मुंबई: महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने दवाओं और कॉस्मेटिक उत्पादों के निर्माण तथा बिक्री में अनियमितताओं के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की है। पांच से 17 अक्टूबर तक चले विशेष निरीक्षण अभियान में 29 लाइसेंस रद्द और 71 निलंबित किए गए। इस दौरान राज्य के सातों विभागों में कुल 937 निरीक्षण हुए। शुक्रवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, बिना लाइसेंस कारोबार और अन्य उल्लंघनों से संबंधित कार्रवाइयों में 28.52 लाख रुपये से अधिक की दवाएं, कॉस्मेटिक उत्पाद तथा अन्य सामग्री जब्त की गई। 
अभियान का दायरा केवल मेडिकल दुकानों तक सीमित नहीं था। इसमें औषधि निर्माता, सौंदर्य प्रसाधन निर्माता, चिकित्सा उपकरण बनाने वाली इकाइयां, रक्त केंद्र, रक्त भंडारण केंद्र और दवा परीक्षण प्रयोगशालाएं भी शामिल थीं। निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों पर संबंधित प्रतिष्ठानों को कुल 450 नोटिस जारी किए गए। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कार्रवाई अलग-अलग प्रकार के नियम उल्लंघनों पर हुई है। सभी रद्द लाइसेंसों या जब्त उत्पादों को नकली दवा से जुड़ा मामला मानना सही नहीं होगा। 
दवा बिक्री लाइसेंस रखने वाले प्रतिष्ठानों के कुल 832 निरीक्षण किए गए। इनमें नियमित जांच, विशेष अभियान के अंतर्गत निरीक्षण और नागरिकों की शिकायतों पर की गई पड़ताल शामिल थी। कमियां मिलने पर दवा विक्रेताओं को 382 नोटिस दिए गए। इस श्रेणी में 22 लाइसेंस रद्द और 49 निलंबित किए गए। कार्रवाई औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम तथा संबंधित नियमों के उल्लंघन के आधार पर की गई। इससे बिक्री केंद्रों पर लाइसेंस और संचालन संबंधी शर्तों के अनुपालन की स्थिति सामने आई है।
निर्माण इकाइयों, रक्त केंद्रों और अन्य संबंधित संस्थानों की श्रेणी में 105 निरीक्षण हुए। इनमें मिली गंभीर कमियों के आधार पर सात लाइसेंस रद्द और 22 निलंबित किए गए। इस वर्ग में संबंधित संस्थानों को 68 नोटिस जारी हुए। दोनों प्रमुख श्रेणियों को मिलाकर रद्द लाइसेंसों की संख्या 29 और निलंबित लाइसेंसों की संख्या 71 है। इस तरह कुल 100 लाइसेंसों पर कार्रवाई हुई है। इसे 100 लाइसेंस रद्द होने के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए, क्योंकि रद्द करने और निलंबन के आंकड़े अलग हैं। 
जब्ती की प्रमुख कार्रवाइयों में नागपुर का मामला शामिल है। एफडीए के बयान के मुताबिक, फीनिक्स मेडिकॉर्प के यहां लाइसेंस सरेंडर करने के बाद भी बिना लाइसेंस वाले परिसर से कारोबार किए जाने का आरोप सामने आया। वहां से लगभग 22.03 लाख रुपये का स्टॉक जब्त किया गया। जालना में नवजीवन मेडिकल एंड जनरल स्टोर्स के खिलाफ भी ऐसी ही अनियमितता पर कार्रवाई हुई। यहां लाइसेंस सरेंडर करने के बावजूद बिना लाइसेंस वाले परिसर से कारोबार किए जाने पर 58,772 रुपये का स्टॉक जब्त किया गया। 
कॉस्मेटिक उत्पादों के निर्माण में भी अनियमितताएं मिलीं। पुणे जिले के बारामती में वेदास हर्बल्स महिला गृह उद्योग में बिना लाइसेंस साबुन निर्माण के मामले में 4,05,678 रुपये का स्टॉक जब्त किया गया। पालघर जिले के वसई में जीबी कॉस्मेटिक्स के यहां बिना लाइसेंस नेल पॉलिश बनाने के आरोप में कार्रवाई हुई। वहां से 1,83,918 रुपये की सामग्री और मशीनरी जब्त की गई। ये मामले दिखाते हैं कि अभियान में तैयार उत्पादों के साथ उत्पादन से संबंधित सामग्री और उपकरणों पर भी कार्रवाई की गई। 
छत्रपति संभाजीनगर में नाइट्राजेपाम की 34 गोलियों की कथित अवैध खरीद-बिक्री का मामला सामने आया। इस संबंध में दो व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और दोनों को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई एनडीपीएस अधिनियम तथा औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत हुई है। यह मामला अन्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस रद्द या निलंबित किए जाने की प्रशासनिक कार्रवाई से अलग है। उपलब्ध जानकारी में आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज होने का उल्लेख है; अदालत में आरोप सिद्ध होने संबंधी कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। 
गुणवत्ता की पड़ताल के लिए अभियान के दौरान 149 नए नमूने लिए गए। इनमें 115 एलोपैथिक दवाओं, 14 आयुर्वेदिक दवाओं, 17 कॉस्मेटिक उत्पादों और तीन होम्योपैथिक दवाओं के नमूने शामिल थे। इसी अवधि में मुंबई, छत्रपति संभाजीनगर और नागपुर की प्रयोगशालाओं ने कुल 279 नमूनों की जांच पूरी की। नए एकत्र किए गए नमूनों और प्रयोगशालाओं में जांच पूरी होने वाले नमूनों की संख्या अलग है। इसलिए 149 में से 21 नमूने फेल होने का निष्कर्ष इन आंकड़ों से नहीं निकाला जा सकता। 
प्रयोगशाला में जांचे गए 279 नमूनों में 258 निर्धारित मानकों पर खरे उतरे, जबकि 21 में खामियां मिलीं। इनमें 18 नमूने मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं थे, दो मिथ्याछाप और एक नकली पाया गया। पांच मामलों में उत्पाद वापस मंगाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रशासन ने जांच में मिली कमियों पर आगे की कार्रवाई भी शुरू की है। पूरे अभियान के आंकड़े दवा गुणवत्ता, बिना लाइसेंस संचालन और बिक्री संबंधी उल्लंघनों की अलग-अलग तस्वीर पेश करते हैं। अंतिम कार्रवाई संबंधित मामले और उसके साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी।
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