इंदौर का ठोस कचरा प्रबंधन मॉडल बनेगा राष्ट्रीय उदाहरण, नए नियमों में शामिल होंगे कई प्रावधान
इंदौर : देश में स्वच्छता के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके इंदौर के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (ठोस कचरा प्रबंधन) मॉडल को अब राष्ट्रीय स्तर पर एक उदाहरण के रूप में देखा जाएगा। इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे ‘सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026’ के कई प्रावधान इंदौर नगर निगम (IMC) की सफाई व्यवस्था और कचरा प्रबंधन के तरीकों से प्रेरित हैं।
शहर के एक होटल में आयोजित डिविजन-लेवल क्षमता निर्माण कार्यशाला को संबोधित करते हुए मेयर भार्गव ने कहा कि इंदौर ने कई ऐसे उपाय पहले ही लागू कर दिए हैं, जिन्हें अब प्रस्तावित राष्ट्रीय दिशानिर्देशों में शामिल करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि इंदौर का अनुभव यह साबित करता है कि बेहतर योजना, जनभागीदारी और प्रभावी प्रबंधन के माध्यम से शहर की सफाई व्यवस्था को नई ऊंचाई तक पहुंचाया जा सकता है।
मेयर ने कहा कि इंदौर नगर निगम जल्द ही प्रस्तावित नए दिशानिर्देशों के अन्य प्रावधानों को भी लागू करेगा। इसका उद्देश्य शहर के मौजूदा कचरा प्रबंधन सिस्टम को और अधिक मजबूत, आधुनिक और प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ ठोस कचरा प्रबंधन में नई तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना जरूरी है, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
कार्यशाला का आयोजन मध्य प्रदेश शहरी विकास एवं आवास विभाग ने भारत सरकार और फीडबैक फाउंडेशन के सहयोग से किया था। इस एक दिवसीय कार्यक्रम में इंदौर संभाग के 55 शहरी स्थानीय निकायों के 250 से अधिक निर्वाचित प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का समन्वय अजय सिन्हा ने किया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शहरी निकायों के प्रतिनिधियों को ठोस कचरा प्रबंधन के आधुनिक तरीकों, नई नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन की जानकारी देना था। इसमें विशेषज्ञों ने कचरे के वैज्ञानिक निपटान, कचरा पृथक्करण, पुनर्चक्रण, संसाधन प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने से जुड़े विषयों पर चर्चा की।
इंदौर की सफाई व्यवस्था पिछले कई वर्षों से देशभर में चर्चा का विषय रही है। शहर ने घर-घर कचरा संग्रहण, गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण, कचरे के वैज्ञानिक निपटान और नागरिकों की भागीदारी जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम किया है। यही कारण है कि इंदौर मॉडल को देश के अन्य शहरों के लिए एक अनुकरणीय व्यवस्था के रूप में देखा जाता है।
मेयर भार्गव ने कहा कि किसी भी शहर को स्वच्छ बनाए रखने के लिए केवल प्रशासनिक प्रयास पर्याप्त नहीं होते, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी होती है। इंदौर में लोगों को स्वच्छता अभियान से जोड़ने के लिए लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए, जिसका सकारात्मक परिणाम देखने को मिला।
उन्होंने कहा कि ठोस कचरा प्रबंधन अब केवल सफाई का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सतत विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है। इसलिए आने वाले समय में शहरों को कचरे के उत्पादन से लेकर उसके निपटारे तक पूरी प्रक्रिया को वैज्ञानिक तरीके से संचालित करना होगा।
कार्यशाला में मौजूद प्रतिनिधियों को बताया गया कि आधुनिक कचरा प्रबंधन व्यवस्था में कचरे को कम करना, पुन: उपयोग बढ़ाना और पुनर्चक्रण को प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है। इसके अलावा लैंडफिल पर निर्भरता कम करने और कचरे से उपयोगी संसाधन तैयार करने पर भी जोर दिया गया।
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण ठोस कचरे का प्रबंधन बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में इंदौर जैसे शहरों के सफल मॉडल से सीख लेकर अन्य नगर निकाय भी अपनी व्यवस्थाओं में सुधार कर सकते हैं।
मेयर ने कहा कि इंदौर लगातार स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नए प्रयोग करता रहेगा। उन्होंने बताया कि नगर निगम भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कचरा प्रबंधन प्रणाली में नई तकनीकों को शामिल करने की दिशा में काम कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026 के अनुरूप शहर की व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाएगा। इससे कचरे के संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और निपटान की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।
कार्यशाला में शामिल शहरी निकायों के प्रतिनिधियों ने भी इंदौर मॉडल को समझने में रुचि दिखाई। उनका उद्देश्य अपने-अपने क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए इंदौर के अनुभवों और तकनीकों का उपयोग करना है।