मुंगेर से CM ने किया ‘पंचायत विकास शिविर’ का शुभारंभ

Update: 2026-06-28 10:25 GMT

Bihar बिहार: मुंगेर जिले के टेटिया बंबर प्रखंड से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रदेशव्यापी ‘पंचायत विकास शिविर’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने राज्य के विकास की दिशा और भविष्य की योजनाओं को लेकर विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की और अधिकारियों को स्पष्ट एवं सख्त निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम गांवों का सशक्तिकरण है, क्योंकि राज्य का वास्तविक विकास ग्रामीण क्षेत्रों के विकास से ही संभव है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जब गांव मजबूत और आत्मनिर्भर होंगे, तभी बिहार समृद्ध बनेगा और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की गति बढ़ाने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी गांव विकास की मुख्यधारा से पीछे न रह जाए।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को पूरे बिहार में ‘पंचायत विकास शिविर’ का आयोजन किया जाएगा। इन शिविरों के माध्यम से पंचायतों में चल रही योजनाओं की समीक्षा की जाएगी, छूटे हुए विकास कार्यों की पहचान की जाएगी और नई योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान दिया जाएगा। यह व्यवस्था पंचायत स्तर पर प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पंचायत विकास शिविर केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मंच होगा जहां ग्रामीण जनता की समस्याओं को सीधे सुना जाएगा और उनका समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। इस प्रक्रिया से प्रशासन और जनता के बीच की दूरी कम होगी तथा विकास योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ इन शिविरों में भाग लें और जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि बिहार सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर सफलतापूर्वक लागू करना है। उन्होंने कहा कि कई बार योजनाएं कागजों पर अच्छी होती हैं, लेकिन उनका लाभ वास्तविक रूप से लोगों तक नहीं पहुंच पाता। ऐसे में पंचायत विकास शिविर के माध्यम से इस अंतर को कम करने का प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, जल, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि हर पंचायत में विकास की समान गति सुनिश्चित हो ताकि किसी भी क्षेत्र में असमानता न रहे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आत्मनिर्भर बिहार की कल्पना तभी साकार हो सकती है जब हर गांव में रोजगार, शिक्षा और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों।

कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिया कि पंचायत स्तर पर सभी योजनाओं की नियमित निगरानी की जाए और समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जनता के प्रति जवाबदेही प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

इस मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी और ग्रामीण मौजूद थे। लोगों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यदि यह कार्यक्रम नियमित रूप से प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो इससे गांवों की समस्याओं का समाधान तेजी से हो सकेगा। ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह की पहल से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंच सकेगा और विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी दोहराया कि बिहार को विकास के पथ पर आगे बढ़ाने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार के क्षेत्र में लगातार सुधार किया जा रहा है। पंचायत विकास शिविर इसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो जमीनी स्तर पर बदलाव लाने में मदद करेगा।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याओं को समझें और उनका समाधान प्राथमिकता के आधार पर करें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विकास तभी संभव है जब प्रशासन और जनता मिलकर काम करें।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि पंचायत विकास शिविर बिहार के ग्रामीण विकास मॉडल को एक नई दिशा देगा और राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की प्रक्रिया को गति प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बिहार के हर गांव में विकास की नई तस्वीर देखने को मिलेगी।

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