भोपाल: स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने कूनो नेशनल पार्क में नर चीता KNG-22 की हत्या के मामले में मुरैना के दो भाइयों को गिरफ्तार किया है। घटना में इस्तेमाल की गई लाइसेंसी डबल-बैरल बंदूक भी बरामद कर ली गई है।
STF के अनुसार, मुख्य आरोपी भगवान सिंह ने पूछताछ में कबूल किया कि वह 24 अक्टूबर को अपने भाई प्रीतम सिंह के साथ विजयपुर इलाके के नितनवास गांव के पास जंगल में शिकार करने गया था।
वहां एक चीता दिखने पर उसने अपनी लाइसेंसी बंदूक से उस पर
गोली चला दी
।
भगवान सिंह के बयान के आधार पर, STF ने मुरैना पुलिस की मदद से प्रीतम सिंह को हिरासत में ले लिया। बाद में, दोनों आरोपियों को पूछताछ के लिए घटना वाली जगह पर ले जाया गया।
उनकी निशानदेही पर, मुरैना वन प्रभाग के अंतर्गत आने वाले जंगल से लाइसेंसी डबल-बैरल बंदूक बरामद की गई। STF ने भगवान सिंह को 31 अक्टूबर को ही गिरफ्तार कर लिया था और विजयपुर (श्योपुर) कोर्ट में पेश किया था।
दो दिन की कस्टडी मिलने के बाद, पुलिस ने भगवान सिंह से पूछताछ की। उसने कबूल किया कि 24 अक्टूबर 2026 को वह अपने भाई प्रीतम सिंह के साथ शिकार करने के लिए नितनवास के पास जंगल में मौजूद था।
उसने यह भी माना कि उसने अपनी लाइसेंसी 'भरमार' बंदूक से चीते पर गोली चलाई थी। STF ने हथियार बरामद कर लिया है और उसकी जानकारी पर उसके भाई को भी गिरफ्तार कर लिया है।
STF ने दोनों भाइयों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (2022 में संशोधित) की धारा 9 और 51 के तहत मामला दर्ज किया है। अब तक की जांच में अवैध वन्यजीव व्यापार या किसी संगठित गिरोह से उनके जुड़े होने का कोई सबूत नहीं मिला है।
सोमवार को दोनों आरोपियों को विजयपुर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
इससे पहले, गोली लगने से चीते की मौत के बाद, ग्वालियर के मुख्य वन संरक्षक ने निगरानी और सुरक्षा में लापरवाही बरतने के आरोप में चार वन कर्मियों को निलंबित कर दिया था।
निलंबित कर्मचारियों में दो रेंजर, एक डिप्टी रेंजर और एक बीट गार्ड शामिल हैं। 25 अक्टूबर को श्योपुर वन प्रभाग के कंपार्टमेंट नंबर 748 में 19 महीने का नर चीता KNG-22 गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला।
जबलपुर के एक पशु चिकित्सा केंद्र में इलाज और सर्जरी के दौरान उसके शरीर से पांच छर्रे निकाले गए, लेकिन 27 अक्टूबर को चोटों के कारण उसकी मौत हो गई।
इस घटना के बाद राज्य सरकार ने चार सदस्यीय 'विशेष कार्य बल' (Special Task Force) का गठन किया, और केंद्र सरकार ने एक उच्च-स्तरीय टीम भेजी। यह टीम भारत में लगभग आठ दशकों में चीते को गोली मारे जाने की सामने आई पहली घटना की जांच करेगी।
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