SGSITS के छात्रों ने बेकार सामान से बनाए उपयोगी प्रोटोटाइप, AAROHAN 2026 में दिखाया हुनर
इंदौर। पर्यावरण संरक्षण और इंजीनियरिंग की रचनात्मक सोच को एक साथ प्रस्तुत करते हुए श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (SGSITS) के छात्रों ने AAROHAN 2026 में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। संस्थान के इंडस्ट्रियल एंड प्रोडक्शन इंजीनियरिंग (IPE) विभाग की ओर से आयोजित 'बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट' प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने रोजमर्रा के बेकार सामान को उपयोगी प्रोटोटाइप में बदलने का प्रयास किया। 'वेस्ट टू वंडर' थीम पर आयोजित इस प्रतियोगिता का उद्देश्य छात्रों को ऐसी तकनीकी सोच विकसित करने के लिए प्रेरित करना था, जिससे कचरे का इस्तेमाल वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान में किया जा सके।
प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने यह दिखाने का प्रयास किया कि अनुपयोगी समझी जाने वाली वस्तुओं को रचनात्मक सोच और इंजीनियरिंग के सिद्धांतों की मदद से उपयोगी बनाया जा सकता है। आयोजन में पर्यावरणीय स्थिरता, संसाधनों का बेहतर उपयोग और तकनीकी नवाचार जैसे विषयों को महत्व दिया गया।
'वेस्ट टू वंडर' थीम पर हुआ आयोजन
AAROHAN 2026 के अंतर्गत आयोजित इस प्रतियोगिता की थीम 'वेस्ट टू वंडर' रखी गई थी। इसका मुख्य विचार बेकार वस्तुओं को उपयोगी रूप देना था।
प्रतियोगिता में छात्रों के सामने चुनौती थी कि वे रोजमर्रा में इस्तेमाल होने के बाद फेंक दी जाने वाली वस्तुओं के बारे में नए तरीके से सोचें।
उन्हें यह समझना था कि ऐसी वस्तुओं का उपयोग केवल सजावट तक सीमित न रखकर व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए कैसे किया जा सकता है।
इस आयोजन ने छात्रों को इंजीनियरिंग के ज्ञान को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने का अवसर प्रदान किया।
बेकार सामान से बनाए काम करने वाले मॉडल
प्रतियोगिता की प्रमुख विशेषता यह रही कि छात्रों ने रोजमर्रा के कचरे से कार्यशील प्रोटोटाइप तैयार किए।
प्रोटोटाइप किसी विचार या तकनीकी समाधान का प्रारंभिक मॉडल होता है, जिसके माध्यम से उसकी उपयोगिता और कार्यप्रणाली को समझा जा सकता है।
छात्रों ने बेकार वस्तुओं को केवल अनुपयोगी सामग्री मानने के बजाय उन्हें नए निर्माण के संसाधन के रूप में देखा।
हालांकि, प्रतियोगिता में तैयार किए गए सभी मॉडलों के नाम, उनकी तकनीकी विशेषताओं और इस्तेमाल की गई सामग्री का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।
इसलिए किसी विशेष उपकरण या तकनीक के निर्माण का दावा करना उचित नहीं होगा।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई को मिला व्यावहारिक रूप
इंजीनियरिंग शिक्षा में तकनीकी सिद्धांतों के साथ व्यावहारिक अनुभव भी महत्वपूर्ण होता है।
'बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट' जैसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को अपने विचारों को वास्तविक मॉडल में बदलने का अवसर देती हैं।
SGSITS के छात्रों ने इसी सोच के साथ बेकार सामग्री का उपयोग करते हुए कार्यशील प्रोटोटाइप तैयार किए।
इस प्रक्रिया में किसी समस्या की पहचान करना, उपलब्ध संसाधनों का आकलन करना और समाधान तैयार करना महत्वपूर्ण होता है।
ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को कक्षा में पढ़े गए विषयों को वास्तविक जीवन से जोड़कर देखने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
IPE विभाग ने किया प्रतियोगिता का आयोजन
इस प्रतियोगिता का आयोजन SGSITS के इंडस्ट्रियल एंड प्रोडक्शन इंजीनियरिंग विभाग ने किया।
यह विभाग उत्पादन प्रक्रियाओं, संसाधनों के उपयोग और औद्योगिक कार्यप्रणाली से संबंधित इंजीनियरिंग विषयों से जुड़ा है।
'वेस्ट टू वंडर' थीम इन विषयों के साथ मेल खाती है, क्योंकि इसमें सीमित संसाधनों से उपयोगी परिणाम प्राप्त करने पर जोर दिया गया।
प्रतियोगिता के माध्यम से छात्रों को यह सोचने के लिए प्रोत्साहित किया गया कि उपलब्ध सामग्री का बेहतर इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।
हालांकि, आयोजन में शामिल शिक्षकों, निर्णायकों और विभागीय अधिकारियों के नाम उपलब्ध जानकारी में नहीं दिए गए हैं।
पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
रोजमर्रा के कचरे का दोबारा उपयोग पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।
कई वस्तुएं इस्तेमाल के बाद फेंक दी जाती हैं, जबकि उनमें मौजूद सामग्री का उपयोग अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
कचरे का पुनः उपयोग करने से नए संसाधनों की आवश्यकता कम करने में मदद मिल सकती है।
इसके साथ ही उपयोगी सामग्री को सीधे कचरे में बदलने से बचाया जा सकता है।
SGSITS की प्रतियोगिता ने इसी विचार को तकनीकी नवाचार के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया।
हालांकि, प्रतियोगिता में तैयार प्रोटोटाइप से वास्तविक स्तर पर कितनी सामग्री बचाई गई या पर्यावरणीय प्रभाव कितना कम हुआ, इसके आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
वास्तविक समस्याओं के समाधान पर जोर
आयोजन का उद्देश्य केवल बेकार सामान से आकर्षक वस्तुएं तैयार करना नहीं था।
छात्रों को यह चुनौती दी गई कि वे ऐसी समस्याओं के बारे में सोचें जिनका समाधान उपलब्ध कचरे से तैयार तकनीकी मॉडल के माध्यम से किया जा सके।
यह दृष्टिकोण इंजीनियरिंग के व्यावहारिक उपयोग को सामने लाता है।
किसी भी तकनीकी समाधान की उपयोगिता इस बात पर निर्भर करती है कि वह वास्तविक आवश्यकता को कितनी प्रभावी ढंग से पूरा करता है।
इसी कारण प्रतियोगिता में काम करने वाले प्रोटोटाइप तैयार करना महत्वपूर्ण रहा।
हालांकि, इन मॉडलों का आगे परीक्षण या व्यावसायिक उपयोग किए जाने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
छात्रों की रचनात्मक सोच को मिला मंच
AAROHAN 2026 में आयोजित प्रतियोगिता विद्यार्थियों के लिए अपनी रचनात्मक क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर बनी।
छात्रों ने उपलब्ध सामग्री को नए दृष्टिकोण से देखने और उसे उपयोगी रूप देने का प्रयास किया।
ऐसी गतिविधियों में तकनीकी ज्ञान के साथ कल्पनाशीलता और समस्या समाधान की क्षमता भी महत्वपूर्ण होती है।
किसी वस्तु को बेकार मानकर छोड़ देने के बजाय उसमें नई उपयोगिता तलाशना इस प्रतियोगिता का केंद्रीय विचार रहा।
हालांकि, प्रतियोगिता में कुल कितनी टीमों या विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
कम संसाधनों में नवाचार की सीख
'बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट' प्रतियोगिता का एक महत्वपूर्ण संदेश यह भी है कि नवाचार के लिए हमेशा नई या महंगी सामग्री की आवश्यकता नहीं होती।
कई बार उपलब्ध वस्तुओं का अलग तरीके से उपयोग करके भी तकनीकी समाधान तैयार किए जा सकते हैं।
यह सोच संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल को बढ़ावा देती है।
इंजीनियरिंग के क्षेत्र में किसी समाधान को तैयार करते समय उसकी लागत, उपयोगिता और संसाधनों की उपलब्धता जैसे पहलुओं पर विचार किया जाता है।
कचरे से प्रोटोटाइप बनाने की गतिविधि विद्यार्थियों को इन पहलुओं के बारे में व्यावहारिक रूप से सोचने का अवसर देती है।
तकनीक और स्थिरता का मेल
पर्यावरणीय स्थिरता का अर्थ संसाधनों का इस तरह उपयोग करना है कि उनका अनावश्यक दोहन और अपव्यय कम हो।
दूसरी ओर, इंजीनियरिंग का उद्देश्य विभिन्न समस्याओं के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करना है।
SGSITS की प्रतियोगिता में इन दोनों विचारों को एक साथ प्रस्तुत किया गया।
छात्रों ने बेकार सामग्री से कार्यशील मॉडल तैयार करके दिखाया कि तकनीकी सोच का उपयोग संसाधनों के पुनः इस्तेमाल के लिए भी किया जा सकता है।
यह पहल पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और तकनीकी शिक्षा के बीच संबंध को रेखांकित करती है।
AAROHAN 2026 में छात्रों की प्रतिभा का प्रदर्शन
AAROHAN 2026 के अंतर्गत आयोजित इस प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को अपनी तकनीकी समझ और रचनात्मक विचारों को सामने रखने का अवसर दिया।
'वेस्ट टू वंडर' थीम के माध्यम से कचरे को समस्या के बजाय संभावित संसाधन के रूप में देखने का संदेश दिया गया।
हालांकि, प्रतियोगिता के विजेताओं, पुरस्कारों और मूल्यांकन परिणामों का विवरण उपलब्ध नहीं है।
इसके बावजूद कार्यशील प्रोटोटाइप तैयार करना इस आयोजन की प्रमुख उपलब्धि रही।
SGSITS के इंडस्ट्रियल एंड प्रोडक्शन इंजीनियरिंग विभाग की यह पहल तकनीकी शिक्षा में व्यावहारिक गतिविधियों के महत्व को दर्शाती है।
कचरे से उपयोगी मॉडल तैयार करने वाले छात्रों ने यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण और इंजीनियरिंग नवाचार एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं।