भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बुधवार को भारतीय जनता पार्टी की ओर से आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' रैली और पदयात्रा में केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का विरोध करने को लेकर कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठाए। नड्डा ने आरोप लगाया कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करने और देश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है।

भोपाल के टीटी नगर स्थित अटल पथ से आयोजित कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। रैली के माध्यम से भाजपा ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने का प्रयास किया। पार्टी ने इस अभियान को लोकतांत्रिक संस्थाओं के सम्मान और संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा से जोड़ा।

सभा को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया कोई नई व्यवस्था नहीं है। उनके अनुसार, देश में पहले भी कई बार इस तरह की प्रक्रिया अपनाई जा चुकी है। उन्होंने दावा किया कि SIR की प्रक्रिया 12 बार हुई है, जिनमें से 10 बार कांग्रेस के शासनकाल में और दो बार भाजपा के शासनकाल में इसे अपनाया गया।

नड्डा ने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस के शासनकाल में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण स्वीकार्य था, तो अब उसी प्रक्रिया पर सवाल क्यों खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी कार्यप्रणाली को राजनीतिक लाभ-हानि के आधार पर नहीं परखा जाना चाहिए। उनका आरोप था कि विपक्ष चुनावी हार के बाद संस्थाओं पर आरोप लगाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करता है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए नड्डा ने उनकी राजनीतिक समझ पर भी सवाल उठाए। उन्होंने राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि चुनाव परिणाम मनमाफिक आने पर विपक्ष को लोकतंत्र मजबूत दिखाई देता है, लेकिन हार होने पर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए जाने लगते हैं।

नड्डा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनाव आयोग के प्रति जनता के विश्वास को कमजोर करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए मतदाता सूची का सही और अद्यतन होना आवश्यक है। भाजपा का मानना है कि पात्र मतदाताओं का नाम सूची में रहना चाहिए, जबकि अपात्र नामों की पहचान नियमानुसार की जानी चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर राजनीतिक माहौल खराब करने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश में संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष लगातार ऐसा राजनीतिक विमर्श तैयार कर रहा है, जिससे चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक व्यवस्था की छवि प्रभावित हो।

SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच नड्डा ने मतदाता सूची में बाहरी और अपात्र व्यक्तियों के नाम होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची में बनाए रखने के पक्ष में है। हालांकि, यह भाजपा नेता का राजनीतिक आरोप है और किसी व्यक्ति की मतदाता पात्रता का निर्धारण चुनाव आयोग को लागू कानून एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार करना होता है।

नड्डा ने कहा कि भाजपा का रुख स्पष्ट है कि देश की चुनावी प्रक्रिया में केवल पात्र मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने इस संबंध में विपक्ष के विरोध को राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित बताया। साथ ही कहा कि चुनाव आयोग की संवैधानिक भूमिका का सम्मान करना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी कांग्रेस और राहुल गांधी पर हमला बोला। उन्होंने विपक्ष की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है। चुनावी नतीजों को स्वीकार करने के बजाय बार-बार संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना उचित नहीं है।

भाजपा ने इस पदयात्रा के जरिए अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को भी संदेश दिया कि वे चुनाव आयोग की प्रक्रिया के समर्थन में जनता के बीच जाएं। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनावी व्यवस्था का नियमित और महत्वपूर्ण हिस्सा है।

दरअसल, विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर केंद्र की सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दलों के बीच लगातार राजनीतिक टकराव बढ़ रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया से पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का खतरा पैदा हो सकता है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इस संबंध में पारदर्शिता तथा मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।

दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची में गलत या अपात्र नामों की पहचान करना निष्पक्ष चुनाव के लिए आवश्यक है। पार्टी विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताते हुए चुनाव आयोग की प्रक्रिया का समर्थन कर रही है।

हालांकि, मतदाता सूची का पुनरीक्षण करते समय यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से न हटे। नियमानुसार मतदाताओं को अपना पक्ष रखने, दस्तावेज प्रस्तुत करने और निर्धारित प्रक्रिया के तहत आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलना चाहिए।

भोपाल में आयोजित रैली भाजपा के देशव्यापी 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान का हिस्सा थी। पार्टी ने विभिन्न राज्यों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर विपक्ष के चुनाव आयोग संबंधी आरोपों का राजनीतिक जवाब देने की रणनीति बनाई है।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के बरेली में भी जेपी नड्डा ने इसी अभियान के तहत कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधा था। वहां भी उन्होंने चुनाव आयोग के प्रति अविश्वास पैदा करने का आरोप लगाया था।

फिलहाल SIR को लेकर राजनीतिक विवाद थमता दिखाई नहीं दे रहा है। भाजपा इसे मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी पारदर्शिता से जोड़ रही है, जबकि विपक्ष मतदाताओं के अधिकारों और प्रक्रिया की निष्पक्षता का मुद्दा उठा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस विषय पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

भोपाल की रैली से जेपी नड्डा ने स्पष्ट संकेत दिया कि भाजपा चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के समर्थन में अपना अभियान जारी रखेगी। वहीं, विपक्ष भी इस मुद्दे पर सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगने के अपने रुख पर कायम है।

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