इंदौर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने करीब 70 करोड़ रुपये के कथित मेफेड्रोन (MD) तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 90 लाख रुपये से अधिक मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। ये संपत्तियां हैदराबाद और मध्य प्रदेश के मंदसौर में स्थित बताई गई हैं। कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों के तहत की गई है।

ईडी के इंदौर सब-जोनल कार्यालय ने वेद प्रकाश व्यास, दिनेश अग्रवाल, अक्षय अग्रवाल और अन्य से संबंधित संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच करने का आदेश जारी किया है। एजेंसी को संदेह है कि आरोपियों का संबंध कथित मादक पदार्थ तस्करी, गैरकानूनी नकद लेनदेन और नशीले पदार्थों के कारोबार से प्राप्त अपराध की आय से है। इन आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होगा।

PMLA के तहत हुई कार्रवाई

ईडी ने मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच के दौरान अचल संपत्तियों को चिह्नित किया। इसके बाद PMLA के तहत उन्हें अस्थायी रूप से अटैच करने की कार्रवाई की गई।

जांच एजेंसी का दावा है कि मामले में कथित अपराध से अर्जित रकम और उससे जुड़ी संपत्तियों का पता लगाने के लिए आरोपियों तथा उनसे संबंधित वित्तीय लेनदेन की जांच की गई। इसी जांच के आधार पर हैदराबाद और मंदसौर में स्थित संपत्तियों पर कार्रवाई की गई है।

अस्थायी अटैचमेंट का मतलब संपत्ति के स्वामित्व पर अंतिम फैसला नहीं है। PMLA के तहत ऐसी कार्रवाई आगे की वैधानिक और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन रहती है।

इंदौर क्राइम ब्रांच की FIR बनी जांच का आधार

मनी लॉन्ड्रिंग की जांच इंदौर क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज एक एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। यह एफआईआर संदिग्धों और उनके कथित सहयोगियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत दर्ज की गई थी।

मूल मामले में मादक पदार्थों को अवैध रूप से रखने और उनकी कथित तस्करी से संबंधित आरोप लगाए गए हैं। ईडी ने इसी मामले में संभावित आर्थिक लेनदेन और अपराध से अर्जित आय की जांच शुरू की।

PMLA के तहत जांच में एजेंसी का मुख्य फोकस इस बात का पता लगाने पर रहता है कि कथित आपराधिक गतिविधियों से अर्जित रकम कहां गई और उसका इस्तेमाल किसी संपत्ति की खरीद या अन्य वित्तीय गतिविधियों में किया गया या नहीं।

70 करोड़ का मेफेड्रोन हुआ था जब्त

ईडी के मुताबिक, मूल नारकोटिक्स मामले में जब्त किए गए मेफेड्रोन की अनुमानित कीमत करीब 70 करोड़ रुपये बताई गई थी। एजेंसी का कहना है कि मामला एमडी ड्रग्स की कमर्शियल मात्रा को कथित रूप से अवैध तरीके से रखने और उसकी तस्करी से जुड़ा है।

मेफेड्रोन एक प्रतिबंधित सिंथेटिक मादक पदार्थ है और इससे जुड़े अपराधों पर NDPS कानून के तहत कार्रवाई की जाती है।

मामले में इतनी बड़ी मात्रा और अनुमानित कीमत के मादक पदार्थ की बरामदगी के बाद जांच एजेंसियों ने इसके पीछे सक्रिय लोगों और आर्थिक नेटवर्क की पड़ताल शुरू की थी।

आर्थिक नेटवर्क की जांच में जुटी ED

नारकोटिक्स मामलों में ईडी की जांच मादक पदार्थ की बरामदगी तक सीमित नहीं रहती। एजेंसी कथित तस्करी से होने वाली कमाई, उसके लेनदेन और संपत्तियों में निवेश से जुड़े पहलुओं की भी जांच करती है।

इस मामले में भी आरोपियों और कथित सहयोगियों से जुड़े बैंकिंग और अन्य वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मादक पदार्थों के कथित कारोबार से अर्जित रकम का इस्तेमाल किस तरह किया गया।

जांच के दौरान ऐसी संपत्तियों की पहचान की जाती है, जिनका संबंध कथित अपराध की आय से होने का संदेह हो। इसी प्रक्रिया के तहत 90 लाख रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया है।

नकद लेनदेन की भी पड़ताल

ईडी को मामले में गैरकानूनी नकद लेनदेन होने का भी संदेह है। जांच एजेंसी कथित रूप से ड्रग्स की बिक्री से प्राप्त नकदी के प्रवाह और उसके आगे इस्तेमाल से संबंधित जानकारी जुटा रही है।

जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित ड्रग नेटवर्क में रकम किस माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाई गई और क्या उस रकम को वैध आय के रूप में दिखाने की कोशिश की गई।

इसके लिए वित्तीय दस्तावेजों, संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

हैदराबाद और मंदसौर तक पहुंची जांच

मामले में अटैच की गई संपत्तियों का हैदराबाद और मध्य प्रदेश के मंदसौर में होना जांच के अलग-अलग स्थानों तक पहुंचने की ओर संकेत करता है। ईडी इन संपत्तियों के स्वामित्व, खरीद के लिए इस्तेमाल रकम और संबंधित व्यक्तियों के वित्तीय स्रोतों की जांच कर रही है।

वेद प्रकाश व्यास, दिनेश अग्रवाल और अक्षय अग्रवाल समेत अन्य लोगों से संबंधित संपत्तियों को जांच के दायरे में रखा गया है। हालांकि संबंधित व्यक्तियों पर लगे आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।

NDPS केस से जुड़ा मनी लॉन्ड्रिंग मामला

इंदौर क्राइम ब्रांच द्वारा NDPS एक्ट के तहत दर्ज मामले के बाद ईडी ने यह जांच शुरू की कि कथित ड्रग तस्करी से कोई अपराध की आय उत्पन्न हुई या नहीं। यदि ऐसी आय सामने आती है तो PMLA के तहत उससे जुड़ी संपत्तियों पर कार्रवाई की जा सकती है।

जांच एजेंसी का दावा है कि मामले में मादक पदार्थों की तस्करी के साथ वित्तीय लेनदेन की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसलिए कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों की आर्थिक गतिविधियों की जांच की जा रही है।

आगे भी जारी रहेगी जांच

90 लाख रुपये से अधिक की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच होने के बाद भी मामले की जांच जारी है। ईडी कथित अपराध की आय से जुड़ी अन्य संपत्तियों और लेनदेन का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

जांच के दौरान नए साक्ष्य सामने आने पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही मूल NDPS मामले की जांच भी संबंधित एजेंसी के स्तर पर जारी रहेगी।

फिलहाल ईडी की कार्रवाई में हैदराबाद और मंदसौर स्थित संपत्तियों को PMLA के तहत अस्थायी रूप से अटैच किया गया है। करीब 70 करोड़ रुपये मूल्य के मेफेड्रोन से जुड़े इस मामले में एजेंसियां कथित ड्रग तस्करी के साथ उससे जुड़े आर्थिक नेटवर्क और धन के प्रवाह की कड़ियां तलाश रही हैं। मामले में नामजद या जांच के दायरे में आए व्यक्तियों की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम फैसला अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।

Tags: