कोझिकोड। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने मंगलवार को मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR को लेकर भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। कोझिकोड में CPI(M) जिला समिति की विस्तारित बैठक के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विजयन ने दावा किया कि हालिया घटनाक्रम के कारण चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
विजयन ने अपने संबोधन में कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर लोगों का विश्वास लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया जिस तरह से आगे बढ़ाई जा रही है, उससे बड़ी संख्या में मतदाताओं के अधिकार प्रभावित होने की आशंका पैदा हुई है। उन्होंने कहा कि SIR से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर उठ रहे सवालों का चुनाव आयोग को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
पिनाराई विजयन ने कहा, “चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसकी निष्पक्षता और विश्वसनीयता गंभीर संदेह के घेरे में आ गई है।” उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली को लेकर भी आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि आयोग के भीतर फैसलों को लेकर सामने आई असहमति चिंताजनक है।
हाल के दिनों में चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर भी सार्वजनिक बहस तेज हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले महीनों में कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग ने हालांकि कहा है कि SIR से संबंधित निर्णय तय कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए गए और आयोग ने अपनी निष्पक्षता का बचाव किया है।
मंगलवार को ही सुप्रीम कोर्ट में भी SIR और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे पर सुनवाई हुई। अदालत ने यह स्पष्ट करने को कहा कि आयोग के महत्वपूर्ण फैसले सामूहिक रूप से लिए गए थे या नहीं। अदालत ने यह भी कहा कि कानून के अनुरूप नहीं पाए जाने वाले आदेशों की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।
विजयन ने अपने भाषण में आरोप लगाया कि SIR के माध्यम से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का खतरा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि किसी भी पात्र मतदाता को मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना है, ताकि कोई पात्र मतदाता बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो। आयोग मार्च 2026 में भी कह चुका था कि यह प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की जा रही है।
पिनाराई विजयन पहले भी SIR का विरोध कर चुके हैं। उन्होंने पिछले वर्ष भी आरोप लगाया था कि मतदाता सूची के व्यापक पुनरीक्षण को जल्दबाजी में लागू किया जा रहा है और इससे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। उस समय भी उन्होंने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के संबंधों को लेकर सवाल उठाए थे।
मंगलवार का उनका बयान ऐसे समय आया है जब दिल्ली में INDIA ब्लॉक के सांसदों और समर्थकों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध मार्च किया। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं। भाजपा और चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है।
विजयन ने अपने संबोधन में दावा किया कि चुनाव आयोग से जुड़े हालिया विवाद लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि आयोग जैसी संस्था की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर किसी प्रकार का संदेह पैदा होना देश के लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका की भी आलोचना करते हुए कहा कि आयोग को सभी राजनीतिक दलों और मतदाताओं का विश्वास बनाए रखना चाहिए।
वहीं चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण का उद्देश्य गलत, डुप्लिकेट या अपात्र नामों को हटाना और पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना है। आयोग ने विपक्ष के उस आरोप को स्वीकार नहीं किया है कि SIR का उद्देश्य किसी विशेष दल या वर्ग को नुकसान पहुंचाना है। सितंबर में चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से जुड़े सॉफ्टवेयर और प्रक्रियाओं की समीक्षा का भी आदेश दिया था।
SIR को लेकर राजनीतिक विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। विपक्षी दल जहां चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं आयोग अपनी प्रक्रिया को कानूनसम्मत और पारदर्शी बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और चुनाव आयोग की ओर से दिए जाने वाले जवाबों पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ मतदाताओं की भी नजर रहेगी।
पिनाराई विजयन के ताजा बयान से केरल में भी SIR को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। CPI(M) इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों और मतदाता सूची की पारदर्शिता से जोड़ रही है, जबकि चुनाव आयोग का रुख है कि पुनरीक्षण की पूरी प्रक्रिया पात्र मतदाताओं की सुरक्षा और मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है।