जालना। महाराष्ट्र के जालना जिले में पुलिस ने खुद को पत्रकार बताने वाले और कथित तौर पर सोशल मीडिया पर न्यूज चैनल चलाने वाले दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों पर एक निजी अस्पताल को बदनाम करने की धमकी देकर कथित तौर पर 10 हजार रुपये वसूलने का आरोप है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जालना निवासी निकिता काले और सचिन सर्वे के रूप में हुई है।

मामला अंबाड-मंथा बाईपास रोड स्थित संजीवनी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल से जुड़ा है। अस्पताल के डॉक्टर बलिराम बागल की शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दोनों आरोपियों ने अस्पताल और उसके संचालन से जुड़ी जानकारी को लेकर दबाव बनाया और कथित तौर पर बदनाम करने की धमकी दी। इसके बाद 10 हजार रुपये की रकम लेने का आरोप भी लगाया गया है।

पुलिस के अनुसार, घटना की शुरुआत एक मरीज के अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती होने के बाद हुई। शिकायत में बताया गया है कि संबंधित मरीज को इलाज के लिए 11 अगस्त से 15 अगस्त तक संजीवनी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। मरीज के अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान इलाज और अस्पताल से जुड़े घटनाक्रम को लेकर बाद में विवाद की स्थिति बनी।

अस्पताल को बदनाम करने की धमकी का आरोप

डॉ. बलिराम बागल की शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने खुद को पत्रकार बताया और सोशल मीडिया पर न्यूज चैनल चलाने की बात कही। शिकायत में आरोप है कि दोनों ने अस्पताल से जुड़ी खबर प्रसारित कर उसे कथित तौर पर बदनाम करने की धमकी दी।

बताया गया है कि आरोपियों ने अस्पताल के खिलाफ सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने की बात कहकर दबाव बनाया। इसी दौरान कथित तौर पर 10 हजार रुपये की मांग की गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अस्पताल को बदनाम करने की धमकी के बीच यह रकम ली गई।

मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंचने के बाद अधिकारियों ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू की। पुलिस ने आरोपों की जांच के दौरान संबंधित लोगों से पूछताछ की और उपलब्ध जानकारी के आधार पर निकिता काले और सचिन सर्वे को गिरफ्तार कर लिया।

मरीज के भर्ती होने के बाद शुरू हुआ विवाद

शिकायत में जिस घटनाक्रम का उल्लेख किया गया है, उसकी शुरुआत उस मरीज के अस्पताल में भर्ती होने से जुड़ी बताई जा रही है, जिसे 11 से 15 अगस्त के बीच संजीवनी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज मिला था। मरीज के इलाज से जुड़े मामले को लेकर आरोपियों और अस्पताल प्रबंधन के बीच बातचीत हुई।

इसके बाद मामला कथित तौर पर अस्पताल को बदनाम करने की धमकी और पैसों की मांग तक पहुंच गया। अस्पताल की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया कि दोनों लोगों ने अपने पत्रकार होने का परिचय दिया और सोशल मीडिया न्यूज चैनल के जरिए अस्पताल से संबंधित सामग्री प्रसारित करने की बात कही।

पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपियों और अस्पताल के बीच बातचीत किस मुद्दे पर हुई थी, कथित तौर पर रकम की मांग किस परिस्थिति में की गई और 10 हजार रुपये का लेन-देन किस प्रकार हुआ।

सोशल मीडिया चैनल चलाने का दावा

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार दोनों आरोपी सोशल मीडिया पर न्यूज चैनल चलाने का दावा करते थे। ऐसे में जांच का एक पहलू यह भी हो सकता है कि संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके चैनल या पेज की गतिविधियां क्या थीं और क्या अस्पताल से संबंधित कोई सामग्री पहले प्रकाशित या प्रसारित की गई थी।

पुलिस इस मामले में डिजिटल माध्यमों से जुड़े साक्ष्यों की भी जांच कर सकती है। कथित बातचीत, संदेश, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य उपलब्ध सामग्री मामले की जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, इन सभी पहलुओं पर पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

शिकायत के आधार पर पुलिस की कार्रवाई

अस्पताल के डॉक्टर की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की। दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर 10 हजार रुपये की राशि किस उद्देश्य से ली गई और अस्पताल को बदनाम करने की धमकी देने के पीछे पूरा घटनाक्रम क्या था।

मामले में शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के आधार पर होगी। गिरफ्तारी का अर्थ आरोप सिद्ध होना नहीं है। पुलिस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

पत्रकारिता के नाम पर दबाव बनाने के आरोपों की जांच

इस घटना ने पत्रकारिता और सोशल मीडिया पर न्यूज चैनल चलाने के नाम पर किसी संस्था या व्यक्ति पर दबाव बनाने से जुड़े सवाल भी खड़े किए हैं। हालांकि इस मामले में आरोपों की प्रकृति और उनकी वास्तविकता का निर्धारण जांच के बाद ही किया जा सकेगा।

पुलिस के सामने अब मुख्य रूप से अस्पताल की शिकायत, मरीज के भर्ती रहने से जुड़े दस्तावेज, आरोपियों और अस्पताल के बीच हुई बातचीत तथा कथित रकम के लेन-देन की जांच महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे कथित न्यूज चैनल से संबंधित गतिविधियों की भी पड़ताल की जा सकती है।

फिलहाल जालना पुलिस ने निकिता काले और सचिन सर्वे को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अस्पताल की शिकायत में लगाए गए आरोपों और पुलिस जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Tags: