कूनो से निकलकर टिकटोली गांव पहुंचे दो चीते, गोवंश के शिकार से ग्रामीणों में दहशत
श्योपुर। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क से दो चीतों के बाहर निकलकर आबादी वाले क्षेत्र में पहुंचने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि दोनों चीते सेसईपुरा क्षेत्र के टिकटोली गांव की सीमा में दिखाई दिए। इस दौरान एक पालतू गोवंश के शिकार की सूचना भी मिली है। चीतों की मौजूदगी और पशु के शिकार की खबर फैलते ही ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया। सुरक्षा को देखते हुए कई ग्रामीण अपने घरों में चले गए, जबकि खेतों और खुले स्थानों पर मौजूद लोग सुरक्षित जगहों की ओर लौट आए।
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, कूनो के खुले जंगल में विचरण कर रहे दो चीते पार्क की सीमा से बाहर निकलकर टिकटोली गांव के आसपास पहुंच गए थे। ग्रामीणों को उनकी मौजूदगी का पता उस समय चला, जब गांव की सीमा में एक गोवंश पर हमले की जानकारी सामने आई। दावा किया जा रहा है कि चीतों ने पशु को मार डाला। हालांकि, मारे गए पशु के गाय अथवा बछड़ा होने और दोनों चीतों की पहचान के संबंध में वन विभाग का विस्तृत आधिकारिक बयान सामने आना अभी बाकी है।
ग्रामीणों के मुताबिक, घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भय का वातावरण बन गया। खेतों में काम करने वाले किसानों और पशुपालकों ने कुछ समय के लिए बाहर निकलना बंद कर दिया। ग्रामीणों को आशंका थी कि चीते शिकार करने के बाद आबादी की ओर बढ़ सकते हैं। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई। पशुपालकों ने खुले स्थानों पर बंधे मवेशियों को घरों अथवा सुरक्षित बाड़ों में पहुंचाना शुरू कर दिया।
घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम टिकटोली गांव और आसपास के क्षेत्र में पहुंची। टीम ने चीतों की गतिविधियों तथा उनकी संभावित दिशा का पता लगाने का काम शुरू किया। वनकर्मियों ने ग्रामीणों से चीतों के पास नहीं जाने, भीड़ नहीं लगाने और उनका पीछा नहीं करने की अपील की। अधिकारियों द्वारा चीतों की लोकेशन पर निगरानी रखे जाने की जानकारी है। जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर भेजने के प्रयास किए जाएंगे।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार खुले जंगल में छोड़े गए चीतों का पार्क की प्रशासनिक सीमा से बाहर निकलना असामान्य नहीं है। चीते भोजन, अनुकूल क्षेत्र और विचरण के लिए लंबी दूरी तय कर सकते हैं। ऐसे में कूनो नेशनल पार्क से लगे गांवों में उनकी मौजूदगी समय-समय पर दर्ज की जाती रही है। इससे पहले भी श्योपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में चीतों के पहुंचने और पालतू पशु का शिकार करने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अगस्त 2025 में हसनपुर गांव में मादा चीता ज्वाला और उसके शावक द्वारा बंधे बछड़े के शिकार की खबर प्रकाशित हुई थी। उस घटना के बाद वन विभाग ने प्रभावित पशुपालक को मुआवजा दिलाने की बात कही थी।
कूनो के आसपास मानव और वन्यजीवों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व सुनिश्चित करना वन विभाग के सामने बड़ी चुनौती है। एक तरफ देश में चीतों को दोबारा बसाने की महत्वाकांक्षी परियोजना आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर पार्क से लगे गांवों के निवासियों, किसानों और पशुपालकों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पशुओं को खुले बाड़ों में बांधा जाता है। जंगल से बाहर निकले किसी शिकारी वन्यजीव के लिए ये पशु आसान शिकार बन सकते हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि चीतों की गतिविधियों के संबंध में उन्हें समय रहते सूचना दी जाए। उनका कहना है कि वन विभाग की निगरानी टीमों और स्थानीय “चीता मित्रों” को अधिक सक्रिय रखा जाना चाहिए। रात के समय गश्त बढ़ाने, संवेदनशील स्थानों पर कर्मचारियों की तैनाती करने तथा पशुओं के सुरक्षित बाड़ों के संबंध में जागरूकता फैलाने की भी जरूरत बताई जा रही है। पहले सामने आए मामलों में वन विभाग ने लोगों को चीतों से सुरक्षित दूरी रखने और उन्हें घेरने अथवा खदेड़ने का प्रयास नहीं करने की सलाह दी थी।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि चीता आम तौर पर मनुष्यों से दूरी बनाए रखने का प्रयास करता है, लेकिन उसे घेरना, पीछा करना या शोर मचाकर उकसाना खतरनाक हो सकता है। किसी गांव के पास चीता दिखाई देने पर ग्रामीणों को तत्काल वन विभाग को जानकारी देनी चाहिए। बच्चों को अकेले खेतों या जंगल की ओर नहीं भेजना चाहिए और पालतू पशुओं को रात में मजबूत बाड़े में रखना चाहिए।
टिकटोली की घटना के बाद वन विभाग से प्रभावित पशुपालक के नुकसान का आकलन कर नियमानुसार मुआवजा दिलाने की अपेक्षा की जा रही है। फिलहाल टीम चीतों की लोकेशन और गतिविधियों पर नजर रख रही है। दोनों चीते जंगल की ओर लौटे हैं या अभी गांव के आसपास मौजूद हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है। वन विभाग का विस्तृत बयान आने के बाद ही घटना, मारे गए पशु और चीतों की पहचान के संबंध में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।