इंदौर। आईआईटी बॉम्बे के द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की 18 सितंबर को हुई मौत के मामले में अब आईआईटी इंदौर का फैकल्टी फोरम भी सामने आया है। फोरम ने छात्र की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उनके परिवार और आईआईटी बॉम्बे समुदाय के प्रति संवेदना जताई है। इसके साथ ही फोरम ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने और सार्वजनिक रूप से उन्हें जिम्मेदार ठहराए जाने को लेकर चिंता जताते हुए कहा है कि जिम्मेदारी का निर्धारण तथ्यों और उचित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए।

आईआईटी इंदौर फैकल्टी फोरम ने अपने बयान में छात्र हितों और शिक्षकों के लिए निष्पक्ष प्रक्रिया, दोनों पर जोर दिया। फोरम के अनुसार शैक्षणिक संस्थानों में ऐसा वातावरण होना चाहिए, जहां छात्र स्वयं को सुरक्षित और समर्थित महसूस करें तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सहायता मिल सके। साथ ही शिक्षकों द्वारा निर्धारित शैक्षणिक प्रक्रिया के तहत किए गए कार्यों का आकलन भी तथ्यों के आधार पर होना चाहिए।

फोरम ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के खिलाफ दर्ज एफआईआर का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी दुखद घटना से उत्पन्न पीड़ा अपने आप में किसी फैकल्टी सदस्य पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने का आधार नहीं हो सकती। फोरम का कहना है कि मामले में जिम्मेदारी उचित जांच और स्थापित तथ्यों के आधार पर तय होनी चाहिए, न कि अनुमान या सार्वजनिक दबाव के आधार पर। यह फोरम का पक्ष है; मामले में पुलिस जांच अभी जारी है।

साहिल वाकोडे आईआईटी बॉम्बे में बीटेक के द्वितीय वर्ष के छात्र थे। 18 सितंबर को उनकी मौत के बाद परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए और घटना को लेकर कई सवाल उठाए गए। साहिल के पिता ने प्रोफेसर डूला पर मानसिक उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए। इसके बाद पवई पुलिस ने संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज की। मामले की जांच बाद में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। आरोपों की सत्यता पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होगा।

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि 18 सितंबर को हुई एक परीक्षा से जुड़ी है। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार प्रोफेसर डूला उस परीक्षा में इनविजिलेटर थे। फैकल्टी पक्ष का कहना है कि परीक्षा के दौरान एक छात्र को अनधिकृत रूप से स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते देखा गया और इसके बाद संस्थान की निर्धारित शैक्षणिक प्रक्रिया के तहत कदम उठाए गए। छात्र पक्ष और परिवार की ओर से घटना के बाद की परिस्थितियों को लेकर अलग आरोप लगाए गए हैं, जिनकी जांच चल रही है।

आईआईटी इंदौर फैकल्टी फोरम ने इस संदर्भ में शिक्षकों को संस्थागत समर्थन दिए जाने की जरूरत भी बताई। फोरम का तर्क है कि अगर कोई फैकल्टी सदस्य सद्भावना से और संस्थान की स्थापित प्रक्रिया के अनुसार अपना दायित्व निभाता है तो जांच पूरी होने से पहले सार्वजनिक दबाव के आधार पर उसे दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। साथ ही फोरम ने छात्र कल्याण के महत्व को भी रेखांकित किया।

आईआईटी बॉम्बे के फैकल्टी फोरम ने भी इससे पहले प्रोफेसर डूला के समर्थन में बयान जारी किया था। फोरम ने कहा था कि डूला परीक्षा के दौरान संस्थान की सीनेट से मंजूर शैक्षणिक नीतियों के तहत अपना दायित्व निभा रहे थे। वहीं छात्रों के एक वर्ग ने प्रोफेसर की भूमिका को लेकर सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की मांग की। इस तरह मामले में छात्र समुदाय और फैकल्टी के कुछ हिस्सों के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं।

आईआईटी बॉम्बे ने मामले में प्रोफेसर डूला को उनकी डीन संबंधी प्रशासनिक जिम्मेदारी से अलग किया है। संस्थान ने कहा है कि मामले की परिस्थितियों की जांच जारी है। इस बीच छात्र समुदाय की ओर से कैंपस में बेहतर सहायता प्रणाली और जवाबदेही समेत कई मांगें उठाई गई हैं।

आईआईटी इंदौर फैकल्टी फोरम का बयान ऐसे समय सामने आया है, जब इस मामले को लेकर आईआईटी बॉम्बे परिसर से लेकर अकादमिक समुदाय तक बहस जारी है। एक ओर छात्र की मौत के कारणों और उससे पहले की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच की मांग है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों के एक वर्ग का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय नहीं की जानी चाहिए।

फोरम ने व्यापक रूप से छात्र कल्याण और फैकल्टी सदस्यों के लिए उचित प्रक्रिया दोनों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उसका कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिसमें विद्यार्थी जरूरत के समय बिना झिझक सहायता मांग सकें और शिक्षक भी निर्धारित नियमों के अनुसार अपना काम करते समय संस्थागत समर्थन महसूस करें।

फिलहाल साहिल वाकोडे की मौत से जुड़े मामले की जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है। प्रोफेसर डूला के खिलाफ दर्ज आरोप जांच के अधीन हैं और अदालत द्वारा दोष तय नहीं किया गया है। ऐसे में मामले में छात्र के परिवार के आरोप, छात्रों की चिंताएं और फैकल्टी फोरम का पक्ष—तीनों जांच प्रक्रिया के संदर्भ में देखे जा रहे हैं। आईआईटी इंदौर फैकल्टी फोरम ने इसी बीच निष्पक्ष प्रक्रिया पर जोर देते हुए कहा है कि अंतिम जिम्मेदारी प्रमाणित तथ्यों के आधार पर ही निर्धारित की जानी चाहिए।

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