मुरैना के 2000 MW रिन्यूएबल एनर्जी पार्क को लेकर MP-UP में बिजली वितरण पर विवाद

Update: 2026-04-16 05:20 GMT

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश के मुरैना में प्रस्तावित 2000 मेगावाट के अल्ट्रा मेगा रिन्यूएबल एनर्जी पावर पार्क से बिजली वितरण को लेकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच मतभेद सामने आए हैं। विवाद का केंद्र प्रस्तावित रोटेशनल पावर शेयरिंग मॉडल है, जिसके तहत दोनों राज्यों के बीच बिजली आपूर्ति को अलग-अलग समय अवधि में विभाजित किया जाना है।

सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश ने इस मॉडल के तहत केवल पीक पीरियड में ग्रीन एनर्जी लेने की इच्छा जताई है। यूपी का कहना है कि दिन के समय उसे इस परियोजना से बिजली की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उस समय उसे अन्य स्रोतों से सस्ती बिजली उपलब्ध हो जाती है।

इस मुद्दे पर बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में चर्चा हुई। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस बड़े प्रोजेक्ट में मध्य प्रदेश के हितों की रक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी स्थिति में राज्य को नुकसान नहीं होना चाहिए।

विभागीय अधिकारियों ने जानकारी दी कि वे उत्तर प्रदेश को उसके निर्धारित रोटेशनल पीरियड में बिजली खरीदने के लिए मनाने का प्रयास कर रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यदि यूपी दिन के समय बिजली खरीदने पर सहमत नहीं होता है, तो इस बिजली को अन्य राज्यों को भी बेचा जा सकता है। इसके लिए ओडिशा, हरियाणा, पंजाब और बिहार जैसे राज्यों के साथ भी बातचीत की जा रही है।

मौजूदा समझौते के अनुसार, मध्य प्रदेश अक्टूबर से मार्च के बीच मुरैना परियोजना से सोलर ऊर्जा खरीदेगा, जबकि उत्तर प्रदेश को अप्रैल से सितंबर तक बिजली खरीदनी है। यह व्यवस्था दोनों राज्यों के बीच संतुलित खपत और उत्पादन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाई गई थी।

हालांकि, उत्तर प्रदेश के अधिकारियों का तर्क है कि दिन के समय उन्हें बाजार में अधिक सस्ती बिजली अन्य स्रोतों से उपलब्ध हो जाती है, जिसके कारण मुरैना परियोजना से दिन में बिजली खरीदना उनके लिए अनिवार्य नहीं रह जाता। इसी कारण रोटेशनल मॉडल पर सहमति बनना मुश्किल हो रहा है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार के बड़े रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में राज्यों के बीच खरीद समझौते स्पष्ट और स्थिर नहीं होते, तो परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता प्रभावित हो सकती है। वहीं, मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि परियोजना को संतुलित तरीके से चलाने के लिए सभी भागीदार राज्यों की प्रतिबद्धता जरूरी है।

फिलहाल, दोनों राज्यों के बीच बातचीत जारी है और केंद्रित प्रयास यह है कि रोटेशनल पावर शेयरिंग मॉडल पर सहमति बनाकर परियोजना को आगे बढ़ाया जा सके। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आवश्यकता पड़ने पर वैकल्पिक खरीदार राज्यों के साथ भी समझौता किया जाएगा ताकि परियोजना की क्षमता का पूरा उपयोग हो सके।

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