KDMC रिकॉर्ड में बड़ी गड़बड़ी का मामला, 50 साल पुराना घर डेटाबेस से गायब

Update: 2026-06-20 04:43 GMT

Maharashtra महाराष्ट्र: कल्याण-डोंबिवली क्षेत्र में नागरिक रिकॉर्ड से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और संपत्ति रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) ने कथित तौर पर लगभग 50 साल पुरानी एक रिहायशी संपत्ति को अपने आधिकारिक डेटाबेस से हटा दिया है, जबकि वह घर आज भी उसी स्थान पर मौजूद है और उसमें परिवार रह रहा है।

इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब नगर निगम ने संबंधित संपत्ति पर प्रॉपर्टी टैक्स लेने से इनकार कर दिया। निगम का दावा है कि यह घर वर्षों पहले सड़क चौड़ीकरण के दौरान गिरा दिया गया था। हालांकि, संबंधित परिवार ने इस दावे को पूरी तरह से गलत बताते हुए इसका पुरजोर खंडन किया है।

गोविंदवाड़ी इलाके में गुजराती मंदिर के पास स्थित यह संपत्ति शेख परिवार की है, जो पिछले लगभग पांच दशकों से यहां रह रहा है। परिवार के अनुसार, यह घर मूल रूप से उनके पिता के नाम पर रजिस्टर्ड था और वे लगातार इस संपत्ति पर हाउस टैक्स और बिजली बिल का भुगतान करते आ रहे हैं।

Kalyan-Dombivli Municipal Corporation के रिकॉर्ड से संपत्ति के अचानक गायब होने के बाद स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक पारदर्शिता और रिकॉर्ड प्रबंधन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मामला सामने आने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि कैसे एक वास्तविक रूप से मौजूद संपत्ति सरकारी रिकॉर्ड से हटाई जा सकती है और इसके पीछे किस स्तर पर चूक हुई है।

परिवार का कहना है कि उन्होंने कभी भी अपनी संपत्ति को लेकर कोई विवाद नहीं देखा और वर्षों से सभी आवश्यक कर और बिल समय पर जमा करते रहे हैं। ऐसे में निगम द्वारा संपत्ति को गैर-मौजूद बताना और टैक्स लेने से इनकार करना उनके लिए हैरानी और परेशानी का कारण बन गया है।

इस घटना ने नगर निगम की कार्यप्रणाली, रिकॉर्ड अपडेट प्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की गलतियां न केवल नागरिकों के अधिकारों को प्रभावित करती हैं, बल्कि कानूनी विवादों को भी जन्म दे सकती हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों की सही तरीके से जांच नहीं की गई, तो भविष्य में संपत्ति विवाद और बढ़ सकते हैं। उन्होंने प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और रिकॉर्ड सुधार की मांग की है।

फिलहाल, यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग उम्मीद कर रहे हैं कि नगर निगम जल्द ही इस विसंगति को स्पष्ट करेगा और वास्तविक स्थिति सामने लाएगा।

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