भाजपा में जाने का कर चुके थे ऐलान राहुल गांधी का फोन आते ही पूर्व विधायक ने बदला फैसला
मुंबई: महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में कांग्रेस को लगने वाला एक बड़ा राजनीतिक झटका फिलहाल टल गया है। चिखली विधानसभा क्षेत्र के पूर्व कांग्रेस विधायक राहुल बोंद्रे ने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का अपना फैसला वापस ले लिया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बोंद्रे से फोन पर बातचीत की, जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस में ही बने रहने का फैसला किया। बोंद्रे इससे पहले सार्वजनिक रूप से भाजपा में जाने की घोषणा कर चुके थे।
राहुल बोंद्रे बुलढाणा जिले में कांग्रेस के पुराने नेताओं में गिने जाते हैं। वह चिखली विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं और कांग्रेस के जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। पिछले कुछ समय से उनके भाजपा में शामिल होने की चर्चा चल रही थी। आखिरकार उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर भाजपा में जाने का फैसला सार्वजनिक कर दिया था। उन्होंने कांग्रेस में अपने लंबे राजनीतिक सफर और पार्टी के नेताओं से मिले सहयोग का भी जिक्र किया था।
बोंद्रे के इस ऐलान के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस में हलचल तेज हो गई थी। खासतौर पर बुलढाणा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल का भी यह गृह जिला है। ऐसे में जिले के एक पूर्व विधायक और पुराने कांग्रेस नेता का भाजपा में जाना पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा था।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक बोंद्रे का भाजपा में प्रवेश 22 सितंबर को होने की संभावना थी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में उनके भाजपा में शामिल होने की चर्चा थी। चिखली की भाजपा विधायक श्वेता महाले ने भी उनके संभावित पार्टी प्रवेश की पुष्टि की थी। लेकिन औपचारिक रूप से भाजपा का दामन थामने से पहले ही घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया।
बताया जा रहा है कि बोंद्रे के भाजपा में जाने की जानकारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व तक पहुंचने के बाद उन्हें रोकने के प्रयास शुरू हुए। इसी क्रम में राहुल गांधी ने उनसे सीधे फोन पर बात की। रिपोर्टों के अनुसार बातचीत में राहुल गांधी ने बोंद्रे के पार्टी के लिए किए गए काम का जिक्र किया और उनसे अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा।
इस बातचीत के बाद राहुल बोंद्रे ने भाजपा में शामिल होने का फैसला वापस ले लिया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक बोंद्रे ने राहुल गांधी से कहा कि उनके सीधे फोन करने और उनकी बात सुनने के बाद वह कांग्रेस में ही बने रहेंगे। उन्होंने पार्टी के लिए काम जारी रखने की बात भी कही। इस तरह कुछ घंटे पहले तक भाजपा में जाने की तैयारी कर रहे बोंद्रे ने अपना राजनीतिक फैसला बदल दिया।
राहुल गांधी और बोंद्रे के बीच कथित बातचीत का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है। कुछ मीडिया संस्थानों ने इस वीडियो के आधार पर बातचीत की जानकारी दी है। हालांकि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है। एनडीटीवी मराठी ने भी सूत्रों के हवाले से राहुल गांधी के फोन और इसके बाद बोंद्रे के कांग्रेस नहीं छोड़ने के फैसले की जानकारी दी है।
पूरे घटनाक्रम ने बुलढाणा और विशेष रूप से चिखली की स्थानीय राजनीति को चर्चा में ला दिया है। बोंद्रे के भाजपा में शामिल होने की घोषणा के बाद स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की चर्चा शुरू हो गई थी। कांग्रेस के लिए चुनौती यह थी कि उसके प्रदेश अध्यक्ष के गृह जिले में ही एक पूर्व विधायक पार्टी छोड़ने जा रहा था। अब उनके फैसले में बदलाव से फिलहाल यह स्थिति टल गई है।
राहुल बोंद्रे ने भाजपा में जाने की घोषणा करते समय कांग्रेस में अपने पुराने साथियों और नेताओं का भी उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस ने उन्हें राजनीतिक जीवन में कई अवसर दिए। उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक और प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल से मिले सहयोग का जिक्र भी किया था। इसके बावजूद उन्होंने अलग राजनीतिक रास्ता चुनने की घोषणा की थी।
लेकिन राहुल गांधी से बातचीत के बाद उनका फैसला बदलना महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। चिखली और बुलढाणा में कांग्रेस तथा भाजपा दोनों की स्थानीय इकाइयों की नजर अब बोंद्रे की आगे की राजनीतिक गतिविधियों पर रहेगी। भाजपा में शामिल होने की सार्वजनिक घोषणा करने और फिर कुछ ही समय में उसे वापस लेने के कारण यह मामला राज्य की राजनीति में सुर्खियों में आ गया है।
फिलहाल उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों से इतना स्पष्ट है कि राहुल बोंद्रे ने भाजपा में शामिल होने का फैसला घोषित किया था और बाद में राहुल गांधी से बातचीत के बाद कांग्रेस में बने रहने का निर्णय लिया। राहुल गांधी और बोंद्रे के बीच बातचीत को लेकर सामने आए वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अलग विषय है, इसलिए उसमें दिखाई या सुनाई देने वाली हर बात को सत्यापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
बुलढाणा में हुए इस घटनाक्रम ने यह भी दिखाया है कि महाराष्ट्र में स्थानीय नेताओं की राजनीतिक आवाजाही पर दोनों प्रमुख दलों की नजर बनी हुई है। बोंद्रे के फैसले में आए बदलाव के बाद अब कांग्रेस में उनकी आगे की भूमिका और चिखली क्षेत्र में राजनीतिक समीकरण किस तरह बदलते हैं, इस पर स्थानीय राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।