मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (UBT) के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद दुबे ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया है। शुक्रवार, 16 अक्टूबर को शिंदे की मौजूदगी में पार्टी में शामिल होने के बाद शनिवार को आनंद दुबे ने अपने फैसले को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वह अपने मूल घर लौट आए हैं और पिछले काफी समय से राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर असहज महसूस कर रहे थे। दुबे ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से प्रेरित होकर शिवसेना से की थी।
अपने मूल घर लौटकर खुश हूं- आनंद दुबे
समाचार एजेंसी ANI से बातचीत करते हुए आनंद दुबे ने कहा कि शिवसेना में लौटकर उन्हें खुशी हो रही है। उन्होंने बताया कि बालासाहेब ठाकरे के विचारों ने उन्हें राजनीति में आने की प्रेरणा दी थी।दुबे ने कहा, "मुझे बहुत खुशी हो रही है। मैं अपने घर लौट आया हूं। मैं मूल रूप से शिवसेना के साथ था। मैंने वहीं से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी, जो हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से प्रेरित था।"उन्होंने कहा कि बाद में राजनीतिक परिस्थितियां बदल गईं और उन्हें कुछ समय के लिए उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट में रहना पड़ा।
UBT गुट में बेचैनी महसूस कर रहे थे आनंद दुबे
आनंद दुबे ने कहा कि शिवसेना (UBT) में रहते हुए उन्होंने पार्टी के लिए पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ काम किया।उन्होंने पार्टी के विभिन्न मुद्दों पर मीडिया में पक्ष रखा और संगठन की नीतियों का समर्थन किया। हालांकि, समय के साथ कुछ परिस्थितियां ऐसी बनीं, जिनसे वह सहमत नहीं थे।दुबे ने कहा कि पिछले कई महीनों से वह असहज महसूस कर रहे थे। इसी वजह से उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर फैसला लिया और उद्धव ठाकरे गुट से अलग होने का निर्णय किया।उन्होंने अपने इस कदम को राजनीतिक विचारधारा और व्यक्तिगत प्रतिबद्धता से जुड़ा फैसला बताया।
चुनाव आयोग और SIR पर पार्टी के रुख से थे नाराज
आनंद दुबे ने शिवसेना (UBT) छोड़ने के पीछे पार्टी के कुछ राजनीतिक फैसलों को भी प्रमुख कारण बताया।उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर पार्टी ने जो रुख अपनाया था, उससे वह सहमत नहीं थे।दुबे ने कुछ राजनीतिक संगठनों और व्यक्तियों के प्रति पार्टी की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे।उनका कहना था कि वह ऐसे राजनीतिक विचारों का समर्थन नहीं कर सकते, जो उनके व्यक्तिगत आदर्शों और सिद्धांतों से मेल नहीं खाते।इन्हीं मतभेदों के चलते उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया था।
एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में शिवसेना में प्रवेश
शुक्रवार को ठाणे में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आनंद दुबे ने आधिकारिक रूप से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की सदस्यता ग्रहण कीइस अवसर पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, युवा सेना के महासचिव राहुल कनाल और पार्टी के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।शिंदे ने आनंद दुबे का पार्टी में स्वागत करते हुए उनके संगठनात्मक अनुभव की सराहना की।पार्टी में शामिल होने के बाद दुबे ने कहा कि वह एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में संगठन के लिए काम करना चाहते हैं।
बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा पर दिया जोर
आनंद दुबे ने कहा कि उनकी राजनीतिक सोच हमेशा बालासाहेब ठाकरे के विचारों से प्रभावित रही है।उन्होंने बताया कि वह राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने की विचारधारा के साथ अपना राजनीतिक सफर आगे बढ़ाना चाहते हैं।दुबे ने एकनाथ शिंदे और सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के नेतृत्व में संगठन के विस्तार के लिए काम करने की बात कही।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में चल रही नीतियों का समर्थन करने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।
महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल
आनंद दुबे का शिवसेना (UBT) छोड़ना महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा हैवह उद्धव ठाकरे गुट के प्रमुख हिंदी भाषी प्रवक्ताओं में शामिल थे और लंबे समय से राष्ट्रीय मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखते रहे थे।उनके शिंदे गुट में शामिल होने से दोनों शिवसेना गुटों के बीच राजनीतिक मतभेद एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।हालांकि, आनंद दुबे ने अपने फैसले को व्यक्तिगत विचारधारा और संगठनात्मक परिस्थितियों से जोड़कर देखा है।
शिंदे गुट में नई जिम्मेदारी निभाएंगे आनंद दुबे
एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने आनंद दुबे को संगठन के विस्तार से जुड़ी जिम्मेदारियां देने की बात कही हैविशेष रूप से उत्तर प्रदेश में पार्टी की गतिविधियों को बढ़ाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती हैदुबे ने कहा कि वह किसी पद की अपेक्षा किए बिना संगठन के कार्यकर्ता के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाना चाहते हैं।फिलहाल उनके इस राजनीतिक फैसले के बाद महाराष्ट्र में शिवसेना के दोनों गुटों के बीच चर्चा तेज हो गई है।