पालघर में तेंदुए का खूनी हमला, महिला की मौत, ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
मुंबई/पालघर। महाराष्ट्र के पालघर जिले में तेंदुए के हमले से एक 65 वर्षीय महिला की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। खेतों में काम करने वाले मजदूरों और स्थानीय ग्रामीणों में जंगली जानवर के हमले का डर बढ़ गया है। गुस्साए ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द तेंदुए को पकड़ने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो वे जिला कलेक्ट्रेट तक विरोध मार्च निकालेंगे। मृतक महिला की पहचान विक्रमगढ़ तालुका के सारशी गांव निवासी तुलसी रामा सावर के रूप में हुई है। वह कृषि मजदूर थीं और दहानू क्षेत्र में खेतों में काम करती थीं।
खेत से लौटते समय तेंदुए ने किया हमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना रविवार शाम करीब 7 बजे दहानू वन मंडल के अंतर्गत आने वाले मातेगांव क्षेत्र में हुई। तुलसी रामा सावर स्थानीय किसान बलवंत ठाकाजी राउत के खेत में मजदूरी करती थीं। रविवार शाम काम खत्म करने के बाद वह घर लौट रही थीं। इसी दौरान रास्ते के पास अचानक एक तेंदुआ दिखाई दिया और उसने महिला पर झपट्टा मार दिया।
हमला इतना अचानक हुआ कि महिला को संभलने या बचाव करने का मौका नहीं मिला। तेंदुए ने उनकी गर्दन को अपने जबड़े में जकड़ लिया। इससे महिला की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के समय आसपास मौजूद लोगों ने महिला की चीखें सुनीं तो वे तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े।
ग्रामीणों के पहुंचने से पहले जंगल में भागा तेंदुआ
महिला की चीख-पुकार सुनकर स्थानीय ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचे, लेकिन तब तक तेंदुआ मौके से भाग चुका था। अंधेरा होने के कारण ग्रामीण उसे देख नहीं सके। महिला को मृत देखकर लोगों में आक्रोश और भय का माहौल बन गया।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी गई। वाणगांव के सहायक पुलिस निरीक्षक तुषार पचपुते के अनुसार, तेंदुए ने महिला की गर्दन पर हमला किया था, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेजा गया है। पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज किया है।
तेंदुए को पकड़ने के लिए ग्रामीणों का अल्टीमेटम
घटना के बाद मातेगांव और आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों ने वन विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई है। ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि क्षेत्र में तेंदुए की गतिविधियां लगातार सामने आ रही हैं। इसके बावजूद लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रभावित क्षेत्र में तत्काल कैमरा ट्रैप लगाए जाएं और तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरे स्थापित किए जाएं। उनका कहना है कि जब तक तेंदुए को पकड़ने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तब तक खेतों में काम करने वाले मजदूरों और स्थानीय निवासियों की जान को खतरा बना रहेगा।
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि वन विभाग ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो वे जिला कलेक्ट्रेट तक मार्च निकालेंगे और विरोध प्रदर्शन करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में काम करने वाले मजदूरों को अब अकेले आने-जाने में डर लग रहा है।
एक महीने के भीतर दूसरी महिला की मौत
पालघर जिले में तेंदुए के हमले से महिला की मौत का यह मामला पिछले एक महीने में सामने आई दूसरी बड़ी घटना बताई जा रही है। इससे पहले 9 अक्टूबर को पालघर नगरपालिका क्षेत्र के बाहरी हिस्से में स्थित भोगले पाड़ा (नवली) में 52 वर्षीय महिला की तेंदुए के हमले में मौत हुई थी।
उस घटना के बाद भी इलाके में वन्यजीवों की गतिविधियों को लेकर चिंता जताई गई थी। अब मातेगांव में 65 वर्षीय महिला की मौत से लोगों की चिंता और बढ़ गई है। हालांकि, दोनों घटनाओं में हमला करने वाला तेंदुआ एक ही है या अलग-अलग जानवर हैं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
खेती-किसानी पर भी पड़ सकता है असर
पालघर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग खेती और मजदूरी से अपनी आजीविका चलाते हैं। खेतों में काम करने के लिए कई बार सुबह जल्दी और शाम के समय भी बाहर निकलना पड़ता है। ऐसे में तेंदुए की मौजूदगी से कृषि मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है।
कृषि प्रशिक्षण केंद्र से जुड़े मिलिंद पाटिल ने भी क्षेत्र में तेंदुए की लगातार मौजूदगी पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि खेतों में काम करने वाले मजदूरों में डर बना रहा तो कृषि गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने वन विभाग से जल्द उचित कदम उठाने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि खेतों में काम करने वाले लोग डर के कारण बाहर निकलने से बचेंगे तो किसानों के सामने भी मजदूरों की उपलब्धता की समस्या पैदा हो सकती है। इसका असर फसलों की देखभाल और कृषि कार्यों पर पड़ सकता है।
वन विभाग के सामने तेंदुए को पकड़ने की चुनौती
घटना के बाद वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती तेंदुए की पहचान और उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ने की है। इसके लिए प्रभावित इलाके में कैमरा ट्रैप लगाने, तेंदुए की गतिविधियों की निगरानी करने और आवश्यक स्थानों पर पिंजरे लगाने की मांग उठाई जा रही है।
तेंदुए की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में ग्रामीणों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। विशेषकर सुबह और शाम के समय अकेले खेतों में जाने से बचना चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों को जंगल या झाड़ियों के आसपास अकेले नहीं जाने देना चाहिए।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, तेंदुए सामान्यतः इंसानों से दूरी बनाए रखते हैं, लेकिन जंगल और आबादी के बीच संपर्क बढ़ने पर मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सामने आ सकती हैं। ऐसे मामलों में वन विभाग की निगरानी और स्थानीय लोगों के बीच जागरूकता बेहद जरूरी है।
प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग
तुलसी रामा सावर की मौत के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों में गश्त बढ़ाई जाए और लोगों को तेंदुए की गतिविधियों के बारे में समय-समय पर जानकारी दी जाए। साथ ही कैमरा ट्रैप और पिंजरों की व्यवस्था जल्द की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
फिलहाल 65 वर्षीय महिला की मौत के बाद मातेगांव और आसपास के क्षेत्रों में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि यदि जल्द तेंदुए को पकड़ने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे जिला कलेक्ट्रेट तक मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। अब सभी की नजर वन विभाग की कार्रवाई पर टिकी है।