इंदौर। मध्य प्रदेश में जनगणना 2027 की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। इसी क्रम में भोपाल स्थित जनगणना संचालन निदेशालय के निदेशक संजीव श्रीवास्तव ने मंगलवार को इंदौर पहुंचकर जनगणना से जुड़े कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कलेक्टर शिवम वर्मा और जिले के अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर अब तक की तैयारियों, निर्धारित गणना क्षेत्रों और आगामी कार्ययोजना की जानकारी ली। बैठक में बताया गया कि जिले में जनगणना के पहले चरण के लिए 5,971 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक निर्धारित किए गए हैं, जबकि दूसरे चरण में इनकी संख्या बढ़कर 7,847 हो जाएगी।
जनगणना निदेशक संजीव श्रीवास्तव ने बैठक के दौरान अधिकारियों से जनगणना 2027 के अंतर्गत चल रही गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने अब तक हुए कार्यों की प्रगति का आकलन करते हुए आगामी चरणों के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया। बैठक में जनगणना कार्यों को निर्धारित मानकों के अनुसार पूरा करने और प्रशासनिक तैयारियों को व्यवस्थित बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया।
इस दौरान अतिरिक्त कलेक्टर नवजीवन पवार ने जनगणना के प्रथम और द्वितीय चरण की तैयारियों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इंदौर जिले में प्रथम चरण के लिए कुल 41 चार्ज क्षेत्रों में 5,971 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (एचएलबी) निर्धारित किए गए हैं। इनमें ग्रामीण, नगरीय और छावनी क्षेत्रों के 2,068 ब्लॉक शामिल हैं। वहीं, इंदौर नगर निगम क्षेत्र में 3,903 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक बनाए गए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, प्रथम चरण में मकानों और परिवारों से जुड़ी आधारभूत जानकारी एकत्र करने की व्यवस्था रहती है। यह प्रक्रिया जनसंख्या गणना के अगले चरण की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। निर्धारित ब्लॉकों के आधार पर गणना कर्मियों की जिम्मेदारियां तय करने और अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यों का समन्वय स्थापित करने में सहायता मिलती है।
बैठक में संयुक्त संचालक योजना एवं सांख्यिकी प्रेमचंद परस्ते ने दूसरे चरण के लिए प्रस्तावित गणना ब्लॉकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनसंख्या गणना के दूसरे चरण में जिले में एन्यूमरेशन ब्लॉक यानी जनगणना गणना ब्लॉक की संख्या बढ़कर 7,847 हो जाएगी। इनमें ग्रामीण, नगरीय और छावनी क्षेत्रों के 2,693 ब्लॉक तथा नगर निगम क्षेत्र के 5,154 ब्लॉक शामिल रहेंगे।
इस प्रकार पहले चरण की तुलना में दूसरे चरण में कुल 1,876 ब्लॉकों की वृद्धि होगी। यह अंतर जनगणना के दोनों चरणों के लिए निर्धारित क्षेत्रीय व्यवस्थाओं को दर्शाता है। दूसरे चरण में अधिक ब्लॉक होने के कारण संबंधित कर्मचारियों की तैनाती, क्षेत्रवार जिम्मेदारियों और प्रशासनिक समन्वय की आवश्यकता भी महत्वपूर्ण होगी।
जनगणना किसी भी जिले की जनसंख्या, सामाजिक संरचना और आवासीय परिस्थितियों की जानकारी जुटाने का एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान है। इसके माध्यम से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग विभिन्न सरकारी योजनाओं, बुनियादी सुविधाओं और विकास संबंधी नीतियों के निर्धारण में किया जाता है। ऐसे में प्रत्येक क्षेत्र की सही पहचान और व्यवस्थित गणना सुनिश्चित करना आवश्यक होता है।
इंदौर जैसे तेजी से विकसित हो रहे महानगरीय क्षेत्र में जनगणना की तैयारियों का विशेष महत्व है। शहर के विस्तार, नई आवासीय कॉलोनियों, बढ़ती आबादी और आसपास के क्षेत्रों में हो रहे विकास को देखते हुए गणना क्षेत्रों का उचित निर्धारण प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। नगर निगम क्षेत्र में बड़ी संख्या में गणना ब्लॉक निर्धारित होना भी इस व्यापक कार्य की तैयारियों को दर्शाता है।
जनगणना के प्रथम चरण में मकानों की सूची तैयार करने और आवासीय सुविधाओं से संबंधित जानकारी जुटाने का कार्य किया जाता है। दूसरे चरण में जनसंख्या से जुड़ी विस्तृत जानकारी एकत्र की जाती है। दोनों चरणों से प्राप्त आंकड़े भविष्य में जनसंख्या संबंधी आवश्यकताओं को समझने और विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में उपयोगी होते हैं।
बैठक के दौरान जनगणना कार्यों के लिए आवश्यक मानव संसाधन, अनुमानित कर्मचारियों की संख्या और मानदेय से संबंधित व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। निदेशक संजीव श्रीवास्तव ने जिले में अब तक किए गए कार्यों की सराहना की। विशेष रूप से जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों के मानदेय वितरण को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने और कार्यों को व्यवस्थित ढंग से संपादित करने की प्रशंसा की गई।
उन्होंने अधिकारियों को आगामी तैयारियों के दौरान आवश्यक व्यवस्थाओं पर ध्यान देने का मार्गदर्शन दिया। जनगणना जैसे बड़े अभियान में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए जिला प्रशासन, स्थानीय निकायों और जनगणना से जुड़े अधिकारियों को निर्धारित जिम्मेदारियों के अनुसार कार्य करना होता है।
इस अवसर पर सहायक जिला जनगणना अधिकारी अजीत श्रीवास्तव, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी शीतल पाठक, जिला योजना अधिकारी सरिता भूरिया और सहायक जनगणना अधिकारी पीयूष मेश्राम सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रशासनिक स्तर पर जनगणना 2027 की तैयारियों को लेकर हुई इस समीक्षा बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिले में पहले और दूसरे चरण के लिए गणना ब्लॉकों की संख्या स्पष्ट होने से आगे की तैयारियों को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। आने वाले समय में कर्मचारियों की उपलब्धता, क्षेत्रवार व्यवस्थाओं और निर्धारित प्रक्रियाओं को पूरा करना जिला प्रशासन की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।