वेस्टर्न रिंग रोड प्रोजेक्ट से प्रभावित किसानों के लिए हेल्प डेस्क शुरू
इंदौर। वेस्टर्न रिंग रोड प्रोजेक्ट से प्रभावित किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। किसानों को जमीन अधिग्रहण, मुआवजा और अन्य प्रक्रियाओं से जुड़ी परेशानियों के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए एक विशेष समन्वय टीम का गठन किया गया है। साथ ही हातोद तहसील कार्यालय में एक डेडिकेटेड हेल्प डेस्क भी शुरू की गई है।
प्रशासन का उद्देश्य किसानों को एक ही स्थान पर सभी जरूरी जानकारी और सहायता उपलब्ध कराना है। इस पहल के माध्यम से जमीन अधिग्रहण, मुआवजा वितरण, दस्तावेजों से जुड़ी समस्याओं और प्रोजेक्ट से संबंधित अन्य मामलों का जल्द समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
हातोद के सब-डिविजनल रेवेन्यू ऑफिसर (SDO) राजेश सिंह ने बताया कि यह व्यवस्था किसानों के लिए सिंगल पॉइंट ऑफ कॉन्टैक्ट के रूप में काम करेगी। इससे किसानों को अपनी समस्याएं दर्ज कराने और उनके समाधान की प्रक्रिया को समझने में आसानी होगी।
उन्होंने कहा कि कई बार बड़े विकास प्रोजेक्ट के दौरान जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामलों में किसानों को जानकारी के अभाव या विभागों के बीच तालमेल की कमी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह विशेष व्यवस्था बनाई है।
वेस्टर्न रिंग रोड प्रोजेक्ट एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना है, जिससे क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और विकास को गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में कई किसान सीधे प्रभावित हो रहे हैं। उनकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाया है।
विशेष समन्वय टीम में राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अधिकारी और संबंधित प्रोजेक्ट क्षेत्र के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। टीम किसानों की शिकायतों की समीक्षा करेगी और संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर उनका समाधान कराएगी।
हेल्प डेस्क पर अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों की भी तैनाती की गई है। इसका उद्देश्य उन मामलों को जल्द निपटाना है जिनमें एक से अधिक विभागों की भूमिका होती है। इससे आवेदन और शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तेज हो सकेगी।
प्रशासन के अनुसार, किसान अब जमीन अधिग्रहण की स्थिति, मुआवजे से जुड़े मामलों, दस्तावेजों की जांच और अन्य आवश्यक जानकारी के लिए सीधे हेल्प डेस्क से संपर्क कर सकेंगे। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को सही जानकारी समय पर मिल सकेगी।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि विकास परियोजनाओं में प्रभावित लोगों की समस्याओं का समाधान करना बेहद जरूरी है। किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
किसानों की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाएगा और संबंधित अधिकारियों को समय सीमा के भीतर समाधान के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की कोशिश है कि परियोजना से जुड़े कार्य भी सुचारु रूप से आगे बढ़ें और प्रभावित किसानों को किसी तरह की अनावश्यक परेशानी न हो।
हेल्प डेस्क शुरू होने से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। पहले जहां उन्हें अलग-अलग विभागों में जाकर जानकारी जुटानी पड़ती थी, वहीं अब एक ही स्थान पर उनकी समस्याओं का समाधान किया जा सकेगा।
जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी समस्याओं और आवश्यक दस्तावेजों के साथ हेल्प डेस्क पर संपर्क करें। अधिकारियों का कहना है कि किसानों के सहयोग से ही परियोजना को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकता है।
वेस्टर्न रिंग रोड प्रोजेक्ट को लेकर प्रशासन और संबंधित एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं। नई समन्वय व्यवस्था के जरिए अब प्रभावित किसानों और परियोजना एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।