मुंबई। मुंबई के पवई स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बॉम्बे (IIT बॉम्बे) में छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद संस्थान के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे विवाद के केंद्र में आ गए हैं। छात्र के परिवार और कैंपस के कुछ समूहों ने आरोप लगाया है कि एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के फैकल्टी सदस्य प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला से जुड़े आरोपों पर संस्थान ने पर्याप्त कार्रवाई नहीं की। इन आरोपों की पुलिस जांच जारी है और अभी इन्हें अंतिम रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।

प्रोफेसर केदारे का IIT बॉम्बे से जुड़ाव कई दशक पुराना है। संस्थान की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक उन्होंने IIT बॉम्बे से 1985 में बीटेक और 1988 में पीएचडी पूरी की। वह लंबे समय तक यहां शिक्षक रहे और अप्रैल 2023 में संस्थान के निदेशक बने। उनकी विशेषज्ञता ऊर्जा और सौर तापीय प्रौद्योगिकी से संबंधित क्षेत्रों में रही है।

छात्र की मौत के बाद बढ़ा विवाद

विवाद की शुरुआत 20 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद हुई। साहिल IIT बॉम्बे में दूसरे वर्ष का बीटेक छात्र था। वह 18 सितंबर को हॉस्टल के कमरे में मृत मिला था। मामले के सामने आने के बाद परिवार ने दावा किया कि साहिल को संस्थान में जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था।

परिवार ने विशेष रूप से प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला पर गंभीर आरोप लगाए। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है, जो छात्र की मौत से पहले की परिस्थितियों और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है।

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि प्रोफेसर डूला और संस्थान के अधिकारियों पर लगाए गए आरोप जांच के दायरे में हैं। पुलिस जांच या न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।

प्रोफेसर को बचाने का आरोप

साहिल की मौत के बाद प्रदर्शन कर रहे छात्रों और परिवार के सदस्यों ने IIT बॉम्बे प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए। इसी क्रम में निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे पर प्रोफेसर डूला को बचाने का आरोप लगाया गया।

आरोप लगाने वालों का कहना है कि संस्थान को छात्र की शिकायतों और उससे जुड़े घटनाक्रम पर पहले ही अधिक प्रभावी ढंग से कार्रवाई करनी चाहिए थी। दूसरी ओर संस्थान ने मामले में जांच और छात्र समुदाय की चिंताओं पर कदम उठाने की बात कही है।

इस विवाद के बाद कैंपस में छात्रों ने प्रदर्शन किया और प्रशासन के सामने कई मांगें रखीं। इनमें छात्र की मौत की स्वतंत्र जांच, कैंपस में भेदभाव से संबंधित शिकायतों के समाधान की व्यवस्था मजबूत करना और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना शामिल था।

छात्रों ने मांगा डायरेक्टर का इस्तीफा

साहिल की मौत के बाद IIT बॉम्बे परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों के एक वर्ग ने निदेशक शिरीष केदारे के इस्तीफे की मांग भी उठाई। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना था कि मामले में संस्थागत जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

छात्रों की ओर से कई मांगें प्रशासन के सामने रखी गईं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक प्रशासन ने इनमें से अधिकांश मांगों पर सहमति जताई, हालांकि निदेशक के इस्तीफे की मांग स्वीकार नहीं की गई।

इस पूरे घटनाक्रम ने IIT बॉम्बे में छात्र कल्याण, शिकायत निवारण और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर बहस तेज कर दी है।

परीक्षा के दौरान हुई घटना की भी जांच

पुलिस साहिल की मौत से पहले परीक्षा कक्ष में हुई एक घटना की भी जांच कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल से जुड़ा मामला सामने आया था। जांच अधिकारी उस समय मौजूद छात्रों और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज कर घटनाक्रम समझने की कोशिश कर रहे हैं।

पुलिस के सामने अब कई पहलू हैं। इनमें परीक्षा से जुड़ी घटना, परिवार के जातिगत भेदभाव के आरोप, छात्र की मानसिक स्थिति और संस्थान के स्तर पर हुई कार्रवाई शामिल हैं।

इसी कारण जांच पूरी होने से पहले छात्र की मौत के पीछे किसी एक कारण को निश्चित रूप से जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।

कई दशक से IIT बॉम्बे से जुड़े हैं केदारे

प्रोफेसर शिरीष केदारे की पहचान IIT बॉम्बे के पुराने छात्रों और शिक्षकों में होती है। संस्थान में विद्यार्थी के रूप में शुरुआत करने के बाद उन्होंने वहीं अकादमिक क्षेत्र में अपना करियर आगे बढ़ाया।

उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग से बीटेक किया और बाद में पीएचडी पूरी की। इसके बाद वह संस्थान में शिक्षण और अनुसंधान से जुड़े। समय के साथ उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी संभालीं और 2023 में IIT बॉम्बे के निदेशक बने।

उनके शोध का प्रमुख क्षेत्र ऊर्जा प्रौद्योगिकी रहा है। वह सौर ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता जैसे विषयों पर काम कर चुके हैं।

अब साहिल की मौत के बाद पैदा हुए विवाद ने उनके प्रशासनिक नेतृत्व को सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

जातिगत भेदभाव के आरोपों ने बढ़ाई गंभीरता

साहिल के परिवार का आरोप है कि उसने पहले भी कैंपस में जातिगत भेदभाव का सामना करने की बात बताई थी। परिवार के इन दावों के बाद पुलिस ने शिकायत में संबंधित आरोपों को शामिल किया और जांच शुरू की।

छात्र संगठनों ने भी मामले में पारदर्शी जांच की मांग की है। वहीं IIT बॉम्बे के पूर्व छात्रों के संगठन ने निष्पक्ष और तेज जांच की आवश्यकता बताते हुए जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने से बचने की अपील की है।

इस मामले में अलग-अलग पक्षों के दावे सामने आने के कारण पुलिस जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल

साहिल की मौत ने IIT जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चल रही बहस को फिर तेज किया है। पढ़ाई का दबाव, प्रतिस्पर्धा, व्यक्तिगत समस्याएं और भेदभाव की शिकायतें जैसे कई मुद्दे उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र कल्याण व्यवस्था से जुड़े हैं।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने मांग की है कि कैंपस में काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए। शिकायतों को समय पर सुनने और उनके समाधान के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाने की मांग भी की गई है।

प्रशासन ने छात्रों की कई मांगों पर कदम उठाने की बात कही है। इसके बाद भी मामले में संस्थान की जवाबदेही को लेकर बहस जारी है।

क्राइम ब्रांच की जांच पर नजर

फिलहाल मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही है। जांच में छात्र के परिवार, सहपाठियों, शिक्षकों और अन्य संबंधित लोगों के बयान महत्वपूर्ण होंगे। इसके अलावा उपलब्ध दस्तावेज और घटनाक्रम से जुड़े अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

प्रोफेसर शिरीष केदारे और IIT बॉम्बे प्रशासन को लेकर उठ रहे सवालों का अंतिम उत्तर भी जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से ही सामने आएगा।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि साहिल वाकोडे की मौत ने देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में छात्र सुरक्षा, कथित जातिगत भेदभाव, मानसिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे गंभीर मुद्दों को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। निदेशक केदारे पर प्रोफेसर डूला को बचाने का आरोप इसी विवाद का हिस्सा है और इसकी सत्यता का निर्धारण जांच के आधार पर होना बाकी है।

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