मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने खरीफ 2026 सीजन में बारिश की कमी और सूखे से जुड़े अन्य मानकों के आधार पर राज्य के 265 तालुकाओं को सूखाग्रस्त घोषित किया है। सरकार ने इन इलाकों में किसानों, खेतिहर मजदूरों, विद्यार्थियों, पशुपालकों और अन्य प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए 12 उपायों और रियायतों की घोषणा की है। राज्य के कुल 358 तालुकाओं में से 265 तालुका यानी करीब 75 प्रतिशत क्षेत्र को ट्रिगर-1 के तहत लाया गया है।
राज्य के राहत एवं पुनर्वास विभाग ने इस संबंध में सरकारी आदेश जारी किया है। यह फैसला कृषि आयुक्त की रिपोर्ट और जून 2026 से अब तक बारिश की कमी तथा सूखे से जुड़े अन्य मानकों के आकलन के बाद लिया गया। सरकार ने प्रभावित इलाकों में फसल नुकसान का जमीनी स्तर पर आकलन शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं।मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रभावित तालुकाओं के जिलाधिकारियों को तत्काल पंचनामा शुरू करने के निर्देश दिए हैं। पंचनामा के जरिए खेतों में फसल की वास्तविक स्थिति और नुकसान का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। अधिकारियों को क्षतिग्रस्त फसलों की तस्वीरें GPS लोकेशन के साथ लेने और विस्तृत रिपोर्ट कृषि आयुक्त के माध्यम से सरकार को भेजने को कहा गया है।
सरकार की ओर से घोषित राहत पैकेज में किसानों के लिए जमीन के राजस्व में छूट, कृषि ऋण के पुनर्गठन और कृषि से जुड़े बैंक कर्ज की वसूली पर रोक जैसे उपाय शामिल हैं। इसके अलावा कृषि पंपों के बिजली बिल में भी राहत देने का फैसला किया गया है। 7.5 हॉर्सपावर तक के कृषि पंपों के बिजली बिल पहले ही माफ किए जा चुके हैं, जबकि नई व्यवस्था में इससे अधिक क्षमता वाले कृषि पंपों के मौजूदा बिजली बिल पर भी छूट दी जाएगी।सूखाग्रस्त घोषित गांवों में कृषि पंपों की बिजली आपूर्ति काटने पर भी रोक रहेगी। इसका उद्देश्य सिंचाई और कृषि गतिविधियों के लिए उपलब्ध बिजली आपूर्ति को बनाए रखना है। सरकार ने संबंधित विभागों को इस संबंध में आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
राहत पैकेज में विद्यार्थियों को भी शामिल किया गया है। प्रभावित इलाकों के स्कूल और कॉलेज विद्यार्थियों की परीक्षा फीस माफ करने का फैसला किया गया है। सरकार का कहना है कि सूखे की स्थिति का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ग्रामीण परिवारों और विद्यार्थियों पर भी पड़ता है। इसलिए राहत उपायों में शिक्षा से जुड़ी रियायत को भी शामिल किया गया है।ग्रामीण रोजगार के मोर्चे पर भी सरकार ने राहत की घोषणा की है। ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत काम के नियमों में आवश्यक ढील देने और अधिक से अधिक काम शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इससे प्रभावित ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ उनकी आय के स्रोत को बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पेयजल संकट से निपटने के लिए जरूरत वाले इलाकों में पानी के टैंकर तैनात किए जाएंगे। सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था करने को भी राहत पैकेज में शामिल किया गया है। सूखे की स्थिति में पानी और चारे की कमी का असर पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों पर भी पड़ सकता है, इसलिए इन व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी गई है।
सरकार ने खाद्यान्न की उपलब्धता बनाए रखने के लिए भी व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। कृषि पर निर्भर किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए पर्याप्त खाद्यान्न उपलब्ध रहे, इसके लिए लक्षित वितरण व्यवस्था को लागू करने की बात कही गई है। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में जल संरक्षण के काम शुरू करने और भविष्य की पेयजल तथा पशुओं के लिए पानी की जरूरत को ध्यान में रखते हुए योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।राज्य के छह राजस्व मंडलों में 265 सूखाग्रस्त तालुका शामिल किए गए हैं। छत्रपति संभाजीनगर मंडल में सबसे अधिक 74 तालुका शामिल हैं। इसके बाद अमरावती मंडल में 56, नासिक में 49, नागपुर में 39, पुणे में 35 और ठाणे मंडल में 12 तालुका शामिल हैं।
छत्रपति संभाजीनगर मंडल के 74 तालुकाओं में छत्रपति संभाजीनगर, जालना, बीड, लातूर, धाराशिव, नांदेड, परभणी और हिंगोली जिलों के तालुका शामिल हैं। अमरावती मंडल में बुलढाणा, अमरावती, अकोला, वाशिम और यवतमाल के तालुका हैं। नागपुर मंडल में वर्धा, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर और गढ़चिरौली के तालुका शामिल किए गए हैं।नासिक मंडल में नासिक, धुले, जलगांव, नंदुरबार और अहिल्यानगर के 49 तालुका शामिल हैं। पुणे मंडल के तहत पुणे, सोलापुर, सांगली, सतारा और कोल्हापुर के 35 तालुका हैं। वहीं ठाणे मंडल में रायगढ़ का श्रीवर्धन तथा रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग के कुछ तालुका शामिल किए गए हैं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि फसल नुकसान के लिए दी जाने वाली प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता का अलग से फैसला किया जाएगा। इसके लिए पहले प्रभावित क्षेत्रों में पंचनामा और फसल नुकसान का निर्धारित आकलन पूरा किया जाएगा। इसके बाद अलग सरकारी आदेश के जरिए वित्तीय सहायता की घोषणा की जाएगी।मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाल के दिनों में राज्य के सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा कर किसानों से बातचीत की थी। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने भी सूखा प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायजा लिया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि राहत कार्यों में किसानों और खेतिहर मजदूरों को प्राथमिकता दी जाएगी।
इस फैसले के बाद अब प्रभावित 265 तालुकाओं में प्रशासनिक स्तर पर राहत और नुकसान के आकलन की प्रक्रिया तेज होगी। पंचनामा, पेयजल, चारा, बिजली, रोजगार और खाद्यान्न से जुड़ी व्यवस्थाओं पर संबंधित विभाग काम करेंगे। वहीं फसल नुकसान के आधार पर मिलने वाली आर्थिक सहायता के लिए अलग प्रक्रिया पूरी की जाएगी।महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला खरीफ सीजन में बारिश की कमी से प्रभावित किसानों और ग्रामीण आबादी के लिए राहत व्यवस्था का पहला बड़ा चरण है। फिलहाल 265 तालुकाओं में ट्रिगर-1 लागू किया गया है और इन इलाकों में घोषित रियायतों तथा राहत उपायों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।