भाजपा की पदयात्रा में पोस्टर पर हंगामा, विजयवर्गीय का बयान वायरल
भ्रष्टाचार का पोस्टर देखकर भड़के विजयवर्गीय
इंदौर: मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की एक सामाजिक कार्यकर्ता पर की गई टिप्पणी चर्चा में है। भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के दौरान नगरीय निकायों में सामान की खरीद से जुड़े कथित भ्रष्टाचार का पोस्टर दिखा रहे प्रहलाद पांडेय पर मंत्री नाराज हो गए। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, विजयवर्गीय ने मंच से कहा, “इतने जूते खाने के बाद भी आ गया।” घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है।
यह घटनाक्रम शुक्रवार, 30 अक्टूबर को इंदौर में आयोजित भाजपा के कार्यक्रम का है। पांडेय एक पोस्टर लेकर पहुंचे थे, जिसमें नगरीय निकायों की खरीद में कथित अनियमितताओं पर जवाब मांगा गया था। मंत्री के संबोधन के दौरान उन्होंने पोस्टर दिखाया। इसके बाद विजयवर्गीय ने पुलिस अधिकारियों को बुलाकर उन्हें कार्यक्रम स्थल से हटाने के लिए कहा। समाचार एजेंसी भाषा के अनुसार, पुलिस ने सार्वजनिक आयोजन में बाधा पहुंचाने के आरोप में पांडेय को हिरासत में लिया।
पोस्टर पर बल्ब और फिनाइल की खरीद के कथित दाम लिखे हुए थे। उसके जरिए सरकारी खरीद में खर्च की गई राशि पर सवाल उठाया गया था। ये प्रदर्शनकारी की ओर से लगाए गए आरोप हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इन दरों से संबंधित खरीद दस्तावेज, जांच का निष्कर्ष या किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा भ्रष्टाचार की पुष्टि का विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए पोस्टर पर लिखे आंकड़ों को प्रमाणित खरीद मूल्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
विस्तार न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा की पदयात्रा सुभाष नगर से पाटनीपुरा चौराहे तक निकाली गई थी। कार्यक्रम में विजयवर्गीय जब मंच से संबोधित कर रहे थे, तभी पांडेय पोस्टर दिखा रहे थे। मंत्री ने पुलिस अधिकारी को बुलाते हुए प्रदर्शनकारी पर आयोजन में व्यवधान पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि जहां जवाब देना होगा, वहां जवाब दिया जाएगा और प्रदर्शनकारी को वहां से चले जाने के लिए कहा।
रिपोर्टों में वर्णित वीडियो के अनुसार, इसी दौरान एक व्यक्ति पांडेय के हाथ से पोस्टर छीन लेता है। इसके बाद पुलिसकर्मी उनके पास पहुंचते हैं और उन्हें अपने साथ ले जाते हैं। पांडेय इस कार्रवाई पर सवाल करते दिखाई देते हैं। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, वह पुलिसकर्मियों से बार-बार पूछते रहे कि उनका अपराध क्या है। इस तरह कार्यक्रम में शुरू हुआ पोस्टर प्रदर्शन पुलिस द्वारा उन्हें वहां से हटाए जाने तक पहुंच गया।
विजयवर्गीय ने मंच से प्रदर्शनकारी को थोड़ी देर के लिए पुलिस की गाड़ी में बैठाने की बात भी कही। उन्होंने पांडेय को कार्यक्रम में बाधा उत्पन्न करने वाला बताया और ऐसे लोगों को अराजकतावादी तत्वों के साथ जोड़ते हुए टिप्पणी की। दूसरी ओर, पांडेय का कहना था कि वह सार्वजनिक खरीद में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठा रहे थे। दोनों पक्षों के इन बयानों के बीच कार्यक्रम में सवाल पूछने के तरीके और उस पर मंत्री की प्रतिक्रिया को लेकर विवाद सामने आया है।
पांडेय ने बाद में अपने प्रदर्शन को जनता की ओर से जवाब मांगने की कोशिश बताया। उनका कहना था कि लोकतंत्र में लोगों को सवाल पूछने और सत्ता से जवाब मांगने का अधिकार है। उन्होंने अपने पोस्टर और कार्यक्रम में मौजूदगी का संबंध नगरीय निकायों की खरीद में कथित गड़बड़ी से बताया। उपलब्ध समाचार विवरण में उनकी हिरासत की अवधि, बाद में रिहाई या किसी प्राथमिकी के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
भाजपा के इस आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी शामिल हुए थे। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस पर लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं और संस्थाओं का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाया। इसी राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान पांडेय के पोस्टर प्रदर्शन और विजयवर्गीय की प्रतिक्रिया का घटनाक्रम सामने आया। नईदुनिया ने भी मंत्री की टिप्पणी और उसके वीडियो के प्रसारित होने की जानकारी दी है।
फिलहाल सामने आई जानकारी से यह स्पष्ट है कि पांडेय कथित खरीद अनियमितताओं पर सवाल लेकर कार्यक्रम में पहुंचे थे और पुलिस उन्हें वहां से ले गई। विजयवर्गीय की टिप्पणी में पुराने व्यवहार या घटना की ओर संकेत जरूर था, लेकिन केवल उस कथन से किसी पूर्व मारपीट की घटना की पुष्टि नहीं होती। इसी तरह प्रदर्शनकारी के आरोपों और सरकारी खरीद में गड़बड़ी सिद्ध होने के बीच अंतर बना हुआ है। मामले में मंत्री की भाषा, पुलिस का हस्तक्षेप और खरीद से संबंधित आरोप तीन अलग पहलू हैं, जिन पर आगे की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।