भोपाल। मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गुरुवार को विरोध प्रदर्शन किया गया। मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाए।प्रदर्शन के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए और विभिन्न पोस्टर लेकर पहुंचे। कुछ पोस्टरों में ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग और कथित ‘वोट चोरी’ से जुड़े आरोप लिखे हुए थे। ये प्रदर्शनकारियों और कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप हैं; इनसे संबंधित किसी आपराधिक निष्कर्ष की पुष्टि नहीं हुई है।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, वोटर डेटाबेस तथा SIR से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर चुनाव आयोग के भीतर ही सवाल उठे थे। हाल की मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले लगभग 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इन कथित आपत्तियों में मतदाता सूची, फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकरण और निर्णय प्रक्रिया से जुड़े विषय शामिल बताए गए हैं।इन्हीं रिपोर्टों के बाद कांग्रेस और यूथ कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपना विरोध तेज किया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इन आपत्तियों की पर्याप्त जांच और समीक्षा होनी चाहिए थी।हालांकि, इन रिपोर्टों और विपक्षी दलों के आरोपों को चुनाव आयोग के खिलाफ किसी सिद्ध अनियमितता के रूप में नहीं देखा जा सकता। विवाद का केंद्र आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया और SIR से जुड़े फैसलों को लेकर सामने आए दावे हैं।
मतदाता सूची से नाम हटने पर विवाद
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने राज्य में SIR प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दावा किया कि लाखों मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं और चुनाव आयोग को इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची से किसी भी पात्र नागरिक का नाम हटना गंभीर विषय है और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। पार्टी ने प्रभावित मतदाताओं की स्थिति और नाम हटाने के आधार से जुड़ी विस्तृत जानकारी की मांग की है।
यूथ कांग्रेस ने तेज किया अभियान
भोपाल में हुआ प्रदर्शन देश के अलग-अलग हिस्सों में चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस तथा यूथ कांग्रेस के विरोध अभियान का हिस्सा है। एक दिन पहले नई दिल्ली में भी भारतीय युवा कांग्रेस ने प्रदर्शन कर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की थी। उस प्रदर्शन में भी मतदाता सूची और आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली से संबंधित मीडिया रिपोर्टों को आधार बनाकर सवाल उठाए गए थे।यूथ कांग्रेस ने गुरुवार को ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर एक ऑनलाइन याचिका भी शुरू की। संगठन ने लोगों से इस अभियान का समर्थन करने का आह्वान किया है।
कांग्रेस ने देशव्यापी प्रदर्शन का किया ऐलान
SIR विवाद अब केवल भोपाल या मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का फैसला किया है। पार्टी ने अपनी राज्य इकाइयों को निर्वाचन कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। कांग्रेस ने CEC को पद से हटाने और उनके कार्यकाल के दौरान मतदाता सूची से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है।पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव से जुड़ी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और यदि चुनाव आयोग के सदस्यों के बीच किसी निर्णय को लेकर असहमति थी तो उससे जुड़े तथ्यों को स्पष्ट किया जाना चाहिए।कांग्रेस के इन आरोपों और मांगों ने चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।
दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों पर विवाद
विवाद के केंद्र में वह मीडिया रिपोर्ट है जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों पर लगभग 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट में इन आपत्तियों को SIR और मतदाता सूची से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं से जोड़ा गया है।कांग्रेस इसी रिपोर्ट का हवाला देकर मुख्य चुनाव आयुक्त से जवाब मांग रही है। विपक्ष का कहना है कि यदि आयोग के भीतर ही कुछ फैसलों को लेकर मतभेद थे तो उन पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए।इस मामले में राजनीतिक दलों के आरोपों और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर बहस जारी है। किसी भी कथित अनियमितता पर अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक जांच या सक्षम संस्था की पुष्टि के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
मध्य प्रदेश में भी बढ़ा राजनीतिक टकराव
मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने SIR के मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ाने की रणनीति बनाई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए निर्वाचन अधिकारियों से जवाब मांगा है। पार्टी राज्य स्तर पर बड़े विरोध कार्यक्रमों की भी तैयारी कर रही है।कांग्रेस का आरोप है कि SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र और पारदर्शी समीक्षा की जरूरत है। वहीं यह मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक विवाद का विषय बन चुका है।
निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया का मुद्दा उठाया
भोपाल में प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार हैं और मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी होना चाहिए। यूथ कांग्रेस ने मांग की कि SIR से जुड़े सवालों पर चुनाव आयोग विस्तृत जवाब दे।प्रदर्शनकारियों ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। हालांकि, यह राजनीतिक मांग है और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया राजनीतिक प्रदर्शन या मांग से स्वतः लागू नहीं होती।भोपाल में हुए प्रदर्शन के बाद SIR और मतदाता सूची को लेकर मध्य प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर विरोध कार्यक्रमों की घोषणा की है, जबकि विवाद का मुख्य केंद्र मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग के भीतर कथित आपत्तियों से जुड़ी रिपोर्टें बनी हुई हैं।