पुणे में तीसरे वर्ष आयोजित पुस्तक मेला: केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा

Update: 2025-12-13 16:45 GMT
Pune पुणे: तीसरे साल लगातार आयोजित पुस्तक मेला (बुक फेस्टिवल) का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम न केवल पुणे के साहित्यिक और सांस्कृतिक माहौल को समृद्ध करता है, बल्कि लोगों के ज्ञान और रचनात्मकता को भी बढ़ावा देता है।
केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल ने बताया कि पुस्तक मेला युवाओं, छात्रों और सभी आयु वर्ग के पाठकों के लिए एक बड़ा अवसर है। यहां विभिन्न प्रकाशकों और लेखक-लेखिकाओं की किताबों की विस्तृत रेंज उपलब्ध है, जिससे पाठकों को सीधे लेखकों और विशेषज्ञों से संवाद करने का मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी साहित्यिक चेतना और ज्ञान का प्रसार होता है।
मुरलीधर मोहोल ने पुस्तक मेले में शामिल होने वाले लोगों से अपील की कि वे इस मौके का अधिकतम लाभ उठाएं और पुस्तकों के माध्यम से ज्ञानार्जन करें। उन्होंने कहा कि पुस्तक मेला स्थानीय साहित्यिक परंपरा और संस्कृति के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा, मेले में विभिन्न वर्कशॉप, पैनल डिस्कशन और सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं, जिसमें लेखक, विचारक और शिक्षक हिस्सा ले रहे हैं।
पुस्तक मेला तीसरे वर्ष लगातार आयोजित किया जा रहा है और इसमें देशभर के प्रमुख लेखक, प्रकाशक और शैक्षिक संस्थान हिस्सा ले रहे हैं। इस वर्ष मेला अधिक आकर्षक और विविध विषयों के साथ आयोजित किया गया है। बच्चों, युवाओं और वयस्क पाठकों के लिए अलग-अलग सेक्शन बनाए गए हैं, जिससे हर आयु वर्ग के पाठक अपनी रुचि के अनुसार किताबें देख और खरीद सकते हैं।
इस अवसर पर आयोजकों ने बताया कि पुस्तक मेला ज्ञान, रचनात्मकता और संस्कृति के उत्सव के रूप में उभरा है। मेला स्थानीय स्तर पर छात्रों और युवाओं को पढ़ाई और शिक्षा के प्रति प्रेरित करता है, जबकि साहित्य और किताबों के प्रति रुचि को भी बढ़ाता है। केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी पुणे में इस प्रकार के आयोजन निरंतर होते रहेंगे और लोगों को सीखने और संवाद करने के अवसर मिलते रहेंगे।
पुस्तक मेले में न केवल किताबें उपलब्ध हैं, बल्कि साहित्यिक सत्रों, लेखकों से बातचीत, वर्कशॉप और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से पाठकों और लेखकों के बीच एक सेतु स्थापित किया जा रहा है। यह आयोजन पुणे के सांस्कृतिक और शैक्षिक वातावरण को समृद्ध करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
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