Bandhavgarh : टाइगर रिजर्व में लापता कॉलर वाली बाघिन मिली

Update: 2026-07-13 05:05 GMT

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले कई दिनों से लापता चल रही कॉलर वाली बाघिन आखिरकार मिल गई है। रविवार को टाइगर रिजर्व की सर्च टीम ने कड़ी मेहनत के बाद बाघिन को सुरक्षित खोज निकाला। बाघिन के मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने राहत की सांस ली।

जानकारी के अनुसार, इस बाघिन को निगरानी के लिए रेडियो कॉलर लगाया गया था, जिसके कारण इसे ‘कॉलर वाली बाघिन’ के नाम से जाना जाता था। 1 जुलाई को अचानक उसका रेडियो कॉलर काम करना बंद हो गया था। इसके बाद से बाघिन की लोकेशन मिलनी बंद हो गई थी, जिससे वन विभाग की चिंता बढ़ गई थी।

वन अधिकारियों के मुताबिक, 1 जुलाई को दोपहर करीब 2 बजे के बाद बाघिन की कोई लोकेशन ट्रैक नहीं हो पा रही थी। रेडियो कॉलर से सिग्नल नहीं मिलने के कारण उसकी गतिविधियों पर नजर रखना मुश्किल हो गया था। ऐसे में उसकी सुरक्षा को लेकर अधिकारियों ने तुरंत खोज अभियान शुरू किया।

बाघिन की तलाश के लिए शुरुआत में पांच मजदूरों और एक बीट गार्ड की टीम बनाई गई। यह टीम उस इलाके में पहुंची, जहां बाघिन को अक्सर देखा जाता था। घने जंगल और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद टीम ने कई क्षेत्रों में जाकर उसकी तलाश की।

हालांकि, शुरुआती प्रयासों में टीम को सफलता नहीं मिली। इसके बाद वन विभाग ने सर्च ऑपरेशन को और बड़ा कर दिया। बाघिन को खोजने के लिए पांच-पांच सदस्यों वाली तीन अलग-अलग टीमें बनाई गईं। इन टीमों ने जंगल के अलग-अलग हिस्सों में जाकर बाघिन के पैरों के निशान, गतिविधियों और अन्य संकेतों की तलाश शुरू की।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। रेडियो कॉलर के जरिए वन विभाग बाघों की गतिविधियों पर नजर रखता है। जब किसी जानवर का कॉलर काम करना बंद कर देता है तो उसकी सुरक्षा को लेकर तुरंत सतर्कता बढ़ा दी जाती है।

कॉलर वाली बाघिन के लापता होने के बाद वन विभाग ने जंगल में गश्त बढ़ा दी थी। अधिकारियों ने संभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी और स्थानीय स्तर पर भी जानकारी जुटाई।

रविवार को सर्च टीम को आखिरकार सफलता मिली और बाघिन का पता चल गया। अधिकारियों ने बताया कि बाघिन सुरक्षित है और उसके स्वास्थ्य पर भी नजर रखी जा रही है। उसके मिलने के बाद राहत अभियान में शामिल टीमों ने राहत महसूस की।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जंगल में रहने वाले बाघों की सुरक्षा के लिए लगातार निगरानी जरूरी होती है। रेडियो कॉलर जैसी तकनीक से वन्यजीवों की गतिविधियों को समझने और उनके संरक्षण में मदद मिलती है।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख बाघ अभयारण्यों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में बाघ पाए जाते हैं और उनकी सुरक्षा के लिए वन विभाग की टीमें लगातार काम करती हैं। बाघों की संख्या और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए नियमित गश्त और निगरानी की जाती है।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, किसी बाघ या बाघिन की लोकेशन लंबे समय तक नहीं मिलने पर कई तरह की आशंकाएं पैदा हो जाती हैं। जंगल में प्राकृतिक खतरे, दूसरे वन्यजीवों से संघर्ष या किसी अन्य कारण से उनकी सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसलिए ऐसे मामलों में तुरंत सर्च ऑपरेशन चलाया जाता है।

कॉलर वाली बाघिन की तलाश में वन विभाग की टीमों ने जिस तरह से तेजी दिखाई, उसकी सराहना की जा रही है। समय रहते बाघिन के मिलने से किसी भी संभावित खतरे को टाला जा सका।

फिलहाल वन विभाग बाघिन की गतिविधियों और स्वास्थ्य की निगरानी कर रहा है। रेडियो कॉलर में आई तकनीकी खराबी को लेकर भी जांच की जा सकती है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में चलाए गए इस सर्च ऑपरेशन ने एक बार फिर दिखाया है कि वन्यजीव संरक्षण में तकनीक और वन विभाग की सतर्कता कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बाघिन के सुरक्षित मिलने से अधिकारियों के साथ-साथ वन्यजीव प्रेमियों में भी खुशी का माहौल है।

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