मुंबई। IIT बॉम्बे के छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे की मौत के मामले में जारी विवाद के बीच संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के पूर्व चेयरमैन शरद कुमार सराफ और पूर्व छात्र दीपक बिरेवार प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के समर्थन में सामने आए हैं। प्रोफेसर डूला की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग के बीच दोनों ने निष्पक्ष जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचने पर सवाल उठाए हैं। इस बीच IIT बॉम्बे ने डूला को डीन ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स के पद से हटा दिया है और उन्हें छुट्टी पर भेजा गया है। मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही है।ANI से बातचीत में शरद कुमार सराफ ने आरोप लगाया कि साहिल के माता-पिता की ओर से पेश होने वाले वकील के राजनीतिक संबंध हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटनाक्रम में वकील की भूमिका केवल कानूनी प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है। सराफ ने कहा कि किसी वकील का किसी राजनीतिक दल या विचारधारा से जुड़ा होना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन उन्होंने इस मामले में राजनीतिक उद्देश्य होने का दावा किया।सराफ ने यहां तक कहा कि उन्हें ऐसा लगता है कि इसके पीछे कोई ‘डीप स्टेट’ या छिपी हुई ताकत काम कर रही है। हालांकि इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक रूप से सत्यापित सबूत पेश नहीं किया। इसलिए इसे सराफ के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि जांच में स्थापित तथ्य के रूप में।उन्होंने आशंका जताई कि IIT बॉम्बे को लेकर लगातार पैदा हो रहे विवाद का असर संस्थान की प्रतिष्ठा, शिक्षा की गुणवत्ता और यहां से पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों के करियर पर पड़ सकता है। उनके मुताबिक नए पूर्व छात्रों के रोजगार के अवसर और पुराने पूर्व छात्रों की पेशेवर प्रतिष्ठा भी संस्थान की छवि से जुड़ी होती है।
प्रोफेसर डूला के खिलाफ दर्ज है मामला
साहिल वाकोडे की मौत के बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और जातिगत भेदभाव से जुड़े आरोपों में मामला दर्ज किया गया है। साहिल के परिवार ने आरोप लगाया है कि उसे जाति के आधार पर परेशान और अपमानित किया गया था। परिवार ने प्रोफेसर डूला सहित संबंधित लोगों की गिरफ्तारी की मांग की है। ये आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और अदालत में साबित नहीं हुए हैं।साहिल सेकंड ईयर बीटेक का छात्र था और IIT बॉम्बे के डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग में पढ़ाई कर रहा था। 18 सितंबर को वह अपने हॉस्टल के कमरे में मृत मिला था। उसकी मौत से कुछ घंटे पहले परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के कथित इस्तेमाल से जुड़ा घटनाक्रम हुआ था।IIT बॉम्बे ने बाद में अपनी शुरुआती सार्वजनिक टिप्पणी पर खेद जताया और कहा कि जांच पूरी होने से पहले साहिल की मौत से पहले की परिस्थितियों को किसी निश्चित तरीके से पेश करना उचित नहीं था। संस्थान ने स्पष्ट किया कि मामले की परिस्थितियां जांच के अधीन हैं।
डीन पद से हटाए गए डूला
विद्यार्थियों के विरोध और मामले में जांच शुरू होने के बाद प्रोफेसर डूला को डीन ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स की जिम्मेदारी से हटा दिया गया। इसके बाद उन्हें छुट्टी पर भी भेजा गया, ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ सके। हालांकि वे संस्थान के फैकल्टी सदस्य बने हुए हैं।IIT बॉम्बे ने मामले की परिस्थितियों की जांच के लिए एक 10 सदस्यीय समिति भी गठित की है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक समिति की अध्यक्षता IIT पलक्कड़ के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन प्रोफेसर रमेश वेंकटेश्वरन कर रहे हैं और इसे एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है।दूसरी तरफ मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच भी जारी है। जांच अधिकारी परीक्षा कक्ष और परिसर के CCTV फुटेज तथा संबंधित लोगों के बयानों समेत अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल कर रहे हैं।
परिवार ने लगाए गंभीर आरोप
साहिल के माता-पिता का आरोप है कि उनके बेटे को संस्थान में जातिगत टिप्पणियों और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा था। परिवार ने परीक्षा के दौरान कथित नकल से संबंधित शुरुआती दावों पर भी सवाल उठाते हुए उसके सबूत सामने रखने की मांग की है।यही कारण है कि परिवार प्रोफेसर डूला के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहा है। हालांकि डूला के समर्थन में सामने आए शिक्षकों और पूर्व छात्रों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले उन्हें दोषी मानना उचित नहीं होगा।IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम भी प्रोफेसर डूला के समर्थन में सामने आया है। फोरम से जुड़े प्रोफेसरों का कहना है कि अभी ऐसा कोई पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे जातिगत टिप्पणी के आरोप को स्थापित माना जा सके और जांच पूरी होने तक निष्कर्ष निकालने से बचना चाहिए।
छात्रों की 18 मांगें
साहिल की मौत के बाद IIT बॉम्बे के विद्यार्थियों ने संस्थान के सामने 18 मांगों का चार्टर रखा है। इनमें स्वतंत्र जांच, छात्र कल्याण और शिकायत निवारण प्रणाली में बदलाव, स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने और कैंपस में चौबीसों घंटे मनोचिकित्सक उपलब्ध कराने जैसी मांगें शामिल हैं।छात्रों की ओर से प्रोफेसर डूला के खिलाफ और कार्रवाई की मांग भी उठी है। संस्थान की ओर से उन्हें प्रशासनिक पद से हटाने के बावजूद कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों ने इसे पर्याप्त नहीं माना है।इस बीच IIT बॉम्बे के पूर्व छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता सुधींद्र कुलकर्णी भी प्रोफेसर डूला के पक्ष में निष्पक्ष जांच की मांग कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
जांच के नतीजों पर टिकी नजर
मामले में अब एक तरफ साहिल का परिवार है, जिसने जातिगत उत्पीड़न और मानसिक दबाव के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि दूसरी तरफ प्रोफेसर डूला के समर्थन में IIT बॉम्बे के कई शिक्षक, पूर्व छात्र और पूर्व पदाधिकारी सामने आए हैं। दोनों पक्षों के दावों के बीच मुंबई क्राइम ब्रांच और संस्थान की आंतरिक समिति की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।शरद कुमार सराफ का ‘डीप स्टेट’ संबंधी बयान भी फिलहाल उनका आरोप है और इसके समर्थन में कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य सामने नहीं आया है। इसी तरह साहिल के परिवार की ओर से लगाए गए आरोप भी जांच के अधीन हैं। ऐसे में मामले में जिम्मेदारी तय करने का आधार जांच में सामने आने वाले साक्ष्य और आगे की कानूनी प्रक्रिया होगी।
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