मराठा आरक्षण पर बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्ती, आंदोलन आजाद मैदान तक सीमित करने के निर्देश

Update: 2025-09-01 14:25 GMT
MUMBAI मुंबई : मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान वकील गुणरत्न सदावर्ते ने आरोप लगाया कि आंदोलन में राजनीतिक हस्तक्षेप साफ नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि शिवसेना (उद्धव गुट) और एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेता प्रदर्शनकारियों को ट्रक के जरिए खाना-पानी पहुंचा रहे हैं। सदावर्ते ने यह भी बताया कि हाल ही में सुप्रिया सुले पर पानी की बोतल फेंकी गई और महिला पत्रकारों के साथ भी दुर्व्यवहार हुआ। सदावर्ते ने कहा कि कई विधायक और सांसद यह मांग कर रहे हैं कि मराठा समुदाय को ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण मिले। इस पर मराठा समुदाय की ओर से पेश हुए वकील आनंद काठे ने कड़ी आपत्ति जताई। कोर्ट ने काठे को बीच में बोलने से रोका और कहा कि 2024 के सरकारी नियम के अनुसार मराठा समाज को आरक्षण दिया गया है, अब सवाल यह है कि उन्हें यही आरक्षण चाहिए या अलग व्यवस्था।
हाईकोर्ट ने माना कि आंदोलन शांतिपूर्ण है, लेकिन इससे मुंबई के आम लोगों को परेशानी हो रही है। कोर्ट ने साफ कहा कि 5,000 से अधिक लोगों की भीड़ की अनुमति नहीं है और पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए। अदालत ने सरकार से पूछा कि क्या मुंबई की यह स्थिति आंदोलन की मांगें पूरी होने तक जारी रहेगी। सुनवाई के दौरान सदावर्ते ने यह भी कहा कि आंदोलन मुख्यमंत्री के मराठा न होने से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने बीड हिंसा और आजाद मैदान में दर्ज न हुए पुलिस मामलों पर सवाल खड़े किए। कोर्ट ने पूछा कि क्या आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है, जिस पर मराठा पक्ष के वकीलों ने स्वीकार किया कि कुछ अन्य लोग भी इसमें शामिल हो रहे हैं और उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। अदालत ने अनशन पर बैठे लोगों की सेहत को लेकर भी चिंता जताई और उचित मेडिकल सुविधा देने का निर्देश दिया।
‘एएमवाई’ फाउंडेशन की याचिका पर चल रही सुनवाई में अदालत ने कहा कि आंदोलन का अधिकार सभी को है, लेकिन शहर का माहौल बिगड़ना नहीं चाहिए। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने आंदोलन को केवल आजाद मैदान तक सीमित किया था, लेकिन चार दिन बाद भी आंदोलन जारी है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से ‘स्पेशल हॉलीडे कोर्ट’ बुलाने की मांग की, जिस पर जस्टिस गौतम अंखाड और रवींद्र घूगे की बेंच ने सुनवाई शुरू की। सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल बीरेंद्र शराफ ने अदालत को बताया कि शनिवार और रविवार को आंदोलन की अनुमति नहीं थी, फिर भी लोग सड़कों पर उतरे। अदालत ने कहा कि 26 अगस्त के आदेश का उल्लंघन हुआ है और गणपति उत्सव के समय शांति व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आजाद मैदान को छोड़कर बाकी जगहों से प्रदर्शनकारी शाम 4 बजे तक हटें और नए प्रदर्शनकारियों को शहर में प्रवेश न दिया जाए।
मराठा समुदाय के वकीलों से अदालत ने कहा कि वे स्वीकार करें कि आंदोलन पूरी तरह उनके नियंत्रण में नहीं है। सरकार को स्थिति सामान्य करने के लिए दो दिन का समय दिया गया है। वहीं, आंदोलन स्थल पर फूड ट्रक की अनुमति देने की अपील की गई, जिस पर अदालत ने कहा कि प्रदर्शनकारी आजाद मैदान से बाहर न जाएं। आजाद मैदान पहुंचे एक आंदोलनकारी ने आईएएनएस से कहा, “हम लोग आरक्षण लेने के लिए आए हैं। जब तक आरक्षण नहीं मिलेगा, तब तक यहां से नहीं जाएंगे।” वहीं, एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि “जरांगे का समर्थन करने और उनका मनोबल बढ़ाने के लिए मराठा समाज एकजुट हुआ है। वे आरक्षण लेकर ही मुंबई छोड़ेंगे।”
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