उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन नगर निगम में पदस्थ बिल्डिंग ऑफिसर राजकुमार राठौर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में अधिकारी अपनी पत्नी के साथ थाईलैंड की यात्रा के दौरान कथित तौर पर मगरमच्छ का मांस खाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब नगर निगम को जानकारी मिली कि संबंधित अधिकारी ने विदेश यात्रा पर जाने से पहले आवश्यक विभागीय अनुमति नहीं ली थी। नगर निगम के अनुसार, बिना अनुमति विदेश यात्रा करना सेवा नियमों का उल्लंघन हो सकता है। इसी आधार पर राठौर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।


सोशल मीडिया पर वायरल हुआ अधिकारी का वीडियो

सोमवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से चर्चा में आया। इसमें उज्जैन नगर निगम के बिल्डिंग ऑफिसर राजकुमार राठौर अपनी पत्नी के साथ थाईलैंड में नजर आ रहे हैं।

वीडियो के साथ अंग्रेजी में एक कैप्शन भी लिखा हुआ था, जिसका हिंदी अर्थ है, 'थाईलैंड में पहली बार मगरमच्छ का मांस चखते हुए।'

इस कैप्शन के बाद वीडियो को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ गई।

हालांकि वीडियो में दिखाई देने वाले भोजन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे मगरमच्छ का मांस बताए जाने की जानकारी फिलहाल वीडियो के कैप्शन और सामने आए विवरण पर आधारित है।

पत्नी के साथ थाईलैंड यात्रा पर गए थे अधिकारी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजकुमार राठौर अपनी पत्नी के साथ थाईलैंड की यात्रा पर गए थे।

इसी यात्रा के दौरान रिकॉर्ड किया गया बताया जा रहा वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है।

वीडियो में दोनों के भोजन करते दिखाई देने की बात कही जा रही है।

हालांकि यह वीडियो किस तारीख को बनाया गया और विदेश यात्रा कितने दिनों की थी, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।

यात्रा के दौरान उन्होंने किन-किन स्थानों का भ्रमण किया, इस संबंध में भी कोई आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है।

विदेश यात्रा की अनुमति नहीं लेने पर विवाद

इस पूरे मामले में नगर निगम की मुख्य आपत्ति अधिकारी की विदेश यात्रा से जुड़ी है।

नगर निगम के अनुसार, राजकुमार राठौर ने विदेश जाने से पहले संबंधित अधिकारियों से आवश्यक अनुमति नहीं ली थी।

सरकारी और नगरीय निकायों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए विदेश यात्रा से संबंधित निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक हो सकता है।

ऐसे मामलों में विभागीय अनुमति और यात्रा की जानकारी देना संबंधित सेवा नियमों पर निर्भर करता है।

यदि जांच में अनुमति नहीं लेने की पुष्टि होती है, तो अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

उज्जैन नगर निगम के तीन जोन की जिम्मेदारी

राजकुमार राठौर वर्तमान में उज्जैन नगर निगम के जोन क्रमांक एक, दो और तीन में बिल्डिंग ऑफिसर के पद पर पदस्थ हैं।

बिल्डिंग ऑफिसर का पद नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस पद से जुड़े अधिकारियों को भवन निर्माण संबंधी नियमों और विभागीय प्रक्रियाओं से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी दी जाती है।

ऐसे में अधिकारी का विदेश यात्रा संबंधी नियमों के पालन को लेकर विवाद में आना विभागीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

हालांकि राठौर के खिलाफ पहले किसी प्रकार की शिकायत या अनुशासनात्मक कार्रवाई का विवरण उपलब्ध नहीं है।

वीडियो सामने आने के बाद नगर निगम ने लिया संज्ञान

बताया जा रहा है कि वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नगर निगम का ध्यान इस मामले की ओर गया।

इसके बाद अधिकारी की विदेश यात्रा से संबंधित जानकारी सामने आई।

नगर निगम के अनुसार, यात्रा से पहले अनुमति नहीं ली गई थी।

इसी कारण मामला केवल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विभागीय नियमों के पालन से जुड़ गया।

हालांकि निगम की ओर से किसी औपचारिक कारण बताओ नोटिस या निलंबन आदेश की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं की गई है।

मगरमच्छ का मांस खाने से ज्यादा अनुमति का मुद्दा

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कथित तौर पर मगरमच्छ का मांस खाने की बात चर्चा का विषय बनी हुई है।

लेकिन नगर निगम के लिए मुख्य प्रश्न यह है कि अधिकारी ने विदेश यात्रा से पहले निर्धारित अनुमति क्यों नहीं ली।

किसी दूसरे देश में भोजन करने और विभागीय अनुमति के बिना विदेश यात्रा करने के मुद्दे अलग-अलग हैं।

थाईलैंड में मगरमच्छ के मांस से जुड़े खाद्य उत्पाद कुछ स्थानों पर उपलब्ध होते हैं। हालांकि किसी विशेष उत्पाद की वैधता उसके स्रोत और स्थानीय नियमों पर निर्भर करती है।

फिलहाल इस मामले में किसी वन्यजीव कानून के उल्लंघन की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए क्यों जरूरी है अनुमति?

सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के लिए विदेश यात्रा संबंधी नियम प्रशासनिक पारदर्शिता और सेवा अनुशासन से जुड़े होते हैं।

इन नियमों के अंतर्गत यात्रा का उद्देश्य, अवकाश और अन्य आवश्यक जानकारी विभाग को देनी पड़ सकती है।

हालांकि अनुमति की प्रक्रिया कर्मचारी की सेवा श्रेणी और संबंधित विभाग के नियमों के अनुसार अलग हो सकती है।

उज्जैन नगर निगम के मामले में भी अंतिम निर्णय लागू सेवा नियमों के आधार पर ही लिया जाएगा।

यदि अधिकारी ने नियमों का उल्लंघन किया है, तो विभाग उनसे स्पष्टीकरण मांग सकता है।

विभागीय कार्रवाई की संभावना

नगर निगम के अनुसार, राजकुमार राठौर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

ऐसी कार्रवाई से पहले संबंधित अधिकारी का पक्ष जानना और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच करना महत्वपूर्ण होता है।

यदि विभाग कारण बताओ नोटिस जारी करता है, तो अधिकारी को अपना जवाब प्रस्तुत करने का अवसर मिल सकता है।

इसके बाद सक्षम प्राधिकारी नियमानुसार निर्णय ले सकता है।

हालांकि इस मामले में अब तक कौन-सी औपचारिक कार्रवाई की गई है, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।

इसलिए अधिकारी के निलंबन या किसी निश्चित दंड की पुष्टि नहीं की जा सकती।

अधिकारी की प्रतिक्रिया का इंतजार

वायरल वीडियो और विदेश यात्रा की अनुमति को लेकर उठे सवालों के बीच राजकुमार राठौर का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।

उन्होंने यात्रा से पहले अनुमति के लिए कोई आवेदन दिया था या नहीं, यह विभागीय रिकॉर्ड से स्पष्ट हो सकता है।

इसी तरह यात्रा की अवधि और अवकाश संबंधी जानकारी भी जांच में उपयोगी हो सकती है।

फिलहाल अधिकारी की ओर से इस विवाद पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।

ऐसे में उनका पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

सोशल मीडिया वीडियो से बढ़ी चर्चा

सोशल मीडिया पर किसी सरकारी अधिकारी का वीडियो वायरल होने के बाद उससे जुड़े व्यक्तिगत और प्रशासनिक पहलुओं पर चर्चा शुरू हो सकती है।

इस मामले में भी वीडियो के कैप्शन और विदेश यात्रा की जानकारी ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।

हालांकि वीडियो वायरल होना अपने आप में किसी सेवा नियम के उल्लंघन का प्रमाण नहीं है।

नियमों के उल्लंघन की पुष्टि विभागीय दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों की जांच के आधार पर ही की जा सकती है।

अब नगर निगम के अगले कदम पर नजर

उज्जैन नगर निगम के बिल्डिंग ऑफिसर राजकुमार राठौर का थाईलैंड यात्रा से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद विभागीय अनुमति का मुद्दा प्रमुख हो गया है।

नगर निगम का कहना है कि अधिकारी ने विदेश जाने से पहले आवश्यक अनुमति नहीं ली थी।

अब यह देखना होगा कि निगम इस मामले में क्या कदम उठाता है और अधिकारी की ओर से क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है।

फिलहाल राजकुमार राठौर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संभावना है, लेकिन किसी अंतिम दंड की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले में आगे की स्थिति नगर निगम की जांच और लागू सेवा नियमों के आधार पर स्पष्ट होगी।

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