सागर। मध्य प्रदेश में चीता पुनर्स्थापना परियोजना ने बुधवार को एक और महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश किया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सागर जिले के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में कूनो नेशनल पार्क से लाए गए दो चीतों को छोड़ा। इसके साथ ही कूनो नेशनल पार्क और गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य के बाद वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व राज्य में चीतों का तीसरा आवास बन गया है।जंगल में छोड़े गए दोनों चीतों में एक नर और एक मादा शामिल हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नर चीते का नाम **‘व्योम’** और मादा चीते का नाम **‘नीरा’** रखा। दोनों को बुधवार को कूनो नेशनल पार्क से वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व लाया गया था। इसके बाद उन्हें रिजर्व की मुहली रेंज में तैयार किए गए विशेष क्षेत्र में छोड़ा गया।मुख्यमंत्री ने इस मौके को वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में चीता प्रोजेक्ट लगातार विस्तार कर रहा है और अब बुंदेलखंड क्षेत्र भी इस अभियान का हिस्सा बन गया है। उनके मुताबिक, चीतों के लिए नए और अनुकूल प्राकृतिक आवास विकसित करना वन्यजीव संरक्षण की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों के लिए लगभग 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। यहां सुरक्षित बाड़ों और निगरानी की व्यवस्था की गई है, ताकि नए वातावरण में चीतों के व्यवहार और स्वास्थ्य पर नजर रखी जा सके। अधिकारियों के मुताबिक रिजर्व में प्राकृतिक शिकार की उपलब्धता और अपेक्षाकृत कम मानवीय दबाव को भी इसकी उपयुक्तता के प्रमुख कारणों में माना गया।वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश के सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों के हिस्सों में फैला हुआ है। इसे नौरादेही और वीरांगना दुर्गावती अभयारण्यों को मिलाकर सितंबर 2023 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। इसका कोर क्षेत्र लगभग 1,414 वर्ग किलोमीटर है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कूनो और गांधीसागर के बाद अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में भी चीते मौजूद रहेंगे। उन्होंने इसे बुंदेलखंड के लिए विशेष उपलब्धि बताया और कहा कि आने वाले समय में यह क्षेत्र वन्यजीव पर्यटन के नए केंद्र के रूप में भी विकसित हो सकता हैमुख्यमंत्री ने इस अवसर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने एक निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में अपने कार्यकाल के 25 वर्ष पूरे किए हैं और इसी अवसर पर मध्य प्रदेश में चीता परियोजना एक नए चरण में पहुंची है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में मध्य प्रदेश से शुरू हुई चीता पुनर्स्थापना परियोजना अब लगातार विस्तार कर रही है।
भारत में चीता पुनर्स्थापना परियोजना की शुरुआत सितंबर 2022 में कूनो नेशनल पार्क से हुई थी। नामीबिया से लाए गए चीतों के पहले समूह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूनो में छोड़ा था। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका और बाद में अन्य अफ्रीकी देशों से भी चीते भारत लाए गए। इस परियोजना का उद्देश्य देश में दशकों पहले विलुप्त हो चुके चीतों की आबादी को फिर स्थापित करना है।हाल में कूनो नेशनल पार्क में पांच नए शावकों के जन्म के बाद भारत में चीतों की कुल संख्या 60 तक पहुंच गई है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे चीतों की है जिनका जन्म भारत में ही हुआ है। इस बढ़ती आबादी को देखते हुए नए आवासों की जरूरत भी बढ़ी है और इसी रणनीति के तहत गांधीसागर तथा वीरांगना दुर्गावती जैसे इलाकों को विकसित किया जा रहा है।
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को चीता आवास के रूप में विकसित करने की तैयारी काफी पहले शुरू कर दी गई थी। फरवरी 2025 में इसे कूनो और गांधीसागर के बाद संभावित तीसरे चीता आवास के रूप में अनुमति मिली थी। इसके बाद मई 2026 तक यहां चीता बाड़ों के स्थान का चयन और सुरक्षा से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की गईदोनों चीतों को सीधे विस्तृत खुले जंगल में छोड़ने के बजाय नियंत्रित क्षेत्र में रखा गया है, जहां वन विभाग की टीम उनके स्वास्थ्य, गतिविधियों और नए वातावरण में अनुकूलन पर निगरानी रखेगी। अधिकारियों के अनुसार चरणबद्ध तरीके से उन्हें बड़े प्राकृतिक क्षेत्र में जाने का अवसर दिया जाएगा।
इस कार्यक्रम का आयोजन वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन के मौके पर किया गया। इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने गिद्ध संख्या आकलन-2026 से जुड़ी रिपोर्ट भी जारी की। उन्होंने कहा कि राज्य में वन्यजीव संरक्षण के लिए बाघ, चीता, गिद्ध, घड़ियाल और अन्य प्रजातियों से जुड़ी योजनाओं पर एक साथ काम किया जा रहा है।वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों की मौजूदगी से बुंदेलखंड क्षेत्र में वन्यजीव पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना जताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर पर्यटन, होम स्टे, गाइड सेवाओं और अन्य गतिविधियों के जरिए रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है। हालांकि वन विभाग का प्राथमिक लक्ष्य फिलहाल चीतों को सुरक्षित वातावरण देना और नए क्षेत्र में उनके अनुकूलन को सुनिश्चित करना है।
मध्य प्रदेश पहले ही बाघों की बड़ी आबादी और कई संरक्षित वन क्षेत्रों के लिए जाना जाता है। अब लगातार तीसरे क्षेत्र में चीतों की मौजूदगी से राज्य की भूमिका भारत की चीता पुनर्स्थापना परियोजना में और मजबूत हुई है।‘व्योम’ और ‘नीरा’ को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में छोड़े जाने के साथ चीता प्रोजेक्ट ने मध्य प्रदेश में अपना भौगोलिक दायरा और बढ़ा लिया है। अब वन विभाग के सामने मुख्य चुनौती दोनों चीतों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और नए आवास में उनके सफल अनुकूलन की होगी। इस चरण की सफलता भविष्य में अन्य क्षेत्रों में चीता आबादी के विस्तार की दिशा भी तय कर सकती है।