धनतेरस पर महाकाल की एक घंटे तक होगी विशेष महापूजा
महाकाल मंदिर में दीपोत्सव की धूम, धनतेरस पर होगी विशेष पूजा
उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज से दीपोत्सव की शुरुआत होगी। धनतेरस के अवसर पर मंदिर के नंदी हॉल में परंपरानुसार विशेष महापूजा आयोजित की जाएगी। सुबह 9 बजे पूजा शुरू हो गई है। एक घंटे तक गणपति, महालक्ष्मी और भगवान महाकाल का पूजन-अभिषेक किया जाएगा। इस दौरान भगवान महाकाल को चांदी का सिक्का अर्पित करने के साथ धन कुबेर और चांदी के सिक्कों का भी पूजन किया जाएगा।
पुरोहित समिति के पुजारी वैभव आरोग्य और सुख-समृद्धि के साथ जनकल्याण एवं विश्व कल्याण की कामना से महापूजा करेंगे। पूजन की शुरुआत गणपति पूजन और महालक्ष्मी पूजन से होगी। इसके बाद भगवान महाकाल का पंचामृत पूजन और रुद्राभिषेक किया जाएगा। आयोजन में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा, मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक सहित पुजारी और पुरोहित शामिल होंगे।
पुरोहित समिति के अध्यक्ष लोकेश व्यास के अनुसार, धनतेरस पर होने वाला यह पूजन मंदिर की परंपरा का हिस्सा है। इसमें सभी के सुख, समृद्धि और आरोग्य के साथ विश्व कल्याण की प्रार्थना की जाएगी। महापूजा के साथ ही महाकाल मंदिर में दीपोत्सव के धार्मिक आयोजनों का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
चांदी के चंद्र-त्रिशूल और मुकुट से सजे बाबा महाकाल
धनतेरस पर आज तड़के 4 बजे भगवान महाकाल की भस्म आरती हुई। मंदिर के पट खुलने के बाद सभा मंडप में वीरभद्रजी के कान में स्वस्ति वाचन किया गया। घंटी बजाकर भगवान की आज्ञा ली गई और चांदी के पट खोले गए। इसके बाद पुजारियों ने गर्भगृह में भगवान का श्रृंगार उतारकर पूजन-अभिषेक की परंपरा निभाई। भगवान को हरिओम जल अर्पित करने के बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया।
पंचामृत पूजन के बाद कपूर आरती हुई। मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। इसके बाद ज्योतिर्लिंग को चांदी के चंद्र-त्रिशूल, शेषनाग के रजत मुकुट, रजत मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला से सजाया गया। भगवान को भांग, चंदन और ड्रायफ्रूट अर्पित किए गए। सुगंधित पुष्पों की मालाओं से अलंकरण कर फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया।
भस्म अर्पण के बाद निराकार से साकार रूप में दर्शन
भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। आरती के दौरान मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान में अपनी मनोकामनाएं व्यक्त कर बाबा महाकाल से सुख-समृद्धि की कामना की।