भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का विरोध बुधवार को जिला स्तर तक पहुंच गया। भोपाल में प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के प्रदर्शन के दो दिन बाद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राज्य के विभिन्न जिला मुख्यालयों पर कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई। चुनाव आयोग ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि SIR समेत महत्वपूर्ण फैसले आयोग ने सर्वसम्मति से लिए हैं।प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर बुधवार को कई जिलों में कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर कार्यालयों की ओर मार्च किया। कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने तथा सत्यापन की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग की। पार्टी का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब चुनाव आयोग को देना चाहिए।
इससे पहले सोमवार, 28 सितंबर को भोपाल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में बड़ा प्रदर्शन किया गया था। कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से अरेरा हिल्स स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़े थे। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को आगे जाने से रोका था। कुछ कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और कई प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर वहां से हटाया।
भोपाल के प्रदर्शन में मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और कई विधायक तथा वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान जीतू पटवारी ने कहा था कि पार्टी इस आंदोलन को दो दिन बाद प्रदेश के जिलों तक ले जाएगी। कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग भी उठाई है। ये कांग्रेस की राजनीतिक मांगें और आरोप हैं, जिनकी न्यायिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
बुधवार को ग्वालियर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी। कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों ने वहां लगाए गए बैरिकेड पार किए और आगे जाने की कोशिश की। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत कलेक्ट्रेट के आसपास बैरिकेडिंग की थी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस दौरान चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया के खिलाफ नारे लगाए।
इंदौर में भी कांग्रेस के प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक चार पुलिस थानों का बल सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया था। कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट की ओर मार्च करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की और मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
रतलाम में विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला लेकर मार्च किया और बाद में उसे जलाया। पुलिस ने आग बुझाने की कोशिश की, जिस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच कुछ देर धक्का-मुक्की हुई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध के प्रतीक के तौर पर काले गुब्बारे भी छोड़े।
कांग्रेस का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में नामों के सत्यापन और हटाए जाने के तरीके को लेकर गंभीर सवाल हैं। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में किए गए बदलावों की जानकारी जिला और विधानसभा क्षेत्र के स्तर पर सार्वजनिक की जानी चाहिए। भोपाल के प्रदर्शन के दौरान जीतू पटवारी ने दावा किया था कि अंतिम मतदाता सूची से लाखों नाम हटाए गए हैं और इसका विस्तृत विवरण चुनाव आयोग को देना चाहिए। यह कांग्रेस का दावा है, जिसे चुनाव आयोग ने स्वीकार नहीं किया है।
दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि संस्था में किसी मुद्दे पर अलग-अलग विचार सामने आना सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन SIR समेत अंतिम और महत्वपूर्ण फैसले आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग ने यह भी कहा है कि उसकी चुनावी और मतदाता सूची संबंधी प्रक्रियाएं कानून के अनुसार संचालित की जा रही हैं।
ज्ञानेश कुमार वर्तमान में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार उन्होंने 19 फरवरी 2025 को देश के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था। आयोग में उनके साथ सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यरत हैं।
मध्य प्रदेश कांग्रेस का यह आंदोलन ऐसे समय तेज हुआ है जब SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग लगातार कह रहा है कि उसकी प्रक्रियाएं कानूनी प्रावधानों और संस्थागत निर्णयों के तहत संचालित होती हैं।
मध्य प्रदेश में बुधवार के जिला-स्तरीय प्रदर्शनों के साथ कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे पर अपना अभियान जारी रखेगी। भोपाल से शुरू हुए प्रदर्शन को ग्वालियर, इंदौर, रतलाम सहित कई जिलों तक ले जाया गया। पार्टी का फोकस मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, SIR से जुड़ी प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव की जानकारी सार्वजनिक कराने की मांग पर है।
फिलहाल कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप राजनीतिक विवाद का हिस्सा हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ किसी आपराधिक आरोप की न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है। चुनाव आयोग भी कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की आपत्तियों का विरोध करते हुए अपनी प्रक्रिया का बचाव कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में SIR और चुनाव आयोग को लेकर मध्य प्रदेश के साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक टकराव जारी रहने की संभावना है।
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