चंदाना : मध्य प्रदेश के देवास जिले के चंदाना और बिंजाना गांवों में हुई संदिग्ध मौतों के मामले में पुलिस की जांच ने चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। पुलिस के मुताबिक, नकली शराब बनाने और बेचने वाले गिरोह के एक प्रमुख आरोपी अजय राठौर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से घर पर शराब बनाने की जानकारी जुटाई थी। इसके बाद इंदौर की एक निजी फर्म से केमिकल मंगवाया गया और कबाड़ियों से शराब की पुरानी खाली बोतलें खरीदी गईं। आरोप है कि इन बोतलों में नकली शराब भरकर उसे असली शराब के साथ मिलाकर ग्रामीण इलाकों में बेचा गया। चंदाना, बिंजाना और आसपास के क्षेत्रों में 13 संदिग्ध मौतों की खबरों के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। मामले में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है। हालांकि, सभी मौतों का संबंध जहरीली शराब से होने की आधिकारिक पुष्टि फोरेंसिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
AI से खोजा नकली शराब बनाने का तरीका, पूछताछ में बड़ा खुलासा
देवास कोतवाली थाना प्रभारी शशिकांत चौरसिया के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी अजय राठौर सितंबर 2026 से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से घर पर शराब बनाने के तरीकों के बारे में जानकारी जुटा रहा था।पुलिस की शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी ने इंटरनेट और एआई से मिली जानकारी के आधार पर नकली शराब तैयार करने की योजना बनाई।इसके बाद उसने अपने साथियों के साथ मिलकर इस अवैध कारोबार को अंजाम देने की तैयारी शुरू की।पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने सामान्य शराब जैसी दिखने वाली मिलावटी शराब तैयार की, ताकि ग्राहकों को आसानी से असली और नकली उत्पाद के बीच अंतर समझ में न आए।इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियां आरोपियों के मोबाइल फोन, डिजिटल गतिविधियों और आपसी संपर्कों की भी जांच कर रही हैं।
इंदौर के दवा बाजार से मंगवाया गया केमिकल
पुलिस जांच में नकली शराब के लिए इस्तेमाल किए गए रसायन की आपूर्ति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी सामने आई है।रिपोर्ट्स के अनुसार, अजय राठौर ने इंदौर के दवा बाजार से जुड़ी एक निजी फर्म के माध्यम से केमिकल मंगवाया था।इस रसायन की आपूर्ति महावीर मार्केट और लोहा मंडी क्षेत्र से जुड़े गोदाम के माध्यम से होने की जानकारी सामने आई है।पुलिस ने संबंधित फर्म के कार्यालय और गोदाम पर कार्रवाई करते हुए उन्हें सील कर दिया है।
जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि केमिकल किस उद्देश्य से खरीदा गया था और उसकी आपूर्ति में किसी अन्य व्यक्ति की आपराधिक भूमिका थी या नहीं।फिलहाल पुलिस ने इस्तेमाल किए गए रसायन की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। बरामद सामग्री की वैज्ञानिक जांच से उसकी प्रकृति और संभावित खतरों का पता चलेगा।
कबाड़ियों से खरीदी पुरानी बोतलें, लाइसेंसी शराब की आड़ में बिक्री
पुलिस के अनुसार, गिरोह ने नकली शराब को बाजार में बेचने के लिए पुरानी शराब की बोतलों का इस्तेमाल किया।आरोपियों ने अक्टूबर के शुरुआती दिनों में कबाड़ियों से लाइसेंसी शराब की खाली बोतलें हासिल की थीं।जांच में पता चला है कि नकली शराब को असली शराब की बोतलों में भरकर लाइसेंसी शराब की पेटियों में रखा गया।
इसके बाद इन्हें ग्रामीण इलाकों में बिक्री के लिए पहुंचाया गया।
पुलिस के अनुसार, 6 से 12 अक्टूबर के बीच चंदाना, बिंजाना और आसपास के क्षेत्रों में मिलावटी शराब की बिक्री किए जाने के साक्ष्य सामने आए हैं।आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में गिरोह के अन्य सदस्यों ने भी सहयोग किया।जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि कितनी मात्रा में नकली शराब तैयार की गई थी और किन-किन स्थानों पर उसकी सप्लाई हुई।
10 आरोपी गिरफ्तार, शराब दुकानों के कर्मचारी भी शामिल
देवास पुलिस ने 26 अक्टूबर को कार्रवाई करते हुए अवैध शराब के मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया था।गिरफ्तार आरोपियों में देवास और इंदौर जिलों की तीन लाइसेंसी शराब दुकानों के दो प्रबंधक और दो सेल्समैन भी शामिल हैं।पुलिस का आरोप है कि इन कर्मचारियों ने गिरोह को असली शराब की अवैध आपूर्ति की थी, जिसका इस्तेमाल नकली शराब के कारोबार में किया गया।कार्रवाई के दौरान पुलिस ने छह पेटी देशी शराब, एक कार, मोबाइल फोन और नकदी सहित करीब 7.25 लाख रुपये मूल्य की सामग्री जब्त की थी।पुलिस ने संबंधित एफआईआर में आबकारी अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई आगे बढ़ाई है।वहीं, शराब दुकान से जुड़े दो अन्य कर्मचारियों की भूमिका सामने आने के बाद उनकी तलाश की जा रही है।
13 संदिग्ध मौतों से दहला इलाका, जांच रिपोर्ट का इंतजार
देवास जिले के चंदाना और बिंजाना गांवों में पिछले कुछ सप्ताह के दौरान कई लोगों की मौत हुई है।स्थानीय स्तर पर सामने आई रिपोर्ट्स में संदिग्ध मौतों का आंकड़ा 13 तक बताया गया है। ग्रामीणों ने आशंका व्यक्त की है कि इन मौतों का संबंध जहरीली शराब के सेवन से हो सकता है।हालांकि, पुलिस और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मौतों का वास्तविक कारण वैज्ञानिक जांच के बाद ही निर्धारित किया जा सकेगा।पुलिस ने दो मृतकों के विसरा नमूनों के साथ बरामद शराब और अन्य सामग्री को फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी भेजा है।जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि मृतकों ने किस स्थान से शराब खरीदी थी और क्या बरामद मिलावटी शराब का संबंध संबंधित घटनाओं से है।फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही संदिग्ध मौतों और नकली शराब के बीच संबंध की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।
कलेक्टर और एसपी का तबादला, तीन आबकारी अधिकारी निलंबित
देवास शराबकांड के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ी कार्रवाई हुई है।मध्य प्रदेश सरकार ने देवास के कलेक्टर ऋतुराज सिंह और पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोत का तबादला कर दिया है।इसके अलावा जिला आबकारी अधिकारी बसंती भूरिया सहित तीन आबकारी अधिकारियों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है।मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने उच्चस्तरीय जांच दल का गठन किया है।उज्जैन संभागायुक्त की ओर से गठित समिति प्रभावित गांवों में पहुंचकर मृतकों के परिवारों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज कर रही है।समिति को 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
नकली शराब के नेटवर्क की हर कड़ी खंगाल रही पुलिस
इस पूरे मामले ने अवैध शराब के कारोबार, रसायनों की आपूर्ति और लाइसेंसी दुकानों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी द्वारा एआई से जानकारी जुटाकर कथित तौर पर नकली शराब तैयार करने का मामला सामने आया है।विशेषज्ञों के अनुसार, बिना उचित नियंत्रण के तैयार मिलावटी शराब का सेवन जानलेवा हो सकता है। इसमें मौजूद अज्ञात रसायन गंभीर विषाक्तता पैदा कर सकते हैं।पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा था और क्या अन्य स्थानों पर भी नकली शराब की आपूर्ति की गई थी।फिलहाल मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियों की नजर फोरेंसिक रिपोर्ट और केमिकल आपूर्ति से संबंधित दस्तावेजों पर है।देवास शराबकांड में सामने आए इन खुलासों ने पूरे प्रदेश में अवैध शराब के कारोबार और उसकी निगरानी को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।