इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में बिजली के खुले तार की चपेट में आने से 61 वर्षीय व्यक्ति की मौत के मामले में पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। घटना भंवरकुआं थाना क्षेत्र के नर्मदा नगर की है, जहां एक मकान की गैलरी के पास से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन के संपर्क में आने से गोपाल महावर नामक व्यक्ति की जान चली गई। घटना 23 सितंबर की बताई जा रही है। मृतक कुंदन नगर का निवासी था। पुलिस के अनुसार, करंट लगने से गोपाल गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। मामले की जांच के बाद पुलिस ने मकान मालिक के बेटे पन्नालाल कराड़िया और ठेकेदार बद्री कराड़े के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत मामला दर्ज किया है।
मकान की गैलरी के पास हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, 23 सितंबर को गोपाल महावर नर्मदा नगर स्थित एक मकान में मौजूद थे। इसी दौरान मकान की गैलरी के नजदीक से गुजर रहे बिजली के खुले तार के संपर्क में आ गए।
बताया जा रहा है कि मकान के काफी करीब हाईटेंशन बिजली लाइन गुजर रही थी। इसी स्थान पर अचानक करंट लगने से गोपाल गंभीर रूप से झुलस गए।
घटना इतनी गंभीर थी कि उन्हें संभलने का अवसर नहीं मिला। करंट लगने के बाद उनकी हालत बिगड़ गई।
हादसे के बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मकान की गैलरी और बिजली लाइन के बीच वास्तविक दूरी कितनी थी, इसकी विस्तृत तकनीकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
कुंदन नगर के रहने वाले थे गोपाल महावर
मृतक की पहचान 61 वर्षीय गोपाल महावर के रूप में हुई है। वह इंदौर के कुंदन नगर क्षेत्र में रहते थे।
उनकी मौत के बाद परिवार में शोक का माहौल है।
घटना ने एक बार फिर रिहायशी क्षेत्रों में बिजली के खुले तारों और मकानों के नजदीक से गुजरने वाली हाईटेंशन लाइनों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं।
विशेष रूप से जिन मकानों की छत, बालकनी या गैलरी के पास बिजली की लाइनें गुजरती हैं, वहां अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता होती है।
ऐसे स्थानों पर थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।
जांच के बाद दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
भंवरकुआं थाना पुलिस ने मामले में नर्मदा नगर निवासी पन्नालाल कराड़िया और कुंदन नगर निवासी बद्री कराड़े के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।
पन्नालाल कराड़िया मकान मालिक का बेटा बताया गया है, जबकि बद्री कराड़े ठेकेदार है।
पुलिस ने दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत कार्रवाई की है।
यह धारा लापरवाही से किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के मामलों से संबंधित है।
पुलिस ने प्रारंभिक जांच में संबंधित व्यक्तियों की कथित लापरवाही को जांच का आधार बनाया है।
हालांकि, दोनों व्यक्तियों की वास्तविक जिम्मेदारी और दोष का अंतिम निर्धारण जांच में जुटाए गए साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
क्या है भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1)?
भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) उन मामलों में लागू होती है, जहां किसी व्यक्ति की मृत्यु लापरवाही या उतावलेपन से किए गए ऐसे कार्य के कारण होती है, जो गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में नहीं आता।
इस प्रावधान के तहत दोष सिद्ध होने पर पांच वर्ष तक के कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ इस धारा में मामला दर्ज होना उसके दोषी सिद्ध होने के बराबर नहीं है।
पुलिस को यह स्थापित करना होता है कि संबंधित व्यक्ति की कथित लापरवाही और हुई मृत्यु के बीच कानूनी रूप से महत्वपूर्ण संबंध मौजूद था।
हाईटेंशन लाइन के पास निर्माण बन सकता है खतरा
रिहायशी क्षेत्रों में बिजली की उच्च वोल्टेज वाली लाइनों के आसपास निर्माण कार्य करते समय निर्धारित सुरक्षा दूरी बनाए रखना आवश्यक होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हाईटेंशन लाइन के बहुत करीब छत, बालकनी, गैलरी या अन्य संरचना होने पर दुर्घटना का जोखिम बढ़ सकता है।
ऐसी लाइनों के आसपास धातु की सीढ़ियां, लोहे की छड़ें और निर्माण सामग्री ले जाना भी खतरनाक हो सकता है।
उच्च वोल्टेज वाली बिजली लाइनों में कुछ परिस्थितियों में सीधे तार को छुए बिना भी विद्युत आर्क के कारण गंभीर चोट लग सकती है।
इसी वजह से बिजली विभाग की अनुमति और तकनीकी सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी माना जाता है।
मकान निर्माण में सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी
मकान बनाते समय बिजली लाइनों की स्थिति का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।
किसी भी निर्माण स्थल पर काम शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आसपास बिजली की लाइनें सुरक्षित दूरी पर मौजूद हैं।
यदि बिजली के तार भवन के बहुत नजदीक हों, तो संबंधित बिजली वितरण कंपनी को इसकी सूचना देकर तकनीकी निरीक्षण कराया जाना चाहिए।
ठेकेदार और भवन मालिकों की जिम्मेदारी होती है कि वे निर्माण कार्य के दौरान लागू सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करें।
हालांकि, गोपाल महावर की मौत वाले मामले में निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारियों का विस्तृत विवरण अभी उपलब्ध नहीं है।
इंदौर में पहले भी हो चुके हैं करंट से हादसे
इंदौर में बिजली के खुले तारों और असुरक्षित विद्युत व्यवस्थाओं के कारण पहले भी जानलेवा घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
फरवरी 2026 में भंवरकुआं थाना क्षेत्र में निर्माण स्थल पर काम कर रहे कमलेश वर्मा की करंट लगने से मौत हुई थी। जांच के बाद पुलिस ने सुरक्षा उपायों में कथित लापरवाही के आरोप में दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
इसी तरह मई 2026 में राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में एक धार्मिक आयोजन के दौरान 13 वर्षीय बच्ची की करंट लगने से मौत के मामले में आयोजकों और विद्युत सजावट से जुड़े व्यक्ति के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था।
इन अलग-अलग घटनाओं से बिजली संबंधी सुरक्षा उपायों के महत्व का पता चलता है।
बिजली विभाग की तकनीकी जांच भी महत्वपूर्ण
नर्मदा नगर में हुई घटना के बाद यह जांचना महत्वपूर्ण होगा कि हाईटेंशन लाइन मकान की गैलरी के कितने करीब थी।
इसके अलावा बिजली के तार खुले क्यों थे और क्या वहां पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी, इन सवालों के जवाब भी आवश्यक हैं।
तकनीकी निरीक्षण से यह स्पष्ट हो सकता है कि संबंधित स्थान पर बिजली के तारों और भवन के बीच निर्धारित सुरक्षा दूरी का पालन किया गया था या नहीं।
यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित विभाग नियमानुसार कार्रवाई कर सकते हैं।
हालांकि, मामले में बिजली वितरण कंपनी की ओर से किए गए किसी विशेष निरीक्षण या कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
रिहायशी इलाकों में सुरक्षा जागरूकता जरूरी
शहर के कई इलाकों में पुराने भवनों के आसपास बिजली की लाइनें गुजरती हैं।
कई बार भवनों में अतिरिक्त मंजिल, बालकनी या अन्य निर्माण होने से विद्युत तारों और मकान के बीच की दूरी कम हो सकती है।
ऐसी परिस्थितियों में लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
बिजली के खुले तारों को कभी नहीं छूना चाहिए। यदि कहीं तार टूटकर गिर जाए या किसी स्थान पर करंट फैलने की आशंका हो, तो तुरंत बिजली विभाग को सूचना देनी चाहिए।
करंट की चपेट में आए व्यक्ति को सीधे हाथ लगाकर छुड़ाने का प्रयास भी खतरनाक हो सकता है। सबसे पहले सुरक्षित तरीके से बिजली आपूर्ति बंद कराना और आपातकालीन सहायता बुलाना जरूरी है।
पुलिस जांच में सामने आएंगे जिम्मेदारी के तथ्य
नर्मदा नगर में हुई घटना के बाद पुलिस ने मकान मालिक के बेटे और ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
अब जांच में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि घटनास्थल पर किस प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी और किन परिस्थितियों में गोपाल महावर बिजली के तार के संपर्क में आए।
मकान से संबंधित दस्तावेज, संबंधित व्यक्तियों के बयान और तकनीकी निरीक्षण रिपोर्ट मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
जांच से यह भी स्पष्ट होगा कि हादसे को रोकने के लिए आवश्यक सावधानियां बरती गई थीं या नहीं।
बुजुर्ग की मौत ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
61 वर्षीय गोपाल महावर की मौत ने रिहायशी भवनों के पास से गुजरने वाली बिजली लाइनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
एक ओर परिवार ने अपना सदस्य खो दिया, वहीं दूसरी ओर इस हादसे ने भवन निर्माण और विद्युत सुरक्षा के नियमों का पालन करने की आवश्यकता को सामने रखा है।
फिलहाल भंवरकुआं पुलिस ने पन्नालाल कराड़िया और बद्री कराड़े के खिलाफ बीएनएस की धारा 106(1) के तहत मामला दर्ज किया है।
आगे की जांच में ही यह स्पष्ट होगा कि हादसे के लिए किस स्तर पर लापरवाही हुई और संबंधित व्यक्तियों की कानूनी जिम्मेदारी क्या बनती है।