इंदौर। मालवीय नगर से गांधी नगर के बीच शुरू हुई मेट्रो सेवा को यात्रियों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। 6 सितंबर को सेवा शुरू होने के बाद शुरुआती 24 दिनों में 60 हजार से अधिक यात्रियों ने इस कॉरिडोर का इस्तेमाल किया है। इस दौरान मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को 26 लाख रुपये से अधिक की आय भी हुई है। लगातार बढ़ती यात्री संख्या से यह संकेत मिल रहा है कि शहर के पश्चिमी हिस्सों और सुपर कॉरिडोर की ओर रोजाना यात्रा करने वाले लोगों के लिए मेट्रो एक उपयोगी विकल्प बनती जा रही है।
मालवीय नगर-गांधी नगर कॉरिडोर खास तौर पर विजय नगर, सुपर कॉरिडोर, गांधी नगर और एयरपोर्ट क्षेत्र की ओर आने-जाने वाले कर्मचारियों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। इन इलाकों में बड़ी संख्या में दफ्तर, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और रोजगार केंद्र हैं। पहले इन क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए यात्रियों को सड़क मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब मेट्रो से यात्रा का समय अधिक निर्धारित और नियमित हो गया है।
यात्रियों का कहना है कि मेट्रो सेवा से उन्हें समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है। सड़क पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ने की स्थिति में यात्रा का समय कई बार अनिश्चित हो जाता है। इसके विपरीत मेट्रो तय समय और निर्धारित रूट पर चलती है, जिससे कार्यालय जाने वाले लोगों के लिए रोजाना का सफर अधिक सुविधाजनक हो गया है।
मालवीय नगर से गांधी नगर तक मेट्रो का किराया 65 रुपये रखा गया है। इसी दूरी पर दूसरे परिवहन साधनों की तुलना की जाए तो यात्रियों को ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। ऑनलाइन उपलब्ध अनुमान के अनुसार इसी रूट पर रैपिडो बाइक का किराया करीब 150 रुपये, ऑटो का किराया लगभग 250 रुपये और कैब से सफर करीब 310 रुपये तक पड़ सकता है। हालांकि इन सेवाओं का वास्तविक किराया समय, मांग और ट्रैफिक की स्थिति के अनुसार बदल सकता है।
यात्रियों के लिए मेट्रो का सबसे बड़ा फायदा नियमित किराया और निश्चित यात्रा समय है। रोजाना आने-जाने वाले कर्मचारियों के लिए परिवहन पर होने वाला खर्च महीने के बजट का बड़ा हिस्सा बन सकता है। ऐसे में 65 रुपये का किराया कई यात्रियों को दूसरे साधनों की तुलना में सस्ता विकल्प लग रहा है।
मेट्रो का उपयोग करने वाली यात्री रोशी सोलंकी ने बताया कि सड़क मार्ग से यात्रा के दौरान ट्रैफिक के कारण कई बार समय पर पहुंचना मुश्किल हो जाता था। अचानक जाम लगने या वाहनों की लंबी कतार के कारण सफर का समय बढ़ जाता था। मेट्रो सेवा शुरू होने के बाद उन्हें यात्रा की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल रही है।
इसी तरह नोमी चौहान ने भी मेट्रो के सफर को अधिक भरोसेमंद बताया। उनका कहना है कि सड़क मार्ग पर यात्रा के दौरान यह तय करना मुश्किल होता है कि किसी स्थान तक पहुंचने में कितना समय लगेगा। मेट्रो में निर्धारित समय होने के कारण ऑफिस या अन्य जरूरी कामों के लिए समय पर पहुंचना आसान हो जाता है।
मालवीय नगर-गांधी नगर कॉरिडोर से सुपर कॉरिडोर क्षेत्र को भी सीधा फायदा मिल रहा है। यह क्षेत्र तेजी से रोजगार और व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। यहां बड़ी संख्या में आईटी और अन्य कंपनियों से जुड़े कर्मचारी रोजाना आते-जाते हैं। मेट्रो सेवा से इन कर्मचारियों के लिए सार्वजनिक परिवहन का एक और विकल्प उपलब्ध हो गया है।
गांधी नगर और एयरपोर्ट क्षेत्र की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए भी यह सेवा महत्वपूर्ण है। शहर के प्रमुख हिस्सों से एयरपोर्ट की दिशा में सड़क यातायात कई बार व्यस्त रहता है। मेट्रो कॉरिडोर के उपयोग से यात्री कम से कम यात्रा के एक बड़े हिस्से को तय समय में पूरा कर सकते हैं।
पहले 24 दिनों में 60 हजार से अधिक यात्रियों का आंकड़ा मेट्रो के प्रति लोगों की बढ़ती दिलचस्पी को दिखाता है। इस अवधि में 26 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई भी हुई है। हालांकि मेट्रो जैसे बड़े सार्वजनिक परिवहन प्रोजेक्ट का मूल्यांकन केवल शुरुआती आय के आधार पर नहीं किया जाता। इसका बड़ा उद्देश्य शहर में बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करना और निजी वाहनों पर निर्भरता कम करना भी है।
यात्री संख्या बढ़ने से आने वाले समय में मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी, स्टेशन सुविधाओं और यात्रियों की जरूरतों के अनुसार सेवाओं में बदलाव करने में मदद मिल सकती है। यदि दैनिक यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ती है तो इस कॉरिडोर पर सार्वजनिक परिवहन का दबाव और उपयोग दोनों बढ़ सकते हैं।
मेट्रो से सड़क यातायात पर भी असर पड़ने की उम्मीद है। अगर बड़ी संख्या में लोग रोजाना निजी कार, बाइक, ऑटो या कैब की जगह मेट्रो चुनते हैं तो प्रमुख सड़कों पर वाहनों की संख्या कम करने में मदद मिल सकती है। इससे ट्रैफिक जाम और ईंधन खपत में भी कमी आ सकती है।
शहर में मेट्रो का नेटवर्क जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, अलग-अलग इलाकों को जोड़ने की क्षमता भी बढ़ेगी। फिलहाल मालवीय नगर से गांधी नगर के बीच की सेवा ने शुरुआती दिनों में ही बड़ी संख्या में यात्रियों को आकर्षित किया है। नौकरीपेशा लोगों के साथ अन्य यात्रियों के बीच भी इसे सुविधाजनक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
पहले 24 दिनों की यात्री संख्या और आय के आंकड़े से यह साफ है कि मालवीय नगर-गांधी नगर मेट्रो कॉरिडोर धीरे-धीरे शहर के रोजमर्रा के यातायात का हिस्सा बन रहा है। समय की बचत, निर्धारित किराया और ट्रैफिक से बचने की सुविधा इसे खास तौर पर दैनिक यात्रियों के लिए उपयोगी बना रही है। आने वाले दिनों में यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ इस कॉरिडोर की उपयोगिता और स्पष्ट हो सकती है।