Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : भोपाल स्थित आईसीएमआर-भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (ICMR-BMHRC) में हॉस्पिटल इन्फेक्शन कंट्रोल टीम की ओर से सांप के काटने को लेकर एक विशेष लेक्चर सीरीज आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों में सांप के काटने के मामलों में तुरंत और सही कदम उठाने को लेकर जागरूकता बढ़ाना था।
इस अवसर पर पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. ललित कुमार ने सांप के काटने के बाद फर्स्ट एड, मरीज की देखभाल और समय पर अस्पताल पहुंचाने के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सांप के काटने की स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत सही कदम उठाना बेहद जरूरी है, क्योंकि समय पर इलाज मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
डॉ. ललित कुमार ने बताया कि मानसून के मौसम में सांप के काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। बारिश के दौरान सांप अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं और इंसानों के संपर्क में आने की संभावना अधिक हो जाती है। ऐसे समय में लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होती है।
उन्होंने जानकारी दी कि दुनिया में सांपों की लगभग 300 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं, लेकिन इनमें से करीब 50 प्रजातियां ही जहरीली होती हैं। भारत में सांप के काटने से होने वाली गंभीर घटनाओं में चार प्रमुख जहरीले सांपों की भूमिका सबसे अधिक होती है। इनमें कोबरा, कॉमन क्रेट, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर शामिल हैं।
विशेषज्ञ ने बताया कि इन जहरीले सांपों के काटने से शरीर पर अलग-अलग प्रकार के प्रभाव पड़ सकते हैं। कुछ सांपों का जहर न्यूरोटॉक्सिक होता है, जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है और सांस लेने में परेशानी पैदा कर सकता है। वहीं कुछ सांपों का जहर हीमोटॉक्सिक होता है, जिससे खून से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में मायोटॉक्सिक प्रभाव भी देखने को मिलता है, जिससे मांसपेशियों को नुकसान पहुंच सकता है।
डॉ. ललित कुमार ने सांप के काटने के बाद किए जाने वाले पारंपरिक उपायों और अंधविश्वासों से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कई बार लोग झाड़-फूंक, घरेलू उपचार या धार्मिक मान्यताओं से जुड़े तरीकों में समय गंवा देते हैं, जिससे मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है। सांप के काटने के बाद सबसे जरूरी कदम तुरंत चिकित्सा सहायता लेना है।
उन्होंने कहा कि पीड़ित व्यक्ति को शांत रखना चाहिए और उसे ज्यादा हिलने-डुलने नहीं देना चाहिए। ज्यादा गतिविधि करने से जहर शरीर में तेजी से फैल सकता है। इसलिए मरीज को स्थिर स्थिति में रखते हुए जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए।
लेक्चर के दौरान उन्होंने बताया कि सांप काटने की स्थिति में घाव को काटना, जहर चूसने की कोशिश करना, कसकर पट्टी बांधना या किसी तरह का घरेलू प्रयोग करना नुकसानदायक हो सकता है। इसके बजाय मरीज को सुरक्षित तरीके से अस्पताल पहुंचाना और डॉक्टरों द्वारा सुझाए गए इलाज को प्राथमिकता देना चाहिए।
कार्यक्रम में स्वास्थ्यकर्मियों और कर्मचारियों को भी सांप के काटने से जुड़े मामलों में मरीजों की शुरुआती देखभाल और आपातकालीन प्रबंधन के बारे में जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने कहा कि जागरूकता और सही समय पर इलाज ही सांप के काटने से होने वाली मौतों को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
आईसीएमआर-BMHRC की हॉस्पिटल इन्फेक्शन कंट्रोल टीम ने इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों को स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। टीम का उद्देश्य लोगों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाना और आपात स्थिति में सही निर्णय लेने के लिए तैयार करना है।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर भी जोर दिया कि ग्रामीण और बारिश प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सांपों से बचाव के उपायों की जानकारी होनी चाहिए। घरों के आसपास साफ-सफाई रखना, अंधेरे स्थानों पर सावधानी से चलना और रात के समय सतर्क रहना सांप के काटने के खतरे को कम कर सकता है।
डॉ. ललित कुमार ने अंत में कहा कि सांप का काटना एक मेडिकल इमरजेंसी है और इसमें हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। सही फर्स्ट एड, मरीज को शांत रखना और जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना ही जीवन बचाने का सबसे बड़ा उपाय है।