Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश में OBC वर्ग के लंबित आरक्षण लाभों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि OBC कोटा लागू करने की प्रक्रिया में बाधा डालने के लिए करीब 150 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने अपना विरोध और तेज कर दिया है।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने रविवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने OBC आरक्षण को लागू करने से रोकने के लिए भारी धनराशि खर्च की, जबकि अब उसे अपनी कथित गलतियों को सुधारने के लिए केवल 913 दिन बचे हैं। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया और सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया।
इसी बीच, OBC वर्ग के कई अभ्यर्थियों ने भोपाल के अंबेडकर पार्क में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि 27 प्रतिशत OBC आरक्षण को पूरी तरह लागू किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने एम्प्लॉयमेंट सिलेक्शन बोर्ड द्वारा विभिन्न परीक्षाओं में रोकी गई 13 प्रतिशत सीटों के परिणाम जल्द जारी करने की भी मांग की।
प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों ने कहा कि लंबे समय से आरक्षण से जुड़े लाभ अटके हुए हैं, जिससे उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की।
कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने यह भी आरोप लगाया कि अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील जानबूझकर पेश नहीं हुए। उनके अनुसार, सरकार OBC उम्मीदवारों को उनका हक नहीं देना चाहती, इसलिए कानूनी प्रक्रिया को भी प्रभावित किया गया।
पटवारी ने पूर्व सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार ने विधानसभा में OBC आरक्षण से संबंधित विधेयक पारित किया था और इसे राज्यपाल की मंजूरी भी मिल गई थी। लेकिन वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस प्रक्रिया का मजाक उड़ाते हुए इसे केवल एक “स्लिप पर लिखा बिल” बताया, जो कि लोकतांत्रिक निर्णय का अपमान है।
कांग्रेस का कहना है कि OBC वर्ग को उनका संवैधानिक अधिकार मिलना चाहिए और सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। पार्टी ने यह भी संकेत दिया है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
वहीं, सरकार की ओर से इस आरोप पर अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है।
यह मामला अब केवल आरक्षण नीति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्य की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है, जिस पर आने वाले दिनों में और तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।