Nagpur नागपुर: एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि पिछले तीन सालों में राज्य के सात जिलों में 14,526 बच्चों की मौत हुई है। स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने शुक्रवार को विधानसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बीजेपी विधायक स्नेहा दुबे के सवाल का जवाब देते हुए ये आंकड़े पेश किए।
स्वास्थ्य मंत्री आबिटकर ने अपने लिखित जवाब में बताया कि 2022-23 से 2024-25 की अवधि के दौरान पुणे, मुंबई, छत्रपति संभाजीनगर, नागपुर, अमरावती, अकोला और यवतमाल जिलों में कुल 14,526 बच्चों की मौत हुई। इसमें पांच साल से कम उम्र के बच्चे, नवजात शिशुओं से लेकर छोटे बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा, आदिवासी बहुल पालघर जिले में 138 नवजात शिशुओं की मौत हुई।
आबिटकर ने भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा 2022 में जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम रिपोर्ट का भी जिक्र किया। महाराष्ट्र में नवजात मृत्यु दर प्रति 1,000 जन्म पर 11 है, जो राष्ट्रीय औसत 23 से काफी कम है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य जांच, अमृत आहार योजना, SAM श्रेणी के बच्चों के लिए लक्षित हस्तक्षेप और सुपोषित महाराष्ट्र पहल जैसी योजनाओं के माध्यम से कुपोषण को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए टास्क टीम
विधान परिषद में विधायक उमा खापरे ने शिशु मृत्यु दर का मुद्दा उठाया। इस पर जवाब देते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि कुपोषण के कारण एक भी बच्चे की मौत न हो, और इसके लिए एक विशेष कार्य दल का गठन किया जाएगा। विदर्भ की समस्याओं को दूर करने के लिए नागपुर में शीतकालीन सत्र आयोजित किया जा रहा है। हालांकि, कुपोषण और शिशु मृत्यु दर जैसे गंभीर मुद्दों पर सिर्फ आधे घंटे ही चर्चा हुई।