इंदौर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) इंदौर 17 से 19 दिसंबर तक तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'हाइड्रो इंटरनेशनल 2026' की मेजबानी करेगा। हाइड्रोलिक्स, जल संसाधन, नदी और तटीय इंजीनियरिंग पर केंद्रित यह 31वां अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन होगा। इसमें भारत के साथ विभिन्न देशों से करीब 500 प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।

सम्मेलन का आयोजन इंडियन सोसाइटी फॉर हाइड्रोलिक्स (ISH) के तहत IIT इंदौर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा किया जाएगा। इसमें शिक्षाविद, वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, उद्योग विशेषज्ञ और शोधकर्ता एक मंच पर आकर जल क्षेत्र से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों, नई तकनीकों और भविष्य की जरूरतों पर चर्चा करेंगे।

तीन दिनों तक जल प्रबंधन पर मंथन

17 दिसंबर से शुरू होने वाला सम्मेलन 19 दिसंबर तक चलेगा। इन तीन दिनों के दौरान जल संसाधन प्रबंधन, हाइड्रोलिक्स, नदी इंजीनियरिंग और तटीय इंजीनियरिंग से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा प्रस्तावित है।

सम्मेलन का मुख्य फोकस टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल जल प्रबंधन पर रहेगा। बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच जल संसाधनों का बेहतर उपयोग कैसे किया जाए, बाढ़ और सूखे जैसी परिस्थितियों के लिए किस तरह तैयारी की जाए और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल जल प्रबंधन में किस प्रकार किया जा सकता है, जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहने की उम्मीद है।

करीब 500 प्रतिनिधि होंगे शामिल

आयोजकों के अनुसार सम्मेलन में भारत और विदेशों से लगभग 500 प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। इनमें विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के शिक्षाविदों के साथ वैज्ञानिक, शोधकर्ता, नीति-निर्माता और उद्योग जगत के विशेषज्ञ शामिल होंगे।

अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले विशेषज्ञों की मौजूदगी के कारण सम्मेलन में जल से जुड़ी समस्याओं को वैज्ञानिक, तकनीकी, प्रशासनिक और औद्योगिक दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिलेगा।

शोधकर्ताओं के लिए भी यह आयोजन महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि उन्हें अपने शोध और निष्कर्ष विशेषज्ञों के सामने प्रस्तुत करने तथा दूसरे संस्थानों में चल रहे कार्यों की जानकारी हासिल करने का मंच मिलेगा।

प्रोफेसर मनीष कुमार गोयल करेंगे अध्यक्षता

IIT इंदौर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग और मेहता फैमिली स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी के प्रोफेसर मनीष कुमार गोयल सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे।

सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों के व्याख्यान, तकनीकी सत्र और शोध आधारित चर्चाओं के माध्यम से जल क्षेत्र में सामने आ रही चुनौतियों पर विचार किया जाएगा। साथ ही नई तकनीकों और व्यावहारिक समाधानों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती

जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया के कई हिस्सों में जल संसाधनों के प्रबंधन की चुनौतियां बढ़ रही हैं। कहीं अत्यधिक बारिश और बाढ़ की घटनाएं सामने आती हैं तो कहीं लंबे समय तक सूखे और जल संकट की स्थिति बनती है।

शहरीकरण और आबादी बढ़ने से पानी की मांग भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में उपलब्ध जल संसाधनों का टिकाऊ तरीके से प्रबंधन करना महत्वपूर्ण हो गया है।

हाइड्रो इंटरनेशनल 2026 में इन्हीं चुनौतियों के बीच जल प्रबंधन को अधिक प्रभावी और जलवायु-अनुकूल बनाने के तरीकों पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे।

नदी इंजीनियरिंग पर भी होगी चर्चा

भारत में नदियां पेयजल, सिंचाई और आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसके साथ ही नदी कटाव, बाढ़, तलछट और नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं।

नदी इंजीनियरिंग के माध्यम से इन चुनौतियों को वैज्ञानिक तरीके से समझने और समाधान विकसित करने का प्रयास किया जाता है। सम्मेलन में नदी प्रबंधन से जुड़े शोध और तकनीकी विकास पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

नदी प्रणालियों के अध्ययन में आधुनिक मॉडलिंग और डेटा विश्लेषण जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे विषय भी शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों के बीच चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।

तटीय इंजीनियरिंग भी महत्वपूर्ण विषय

सम्मेलन में तटीय इंजीनियरिंग पर भी विशेष ध्यान रहेगा। समुद्री तटों पर कटाव, समुद्र के जलस्तर में बदलाव और चरम मौसम की घटनाएं तटीय क्षेत्रों के लिए बड़ी चुनौती हैं।

तटीय क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और आबादी की सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक योजना और इंजीनियरिंग समाधानों की आवश्यकता होती है। इस क्षेत्र में हो रहे नए शोध और तकनीकी विकास को सम्मेलन के माध्यम से साझा करने का अवसर मिलेगा।

नई तकनीक और शोध को मिलेगा मंच

हाइड्रो इंटरनेशनल 2026 का उद्देश्य केवल समस्याओं पर चर्चा करना नहीं, बल्कि जल क्षेत्र में विकसित हो रही नई तकनीकों और शोध को साझा करने के लिए मंच उपलब्ध कराना भी है।

जल संसाधन प्रबंधन में डेटा आधारित तकनीक, कंप्यूटर मॉडलिंग, रिमोट सेंसिंग और अन्य आधुनिक प्रणालियों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इन तकनीकों के जरिए जल उपलब्धता, नदी प्रवाह और बाढ़ जैसी परिस्थितियों का बेहतर आकलन किया जा सकता है।

सम्मेलन में शामिल शोधकर्ता अपने अध्ययन और तकनीकी समाधान प्रस्तुत कर सकेंगे।

नीति-निर्माताओं और वैज्ञानिकों के बीच संवाद

जल प्रबंधन केवल तकनीकी विषय नहीं है। इससे जुड़ी योजनाओं और परियोजनाओं के लिए प्रभावी नीतियां भी जरूरी होती हैं। इसी कारण सम्मेलन में नीति-निर्माताओं की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की ओर से सामने आने वाले शोध को नीतियों और वास्तविक परियोजनाओं में लागू करने के लिए विभिन्न पक्षों के बीच संवाद जरूरी होता है।

सम्मेलन शिक्षाविदों, सरकारी प्रतिनिधियों, उद्योग विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं को एक मंच पर लाकर इस संवाद को बढ़ावा देने का अवसर देगा।

जल क्षेत्र की चुनौतियों पर रहेगा फोकस

तीन दिवसीय हाइड्रो इंटरनेशनल 2026 में हाइड्रोलिक्स, जल संसाधन, नदी और तटीय इंजीनियरिंग के साथ टिकाऊ तथा जलवायु-अनुकूल जल प्रबंधन प्रमुख विषय रहेगा।

17 से 19 दिसंबर तक IIT इंदौर में आयोजित होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में करीब 500 प्रतिनिधियों की भागीदारी की उम्मीद है। देश-विदेश के विशेषज्ञों के बीच होने वाली चर्चा से जल क्षेत्र में चल रहे शोध, तकनीकी विकास और भविष्य की जरूरतों को समझने तथा नए समाधान तलाशने के लिए महत्वपूर्ण मंच मिलने की उम्मीद है।

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