शुरुआत के बाद ही सवालों में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा, बसों की हालत के वीडियो वायरल
भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू होने के कुछ ही समय बाद सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो ने बसों की स्थिति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो में कुछ बसों पर लगाई गई केसरिया रेडियम स्ट्रिप उखड़ती दिखाई दे रही है। इसके अलावा स्टीयरिंग, ब्रेक और ड्राइवर सीट के आसपास के हिस्सों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 25 सितंबर को भोपाल के भेल दशहरा मैदान में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा और पीएम ई-बस सेवा का शुभारंभ किया था। इस दौरान 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों को हरी झंडी दिखाई गई। पहले चरण में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड को इस परिवहन व्यवस्था से जोड़ा गया है।
शुभारंभ के अगले ही दिन सोशल मीडिया पर कुछ बसों की हालत दिखाने वाले वीडियो सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक सेवा के तहत रवाना की गई 351 बसों में 180 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें हैं, जबकि 171 पहले से शहरी क्षेत्रों में संचालित बसें हैं। वायरल वीडियो इन्हीं पुरानी सिटी बसों को नया स्वरूप देकर सेवा में शामिल किए जाने के दावों से जुड़ा है।
केसरिया रेडियम स्ट्रिप उखड़ने का वीडियो
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक बस पर लगी केसरिया रंग की रेडियम स्ट्रिप को हाथ से हटाते हुए दिखाया गया है। इसके बाद दावा किया जा रहा है कि पुरानी लाल सिटी बसों पर केसरिया रेडियम स्ट्रिप लगाकर उन्हें नया रूप दिया गया। वीडियो सामने आने के बाद बसों के बाहरी स्वरूप और उनकी वास्तविक स्थिति को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
वायरल सामग्री में केवल बसों के बाहरी हिस्से को लेकर ही सवाल नहीं उठाए गए हैं। कुछ वीडियो में स्टीयरिंग की खराब स्थिति, ब्रेक से जुड़ी समस्या और ड्राइवर की सीट के आसपास जंग लगे हिस्से दिखाए जाने का दावा किया गया है। इन वीडियो के आधार पर सोशल मीडिया पर लोग बसों की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
हालांकि सोशल मीडिया वीडियो में किए जा रहे सभी तकनीकी दावों की स्वतंत्र जांच की जानकारी अभी सामने नहीं आई है। इसलिए बसों के ब्रेक या अन्य यांत्रिक हिस्सों की वास्तविक तकनीकी स्थिति का निष्कर्ष केवल वायरल वीडियो के आधार पर नहीं निकाला जा सकता।
351 बसों के साथ शुरू हुई सेवा
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत बड़े स्तर पर की गई है। राज्य सरकार के अनुसार पहले चरण में कुल 351 बसों को सात शहरों के लिए रवाना किया गया। इनमें पीएम ई-बस सेवा की 180 इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य पहले वर्ष में करीब 1,500 बसों का संचालन करना और वर्ष 2031 तक यह संख्या 15 हजार तक पहुंचाना है।
नई परिवहन व्यवस्था में बसों की निगरानी के लिए तकनीक का इस्तेमाल भी किया जाना है। बसों में सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन और लाइव लोकेशन ट्रैकिंग जैसी सुविधाओं की बात कही गई है। कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से बसों के संचालन और समय पर निगरानी की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
सरकार ने इस सेवा को गांवों और शहरों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने तथा यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
गडकरी ने भी बसों की गुणवत्ता पर कही थी बात
शुभारंभ कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी बसों की गुणवत्ता को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने बस ऑपरेटरों से गुणवत्ता सुधारने को कहा था और अपेक्षित स्तर नहीं होने पर सख्त रुख अपनाने की बात कही थी।
ऐसे में कार्यक्रम के तुरंत बाद बसों की हालत से जुड़े वीडियो सामने आने से यह मुद्दा चर्चा में आ गया है। वायरल वीडियो में दिख रहे दृश्यों के बाद सार्वजनिक परिवहन सेवा में शामिल पुरानी बसों के रखरखाव और फिटनेस को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल किए जा रहे हैं।
21 साल बाद नए स्वरूप में लौटी परिवहन सेवा
मध्य प्रदेश में करीब 21 साल बाद सरकारी नियंत्रण वाली सार्वजनिक बस सेवा को नए स्वरूप में शुरू किया गया है। नई व्यवस्था के तहत बसों का संचालन निजी ऑपरेटर करेंगे, जबकि सरकार रूट, समयबद्धता और संचालन से संबंधित व्यवस्थाओं की निगरानी करेगी।
सरकार ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को सुरक्षित, आधुनिक और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के रूप में पेश किया है। इसके तहत आने वाले वर्षों में बसों की संख्या में बड़े स्तर पर वृद्धि करने की योजना है।
फिलहाल सेवा शुरू होने के तुरंत बाद सामने आए वीडियो ने पुरानी बसों के इस्तेमाल और उनकी स्थिति को लेकर बहस शुरू कर दी है। वीडियो में रेडियम स्ट्रिप उखड़ने और बसों के कुछ हिस्सों की खराब स्थिति के दावे सामने आए हैं। वहीं सेवा के तहत शामिल इलेक्ट्रिक बसें अलग श्रेणी की हैं और वायरल वीडियो में उठाए गए सवाल मुख्य रूप से पहले से संचालित सिटी बसों से जुड़े बताए जा रहे हैं।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि वायरल वीडियो में उठाए गए सवालों पर संबंधित विभाग या बस ऑपरेटर की ओर से क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है और बसों की तकनीकी स्थिति की जांच को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।