जबलपुर। शारदीय नवरात्रि के अवसर पर मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में इस बार देवी आराधना का भव्य आयोजन होने जा रहा है। चरगवां के पास स्थित सूखा (भरतपुर) गांव में 11 अक्टूबर से 12 दिवसीय नवरात्रि महोत्सव की शुरुआत होगी। इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर देवी के 31 अलग-अलग स्वरूपों के दर्शन करने का अवसर मिलेगा। प्रतिमाओं की ऊंचाई पांच फीट से लेकर 81 फीट तक होगी। करीब पांच एकड़ क्षेत्र में आयोजित होने वाले इस महोत्सव में शतचंडी महायज्ञ, धार्मिक प्रवचन, विशेष पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामूहिक भोज जैसे आयोजन किए जाएंगे। सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति द्वारा आयोजित महोत्सव का समापन 22 अक्टूबर को दशहरा समारोह के साथ होगा।
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता देवी के विभिन्न स्वरूपों की 31 प्रतिमाओं की स्थापना है। इनमें दश महाविद्या, नवदुर्गा, महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती सहित माता के अलग-अलग रूप शामिल होंगे। आयोजन समिति की ओर से लगातार दूसरे वर्ष इस धार्मिक उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालुओं को एक ही परिसर में देवी के अनेक स्वरूपों की आराधना करने का अवसर मिलेगा।
पांच एकड़ में सजेगा माता रानी का भव्य दरबार
जबलपुर के चरगवां के समीप सूखा (भरतपुर) गांव में करीब पांच एकड़ क्षेत्र में नवरात्रि महोत्सव आयोजित किया जाएगा।
आयोजन स्थल पर देवी की 31 भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इन प्रतिमाओं की ऊंचाई पांच फीट से लेकर 81 फीट तक निर्धारित की गई है।
एक ही स्थान पर देवी के इतने स्वरूपों की स्थापना इस आयोजन को विशेष बनाएगी।
श्रद्धालु अलग-अलग स्थानों पर जाने के बजाय एक ही परिसर में माता के विभिन्न रूपों के दर्शन कर सकेंगे।
आयोजन समिति का उद्देश्य धार्मिक उत्सव के माध्यम से देवी आराधना और सांस्कृतिक गतिविधियों को एक साथ प्रस्तुत करना है।
81 फीट ऊंची प्रतिमा होगी खास आकर्षण
नवरात्रि महोत्सव में स्थापित की जाने वाली प्रतिमाओं में सबसे ऊंची प्रतिमा 81 फीट की होगी।
इसके अलावा पांच फीट से लेकर अलग-अलग ऊंचाई की अन्य प्रतिमाएं भी स्थापित की जाएंगी।
विशाल प्रतिमाओं के कारण आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक वातावरण तैयार होगा।
हालांकि, 81 फीट ऊंची प्रतिमा देवी के किस स्वरूप की होगी, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इसी तरह सभी 31 प्रतिमाओं की अलग-अलग ऊंचाई और उनकी निर्माण प्रक्रिया का विस्तृत विवरण भी सामने नहीं आया है।
फिलहाल यह निश्चित है कि श्रद्धालुओं को पांच से 81 फीट तक की भव्य प्रतिमाओं के दर्शन करने का अवसर मिलेगा।
एक ही स्थान पर दश महाविद्या और नवदुर्गा के दर्शन
इस आयोजन की प्रमुख विशेषताओं में देवी के विभिन्न धार्मिक स्वरूपों की स्थापना शामिल है।
श्रद्धालुओं को दश महाविद्या और नवदुर्गा के स्वरूपों की पूजा करने का अवसर मिलेगा।
हिंदू धार्मिक परंपरा में नवदुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेष मान्यता है। नवरात्रि के दौरान देवी के इन स्वरूपों की पूजा की जाती है।
वहीं, दश महाविद्या शक्ति उपासना की महत्वपूर्ण परंपरा से जुड़ी हैं।
महोत्सव में इन स्वरूपों की प्रतिमाएं स्थापित किए जाने से श्रद्धालु एक ही परिसर में विभिन्न धार्मिक परंपराओं से जुड़े देवी स्वरूपों के दर्शन कर सकेंगे।
यह व्यवस्था आयोजन को सामान्य दुर्गा पूजा समारोह से अलग पहचान देगी।
महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की होगी आराधना
नवरात्रि महोत्सव में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के स्वरूप भी शामिल होंगे।
धार्मिक मान्यताओं में महाकाली को शक्ति, महालक्ष्मी को समृद्धि और महासरस्वती को ज्ञान से जोड़कर देखा जाता है।
इन देवी स्वरूपों की आराधना भारतीय धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
महोत्सव में अलग-अलग प्रतिमाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को देवी उपासना के विविध रूपों से परिचित होने का अवसर मिलेगा।
आयोजन के दौरान विशेष पूजा-अर्चना भी की जाएगी।
हालांकि, प्रत्येक देवी स्वरूप की पूजा के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया गया है या नहीं, इसकी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
शतचंडी महायज्ञ का होगा आयोजन
बारह दिवसीय नवरात्रि महोत्सव में शतचंडी महायज्ञ भी आयोजित किया जाएगा।
शक्ति उपासना की परंपरा में शतचंडी महायज्ञ का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
इस अनुष्ठान में देवी की आराधना और धार्मिक विधियों के अनुसार पूजा की जाती है।
नवरात्रि के दौरान इस प्रकार के अनुष्ठान श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े होते हैं।
सूखा गांव में आयोजित महोत्सव में शतचंडी महायज्ञ प्रमुख धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल रहेगा।
हालांकि, महायज्ञ किस तारीख से शुरू होगा और कितने दिनों तक चलेगा, इसकी विस्तृत समय-सारिणी सामने नहीं आई है।
धार्मिक प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे
नवरात्रि महोत्सव केवल प्रतिमाओं के दर्शन तक सीमित नहीं रहेगा।
आयोजन के दौरान धार्मिक प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
धार्मिक प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को देवी आराधना और धार्मिक परंपराओं से संबंधित विषयों की जानकारी मिल सकेगी।
वहीं, सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन में उत्सव का वातावरण बनाएंगे।
हालांकि, इन कार्यक्रमों में कौन-कौन से कलाकार, वक्ता या धार्मिक विद्वान शामिल होंगे, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
कार्यक्रमों की विस्तृत सूची सामने आने के बाद श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार आयोजन में भाग लेने की योजना बना सकेंगे।
श्रद्धालुओं के लिए सामूहिक भोज की व्यवस्था
महोत्सव के दौरान सामूहिक भोज का आयोजन भी किया जाएगा।
धार्मिक आयोजनों में सामूहिक भोज की परंपरा श्रद्धालुओं को एक साथ जोड़ने का माध्यम होती है।
सूखा गांव में आयोजित होने वाले इस उत्सव में भी श्रद्धालुओं के लिए सामूहिक भोज कार्यक्रम रखा गया है।
इसके अलावा विशेष पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक गतिविधियां आयोजित होंगी।
हालांकि, सामूहिक भोज की तारीख, समय और इसमें शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की अनुमानित संख्या की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
लगातार दूसरे वर्ष हो रहा आयोजन
सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति द्वारा सूखा (भरतपुर) गांव में यह आयोजन लगातार दूसरे वर्ष किया जा रहा है।
पिछले वर्ष के बाद इस बार भी समिति ने नवरात्रि महोत्सव आयोजित करने की तैयारी की है।
इस बार 31 प्रतिमाओं की स्थापना और पांच एकड़ क्षेत्र में धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन की योजना है।
समिति की ओर से देवी के विभिन्न स्वरूपों को एक ही स्थान पर स्थापित किया जाएगा।
हालांकि, पिछले वर्ष आयोजित उत्सव में कितनी प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं और कितने श्रद्धालु पहुंचे थे, इसका विवरण उपलब्ध नहीं है।
22 अक्टूबर को दशहरा समारोह के साथ समापन
महोत्सव की शुरुआत 11 अक्टूबर को होगी और इसका समापन 22 अक्टूबर को दशहरा समारोह के साथ किया जाएगा।
इस प्रकार आयोजन कुल 12 दिनों तक चलेगा।
इन दिनों में श्रद्धालुओं को देवी के 31 स्वरूपों के दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
दशहरा समारोह के साथ आयोजन का समापन किया जाएगा।
हालांकि, समापन दिवस पर होने वाले कार्यक्रमों और दशहरा समारोह की विस्तृत रूपरेखा अभी सामने नहीं आई है।
जबलपुर के सूखा (भरतपुर) गांव में आयोजित होने वाला यह नवरात्रि महोत्सव देवी आराधना का विशेष केंद्र बनेगा। पांच एकड़ क्षेत्र में 31 भव्य प्रतिमाओं की स्थापना, 81 फीट ऊंची प्रतिमा, शतचंडी महायज्ञ, धार्मिक प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम इस आयोजन की प्रमुख विशेषताएं होंगी। श्रद्धालु 11 से 22 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस उत्सव में माता के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन कर सकेंगे।