Beed में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर सख्ती, पंकजा मुंडे ने शुरू किया 30 दिन का विशेष अभियान
बीड : महाराष्ट्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए बीड जिले में सिंगल-यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। राज्य की पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और पशुपालन मंत्री पंकजा मुंडे ने गुरुवार को जिले की सभी नगर परिषदों और नगर पंचायतों में 30 दिन तक चलने वाले इस अभियान की शुरुआत की।
अभियान का उद्देश्य बढ़ते प्लास्टिक कचरे को नियंत्रित करना और लोगों को सिंगल-यूज प्लास्टिक के नुकसान के प्रति जागरूक करना है। अधिकारियों के अनुसार, तेजी से बढ़ती आबादी, शहरी बाजारों के विस्तार और रोजमर्रा की जरूरतों में प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग के कारण कचरा प्रबंधन बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
इस विशेष अभियान की शुरुआत बीड जिला कलेक्टर कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की गई। कार्यक्रम की निगरानी जिला कलेक्टर विवेक जॉनसन ने की। इस अवसर पर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिथिन रहमान, रेजिडेंट डिप्टी कलेक्टर सतीश स्वामी समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
अभियान के तहत जिले के सभी शहरी निकाय क्षेत्रों में सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग को रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। इसमें लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ बाजारों, दुकानों और सार्वजनिक स्थानों पर प्लास्टिक के इस्तेमाल की निगरानी भी की जाएगी।
प्रशासन का मानना है कि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसके लिए आम लोगों की भागीदारी जरूरी है। इसी उद्देश्य से अभियान के दौरान नागरिकों, व्यापारियों और दुकानदारों को पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, प्लास्टिक कचरा पर्यावरण के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य और पशुओं के लिए भी गंभीर खतरा बन रहा है। खासकर सड़कों और खुले स्थानों पर फेंका गया प्लास्टिक आवारा पशुओं के लिए नुकसानदायक साबित होता है। इसे देखते हुए पशुपालन विभाग को भी अभियान से जोड़ा गया है।
नगर परिषदों और नगर पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अभियान को प्रभावी तरीके से लागू करें। इसके लिए स्थानीय स्तर पर टीमों का गठन किया जा सकता है, जो बाजार क्षेत्रों और सार्वजनिक स्थानों पर निरीक्षण करेंगी।
सिंगल-यूज प्लास्टिक में ऐसे प्लास्टिक उत्पाद शामिल होते हैं जिनका इस्तेमाल केवल एक बार किया जाता है और फिर उन्हें फेंक दिया जाता है। इनमें प्लास्टिक बैग, डिस्पोजेबल कप, प्लेट, स्ट्रॉ और अन्य कई वस्तुएं शामिल हैं। इन उत्पादों के कारण बड़ी मात्रा में कचरा पैदा होता है और इनके नष्ट होने में लंबा समय लगता है।
मंत्री पंकजा मुंडे ने अभियान के दौरान पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए प्रशासन के साथ-साथ नागरिकों और व्यापारिक समुदाय को भी जिम्मेदारी निभानी होगी।
जिला प्रशासन ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने की योजना बनाई है। नगर निकायों के अधिकारियों को अभियान की नियमित समीक्षा करने और इसकी प्रगति रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
बीड जिले में शुरू किया गया यह अभियान राज्य सरकार की पर्यावरण संरक्षण नीति का हिस्सा माना जा रहा है। प्रशासन को उम्मीद है कि 30 दिनों के इस विशेष अभियान के माध्यम से लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग में कमी आएगी।
स्थानीय प्रशासन का लक्ष्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि लोगों की आदतों में बदलाव लाना है। इसके लिए स्कूलों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय संस्थाओं की मदद भी ली जा सकती है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए लगातार प्रयास और जनभागीदारी जरूरी है। यदि लोग प्लास्टिक के स्थान पर कपड़े या अन्य पर्यावरण अनुकूल विकल्पों का इस्तेमाल शुरू करते हैं, तो कचरे की मात्रा को काफी कम किया जा सकता है।
बीड में शुरू हुआ यह 30 दिवसीय अभियान आने वाले समय में जिले के शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। प्रशासन अब इस अभियान के जरिए सिंगल-यूज प्लास्टिक प्रतिबंध को जमीन पर प्रभावी रूप से लागू करने की तैयारी में है।