MP कांग्रेस में अंदरूनी विवाद तेज, भेरूसिंह के आरोपों से सियासत गरम

Update: 2026-07-17 16:05 GMT

Bhopal भोपाल :   मध्य प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद एक बार फिर सामने आ गए हैं। आगर मालवा जिले की सुसनेर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक भेरूसिंह परिहार ने अपनी ही पार्टी के प्रदेश नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए संगठन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। विधायक के बयान के बाद प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

भेरूसिंह परिहार ने आरोप लगाया कि प्रदेश की जनता कांग्रेस की सरकार बनाना चाहती है, लेकिन भोपाल में बैठे कुछ नेता ही पार्टी को सत्ता में आने से रोक रहे हैं। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम लोगों में पार्टी के प्रति समर्थन मौजूद है, लेकिन संगठन स्तर पर सही तालमेल नहीं होने के कारण पार्टी को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कांग्रेस विधायक ने प्रदेश नेतृत्व पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिस विधानसभा क्षेत्र से वह विधायक हैं, वहां पार्टी की ओर से कार्यकर्ताओं की बैठक आयोजित की गई, लेकिन उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने इसे जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ताओं के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताते हुए नाराजगी जाहिर की।

परिहार ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की मजबूती के लिए संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर काम करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को कई बार नजरअंदाज किया जाता है, जिससे संगठन कमजोर होता है।

उन्होंने कहा कि विधायक होने के नाते क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और जनता से उनका सीधा जुड़ाव है। ऐसे में यदि पार्टी के कार्यक्रमों में स्थानीय नेतृत्व को शामिल नहीं किया जाता तो इससे कार्यकर्ताओं में निराशा पैदा होती है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से इस तरह की स्थिति में सुधार करने की मांग की।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस लंबे समय से संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी ने जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने और कार्यकर्ताओं को जोड़ने की रणनीति बनाई है। हालांकि, समय-समय पर नेताओं के बीच मतभेद और बयानबाजी सामने आती रही है।

भेरूसिंह परिहार के इस बयान को भी पार्टी के अंदर चल रही खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी तैयारियों के बीच इस तरह के बयान कांग्रेस के लिए चुनौती पैदा कर सकते हैं। पार्टी नेतृत्व के सामने अब संगठन में एकजुटता बनाए रखने की चुनौती है।

वहीं, विधायक के बयान के बाद कांग्रेस के अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया का इंतजार है। अभी तक प्रदेश नेतृत्व की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, माना जा रहा है कि पार्टी अंदरूनी स्तर पर इस मामले को लेकर चर्चा कर सकती है।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए संगठन को मजबूत करने पर जोर दे रही है। ऐसे समय में एक विधायक द्वारा अपने ही नेतृत्व पर सवाल उठाना पार्टी के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। अब देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस मामले को किस तरह संभालता है और पार्टी के अंदर बढ़ रही नाराजगी को कैसे दूर करता है।

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