तिरुवनंतपुरम: स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने कहा है कि सरकार हेल्थकेयर सेक्टर में गलत तौर-तरीकों को खत्म करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार इलाज और दवा की खरीद में गड़बड़ियों के बारे में 'केरल कौमुदी' की चिंताओं और सुझावों को गंभीरता से लेगी और उन्हें अपनी भविष्य की योजनाओं में शामिल करेगी। मुरलीधरन ने 'केरल कौमुदी' से दवाओं की क्वालिटी और उपलब्धता सुनिश्चित करने और प्राइवेट अस्पतालों को रेगुलेट करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में बात की।
खरीदी गई दवाओं की क्वालिटी कैसे सुनिश्चित की जाएगी? केरल मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (KMSCL) के ज़रिए खरीदी जाने वाली सभी दवाओं की जांच अभी ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट करता है। प्राइवेट लैब में दवाओं की जांच कराने की प्रथा को बंद करने के निर्देश जारी किए गए हैं। क्या दवाओं की कमी नहीं है? कोई गंभीर संकट नहीं है। पिछली सरकार के आखिरी दौर में प्रक्रियाएं अव्यवस्थित हो गई थीं। चुनावों के कारण खरीद के ऑर्डर नहीं दिए गए थे। कंपनियों को भुगतान न करने के कारण जुर्माना भी लगाया गया था। अब, सभी संस्थानों को स्थानीय खरीद के ज़रिए कमी को पूरा करने की अनुमति दे दी गई है। स्टॉक की पहले से निगरानी करने और ज़रूरत पड़ने पर दखल देने के लिए एक नई व्यवस्था भी लागू की जाएगी।
अस्पतालों में असल स्टॉक, मरीज़ों की संख्या, दवा की खपत की दर, आने वाले दिनों और हफ्तों में होने वाली ज़रूरतें और सप्लाई में संभावित देरी का आकलन किया जाएगा। सरकारी अस्पतालों में ज़रूरी दवाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएंगी। शिकायतों का जल्द समाधान किया जाएगा, जबकि सप्लाई सिस्टम में समस्याओं की पहचान करके उन्हें दूर किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही ज़िला-स्तरीय निगरानी व्यवस्था शुरू की जाएगी। KMSCL द्वारा दवा खरीद में गड़बड़ियों के आरोप हैं। दवा खरीद में कथित गड़बड़ियों की विजिलेंस जांच जल्द ही शुरू होगी। जांच शुरू होने के बाद गड़बड़ियों का दायरा स्पष्ट हो जाएगा। पिनाराई विजयन की पहली सरकार ने क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स एक्ट लागू किया था।
जब वह एक्ट पहले से ही लागू है, तो प्राइवेट अस्पतालों के लिए नया कानून लाना कितना उचित है? वह कानून लागू नहीं किया गया था। हम जो कानून ला रहे हैं, उसे असल में लागू किया जा सकता है। हमारे कानून में छोटे अस्पतालों की सुरक्षा के लिए भी प्रावधान होंगे। क्या प्राइवेट अस्पतालों की फीस और दवाओं की कीमतों को रेगुलेट करना मुमकिन है? प्राइवेट अस्पतालों को अपनी मर्ज़ी से सेवाओं, दवाओं और दूसरी सुविधाओं के लिए चार्ज तय करने की इजाज़त नहीं होगी। सरकार प्राइवेट अस्पतालों में दवाओं की कीमतें तय करेगी। अभी अस्पताल ये चार्ज खुद तय करते हैं। इसे बदला जाएगा। कई प्राइवेट अस्पतालों में कमरे का किराया बहुत ज़्यादा है। इसे घटाकर मीडियम लेवल पर लाया जाएगा। कई प्राइवेट अस्पताल मरीज़ों को प्रिस्क्रिप्शन नहीं देते और उन्हें अपनी ही फार्मेसी से दवाएँ खरीदने के लिए मजबूर करते हैं। इसे भी मंज़ूर नहीं किया जा सकता। सरकार प्राइवेट अस्पतालों को अलग-अलग कैटेगरी में बांटने पर भी विचार कर रही है।