्र में वन्यजीव सुरक्षा और निगरानी को और मजबूत करने की बात कही गई है, ताकि भविष्य में किसी भी घायल जानवर को समय पर मदद मिल सके।