मुंबई/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (PMFME) योजना के तहत बेहतरीन प्रदर्शन के लिए महाराष्ट्र को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र की ओर से यह राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किया। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। इस अवसर पर कृषि विभाग के निदेशक विनयकुमार अवटे और PMFME के राज्य लीड मैनेजर अमोल चिद्रावर भी मौजूद रहे।
राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने इसे महाराष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल सरकार या किसी एक विभाग की उपलब्धि नहीं है, बल्कि राज्य के किसानों, महिलाओं, युवाओं, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों, सूक्ष्म उद्यमियों और कृषि विभाग की लगातार मेहनत और प्रयासों की पहचान है।
किसानों और ग्रामीण उद्यमियों की मेहनत को पहचान
भरणे ने कहा कि महाराष्ट्र में कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों ने खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में लगातार काम किया है। किसानों की उपज को केवल कच्चे माल के तौर पर बेचने के बजाय उसका प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मूल्यवर्धन करने की दिशा में कई प्रयास किए जा रहे हैं। इससे कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि PMFME योजना के माध्यम से छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों को अपने कारोबार को विकसित करने का अवसर मिला है। इस क्षेत्र में किसानों के साथ-साथ महिलाओं, युवाओं और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी भी बढ़ी है। किसान उत्पादक संगठनों ने भी कृषि उत्पादों को संगठित तरीके से बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण को मिल रहा बढ़ावा
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना का उद्देश्य देश में छोटे और सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को मजबूत करना है। योजना के तहत स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन को प्रोत्साहित किया जाता है। इससे किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार और अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकते हैं।
महाराष्ट्र कृषि उत्पादन के मामले में देश के प्रमुख राज्यों में शामिल है। राज्य में विभिन्न प्रकार की फसलों, फलों, सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। ऐसे में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विस्तार की काफी संभावनाएं हैं। PMFME योजना के माध्यम से इन संभावनाओं को छोटे उद्यमों और स्थानीय कारोबार में बदलने पर जोर दिया जा रहा है।
महिलाओं और युवाओं की बढ़ी भागीदारी
कृषि मंत्री ने विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े छोटे कारोबार से जोड़ने में मदद मिली है। इससे महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और परिवार की आय में योगदान देने का अवसर मिल रहा है।
इसी तरह ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं के लिए खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र उद्यमिता का नया माध्यम बन रहा है। स्थानीय कृषि उत्पादों पर आधारित छोटे उद्योग शुरू करके युवा अपने क्षेत्र में ही रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ पलायन को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
किसान उत्पादक संगठनों की भूमिका
PMFME योजना के तहत किसान उत्पादक संगठनों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किसान उत्पादक संगठन किसानों को सामूहिक रूप से उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन से जोड़ने में मदद करते हैं। इससे छोटे किसानों की बाजार तक पहुंच मजबूत हो सकती है और उन्हें अपने उत्पादों के बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ती है।
महाराष्ट्र में कृषि उत्पादों की विविधता को देखते हुए किसान उत्पादक संगठनों और सूक्ष्म उद्यमियों के बीच समन्वय खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित होने से कृषि उत्पादों की बर्बादी कम करने और उनकी गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है।
कृषि विभाग के प्रयासों को भी सराहा
मंत्री भरणे ने पुरस्कार को कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों से भी जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए सरकार, किसानों, उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों के बीच समन्वय जरूरी है।
कार्यक्रम में कृषि विभाग के निदेशक विनयकुमार अवटे और PMFME के राज्य लीड मैनेजर अमोल चिद्रावर की मौजूदगी भी रही। दोनों अधिकारियों की उपस्थिति में महाराष्ट्र की ओर से पुरस्कार ग्रहण किया गया। राज्य स्तर पर योजना के कार्यान्वयन और लाभार्थियों तक इसके लाभ पहुंचाने में विभागीय तंत्र की भूमिका अहम मानी जा रही है।
कृषि उपज के मूल्यवर्धन पर जोर
कृषि क्षेत्र में किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं माना जाता। कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और पैकेजिंग करके उनका मूल्य बढ़ाया जा सकता है। इससे किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को कृषि आधारित कारोबार में आगे बढ़ने के अतिरिक्त अवसर मिलते हैं।
PMFME योजना के तहत इसी तरह के छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को प्रोत्साहन देने की कोशिश की जा रही है। महाराष्ट्र जैसे कृषि प्रधान राज्य में इसका प्रभाव व्यापक हो सकता है। फल, सब्जियों, अनाज, दालों और अन्य कृषि उत्पादों पर आधारित प्रसंस्करण इकाइयां स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के स्रोत विकसित कर सकती हैं।
राष्ट्रीय पुरस्कार से बढ़ा उत्साह
महाराष्ट्र को मिला यह राष्ट्रीय पुरस्कार राज्य में PMFME योजना के तहत किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान देने वाला माना जा रहा है। दत्तात्रेय भरणे ने इसे किसानों, महिलाओं, युवाओं, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों और सूक्ष्म उद्यमियों की मेहनत का सम्मान बताया।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में राज्य के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरणा देगी। कृषि उत्पादों का स्थानीय स्तर पर मूल्यवर्धन, ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा और किसानों को बाजार से बेहतर तरीके से जोड़ना आने वाले समय में महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण दिशा साबित हो सकता है।
नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में महाराष्ट्र की ओर से पुरस्कार ग्रहण किए जाने के साथ राज्य के कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली है। यह सम्मान राज्य के छोटे उद्यमियों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी प्रोत्साहन का संदेश माना जा रहा है।